कोरबा, जो छत्तीसगढ़ का ऊर्जा केंद्र है, की जीवनरेखा मानी जाने वाली हसदेव नदी को जल्द ही प्रदूषण से मुक्ति मिलने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी ‘अमृत मिशन 2.0’ योजना के तहत नदी के जल शोधन के लिए 165 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। इस परियोजना से नदी को नया जीवन मिलेगा और साथ ही जल संरक्षण के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम भी बढ़ाया जाएगा।
हसदेव नदी की सफाई: एक ऐतिहासिक कदम
- प्रदूषण का कारण: कोरबा शहर के 11 बड़े नालों से निकलने वाला दूषित सीवरेज जल सीधे हसदेव नदी में गिरता था, जिससे नदी की शुद्धता प्रभावित हो रही थी।
- उपचारित जल की प्रक्रिया: अब 20 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रति दिन) क्षमता का अत्याधुनिक टर्शरी ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया जाएगा, जिससे प्रतिदिन लगभग 3.3 करोड़ लीटर दूषित जल को नदी में गिरने से पहले उपचारित किया जाएगा।
प्रभाव और फायदे
- जल पुनः शुद्ध होगा: इस योजना से हसदेव नदी के जल में प्रदूषण की कमी आएगी और उसका पानी फिर से स्वच्छ और साफ हो जाएगा।
- वेस्ट टू वेल्थ मॉडल: उपचारित जल को एनटीपीसी द्वारा निर्धारित दरों पर खरीदा जाएगा, जिससे जल की बचत होगी और उद्योगों को स्वच्छ जल मिलेगा।
- नगर निगम को मिलेगा राजस्व: यह परियोजना नगर निगम के राजस्व में वृद्धि करेगी, क्योंकि उपचारित जल का उपयोग विभिन्न उद्योगों में किया जाएगा।
परियोजना के दूरगामी लाभ
- पर्यावरण संरक्षण: यह परियोजना न केवल नदी के प्रदूषण को रोकने में मदद करेगी, बल्कि भूजल संरक्षण को भी बढ़ावा देगी। इससे आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।
- कोरबा का औद्योगिक विकास: इस पहल से कोरबा औद्योगिक प्रगति के साथ-साथ पर्यावरणीय स्वच्छता के क्षेत्र में भी अग्रणी बनेगा।
कलेक्टर का बयान
कोरबा के कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत ने इस परियोजना को ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि यह नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के मानकों का पालन करते हुए किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस परियोजना के तहत नगर निगम कोरबा द्वारा तैयार किए गए वैज्ञानिक समाधान को जल्द ही धरातल पर उतारा जाएगा, जिससे कोरबा जिले में पर्यावरणीय सुधार और जल शोधन की नई दिशा स्थापित होगी।

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