April 23, 2026

खबरों पर नजर हर पहर

B-2 बॉम्बर जेट हमले के लिए तैयार थे, ट्रंप को आखिरी समय पर आया फोन और बदल गया फैसला: जानें पूरी कहानी

16 जनवरी 2026 का दिन उस समय के लिए बेहद संवेदनशील साबित हुआ, जब दुनिया एक संभावित महायुद्ध की कगार पर खड़ी थी। अमेरिका में चर्चा तेज थी कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर सैन्य कार्रवाई का आदेश दे सकते हैं। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला खामेनेई को सत्ता से हटाने का मन बना चुके थे। इसके लिए उन्होंने पूर्व ईरानी शाही रजा पहलवी के साथ गुप्त बैठक भी की थी, और तख्तापलट का प्लान तैयार था।

लेकिन अचानक व्हाइट हाउस ने रुख बदल दिया और ईरान पर हमला टाल दिया। सवाल यह उठा कि आखिर ट्रंप ने हमला क्यों रोका। ऐसा माना जाता है कि इसका असर सिर्फ अमेरिका-ईरान संबंधों तक सीमित नहीं था, बल्कि वैश्विक स्थिरता और तेल-गैस आपूर्ति को भी ध्यान में रखा गया।

सऊदी अरब प्रिंस के कहने पर रोका हमला

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने खुद डोनाल्ड ट्रंप को फोन किया और संयम बरतने की अपील की। सऊदी नेतृत्व को डर था कि अमेरिका का हमला ईरान की जवाबी कार्रवाई को सीमित नहीं रख पाएगा और पूरा खाड़ी क्षेत्र अस्थिर हो सकता है। उनका मानना था कि ईरान की प्रतिक्रिया अमेरिका के ठिकानों, खाड़ी देशों की सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा मार्केट के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।

सम्बंधित ख़बरें

सिर्फ सऊदी अरब ही नहीं, बल्कि कतर, ओमान और मिस्र जैसे अन्य महत्वपूर्ण अरब देश भी अमेरिका को ईरान पर सैन्य कार्रवाई न करने की सलाह दे रहे थे। उनका तर्क था कि क्षेत्र पहले ही अस्थिर है और किसी बड़े सैन्य टकराव से हालात पूरी तरह बेकाबू हो सकते हैं। वे यह भी मानते थे कि यदि ईरान को कोने में धकेला गया, तो वह सीधे या अपने समर्थक गुटों के माध्यम से पूरे मध्य पूर्व में संघर्ष भड़का सकता है।

सलमान ने ट्रंप को किया मजबूर

कूटनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस सामूहिक दबाव ने ट्रंप को पीछे हटने पर मजबूर किया। व्हाइट हाउस ने समझा कि ईरान पर हमला केवल अमेरिका-ईरान का मामला नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर तेल की कीमतों, वैश्विक व्यापार और अमेरिकी हितों पर पड़ेगा। इस निर्णय से अमेरिका के भीतर नाराजगी भी हुई, लेकिन ट्रंप के पीछे सऊदी अरब और अन्य अरब देशों की सामूहिक कूटनीति, इजरायल की पूरी तरह तैयार न होना और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर सबसे बड़े कारण थे।