बीजापुर -: छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग का बीजापुर जिला, जोकि अक्सर सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच संघर्ष का केंद्र रहता है, आज एक बार फिर गम और गर्व के मिश्रित भावों में डूबा हुआ है । जंगल में सर्चिंग अभियान के दौरान नक्सलियों द्वारा घात लगाकर किए गए हमले में डीआरजी के तीन जांबाज जवानों ने अपनी शहादत दी है । इस घटना ने एक बार फिर बस्तर में शांति बहाली की राह में बिछी चुनौतियों को रेखांकित किया है ।
घटनाक्रम कैसे हुई मुठभेड़ ।
सूत्रों और पुलिस अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, सुरक्षा बलों को बीजापुर के सुदूर वनांचल क्षेत्र पोट्टेनार में नक्सलियों की मौजूदगी की खुफिया सूचना आधार पर डीआरजी (DRG), सीआरपीएफ (CRPF) और कोबरा बटालियन की संयुक्त टीम सर्चिंग ऑपरेशन के लिए निकली थी । जैसे ही जवान जंगलों के ओर प्रवेश करते ही घात लगाए बैठे नक्सलियों ने उन पर अंधाधुंध गोलीबारी शूरु कर दी । जवाबी कार्रवाई में जवानों ने तुरंत मोर्चा संभाला और मुंहतोड़ जवाब दिया । घंटों चली इस मुठभेड़ में नक्सलियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा । जिसमें 18 नकली ढेर हो गए । यह मुठभेड़ 03 दिसंबर 2025 को हुआ था ।

घटना स्थल से एक एलएमजी मशीनगन ऐके 02 नग 47, एसएलआर राइफल, इंसास रायफल 303 राइफल तथा अन्य गोला-बारूद व पिएलजी के कंपनी नंबर 02 के कमांडर माओवादी दस लाख ईनामी वेल्ला मोडियामी सहित 09 महिला नक्सली सहित 18 माओवादी इस भीषण मुठभेड़ में ढेर हुए ।
शहादतत
इस भीषण गोलीबारी में अदम्य साहस का परिचय देते हुए अपने प्राणों की आहुति देने वाले तीनों वीर शहीद जवान मोनू बडदी,दूकरु राम गोंडे,रमेश सोढ़ी ज़िले के अमन-चैन के लिए सर्वोच्च बलिदान दिए । खबर आते ही गांव में मातम छा गया । श्रद्वाजिल अर्पित में पहुंचे स्वजनो का रो-रोकर बूरा हाल ।

इनके अलावा मुठभेड़ में 03 जवान घायल हुए । जिसमें ASI जनार्दन कोरम,आरक्षक सोनदेव यादव, आरक्षक रामूल हेमला । जिन्हे तत्काल बेहतर इलाज हेतु हेलीकाप्टर के माध्यम से रायपुर रवाना किया गया,जवान खतरे से बाहर है तथा स्वास्थ्य बेहतर है ।
श्रद्धांजलि सभा, बीजापुर मुख्यालय से गंगालूर को जोड़ने वाली सड़क के बाजू में स्थित बीजापुर रक्षित केंद्र शहीद वाटिका परिसर में अंतिम सलामी हेतु शहीद जवानों के पार्थिव शरीरों को लाया गया तो यहां का माहौल अत्यंत भावुक था । बता दें कि मुठभेड़ बाद शहीद जवानों के पार्थिव शरीर पुलिस अधीक्षक कार्यालय परिसर एवं एलीफेड ग्राउंड पहुंचने पर सन्नाटा पसर ।
गार्ड ऑफ ऑनर
पुलिस के आलाधिकारियों की मौजूदगी में राजकीय सम्मान के साथ जनप्रतिनिधि एवं पुलिस अधिकारी शहीद वाटिका परिसर में शहीद जवानों के पार्थिव शरीर पर पुष्प चक्र अर्पित कर उन्हें नमन किया जाकर ‘गार्ड आफ ऑनर’ दिया गया ।

इस भावपूर्ण श्रद्धांजलि में पहुंचे दंतेवाड़ा विधायक चैत राम अट्टामी, क्षेत्रीय विधायक विक्रम मण्डावी, पुलिस महानिरीक्षक, बस्तर रेंज सुंदरराज पी, उप पुलिस महानिरीक्षक दंतेवाड़ा रेंज कमलोचन कश्यप, उप महानिरीक्षक केरिपु ऑप्स बीजापुर सेक्टर भुपेन्द्र सिंह नेगी, कलेक्टर बीजापुर संबित मिश्रा,पुलिस अधीक्षक बीजापुर डॉ जितेन्द्र कुमार यादव, पुलिस अधीक्षक दंतेवाडा गौरव राय ,पुलिस अधीक्षक एसटीएफ स्मृतिक राजनाला, उप वन मंडलाधिकारी रंगानथा रामकृष्ण वाय, जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी नम्रता चौबे, कमांडेंट कोबरा 210 अशोक कुमार, कमांडेंट 168 केरिपु आर0एस0 जंगीर, कमांडेंट 170 केरिपु सरकार राजा रमन, अति पुलिस अधीक्षक रविन्द्र कुमार मीणा, अति0 पुलिस अधीक्षक अमन कुमार झा, अति. पुलिस अधीक्षक, चन्द्रकांत गवर्ना, उप पुलिस अधीक्षक आप्स सुदीप सरकार, उप पुलिस अधीक्षक बस्तर फाईटर चन्द्रहास अन्य अधिकारी कर्मचारी, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष छत्तीसगढ़ जी वेंकट सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण एवं वरिष्ठ नागरिक उपस्थित रहे । शहीद जवानों के पार्थिव देह को अंतिम क्रियाक्रम हेतु गृह ग्राम के लिए सम्मान पूर्वक रवाना किया गया ।
अधिकारियों की आंखें नम थीं लेकिन चेहरे पर अपने जवानों के बलिदान के प्रति गर्व का भाव था ।
साथियों का दर्द, शहीद जवानों के साथी भी इस मौके पर मौजूद रहे, जिन्होंने अपने शहीद वीरों को अंतिम विदाई दी । वही शहीद जवानों का पार्थिव देह गृह गांव रवाना होते ही हमें छोड़कर जा रहे कहते हुए बिलख बिलख कर रोने के लिए टूट पड़े । मौके पर मौजूद बस्तर आईजी एवं पुलिस अधीक्षक बीजापुर ने धैर्य रखने को कहा । पुलिस अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि जवानों का यह बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा । नक्सलियों के समक्ष एक ही विकल्प बचा है । प्रतिबंधित कार्य त्यागकर खुशहाल जीवन जीने के लिए आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौट आए । यह घटना केवल एक मुठभेड़ नहीं है बल्कि बस्तर में चल रहे माओवादी संघर्ष की वर्तमान स्थिति को दर्शाती है । अक्सर देखा गया है कि सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव और नए कैंपों की स्थापना से नक्सली बैकफुट पर हैं । अपने अस्तित्व को बचाने और अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए वे इस तरह के हमले उनकी हताशा और बौखलाहट का प्रतीक है ।
जवानों का शहीद होना दुखद है
लेकिन यह इस बात का भी प्रमाण है कि सुरक्षा बल अब उन इलाकों में घुसकर ऑपरेशन कर रहे हैं, जो कभी नक्सलियों के अभेद्य किले माने जाते थे । 2026 मार्च तक केंद्र सरकार की छत्तीसगढ़ से अंतिम सफाया करने की डेड लाइन के मद्देनजर में अब आर-पार की लड़ाई नजर आ रही है ।
खुफिया तंत्र की भूमिका : प्रेसवार्ता मे बस्तर आईजी सुंदरराज पट्टालिंगम ने कहा सूचना पर पुलिस आपरेशन के लिए निकली थी । हालांकि जंगल युद्ध में भौगोलिक स्थिति का फायदा हमेशा नक्सलियों को मिलता है, जिससे वे छिपकर वार करने में सफल हो जाते हैं या फिर जवानों को भारी पड़ता देख जंगल का आड़ लेकश्र भाग निकलते है ।
मनोबल पर प्रभाव
वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि और मौके पर उपस्थिति यह संदेश देती है कि पूरा महकमा जवानों के साथ खड़ा नजर आया है । शहादत से दुख जरूर होता है, लेकिन बस्तर में तैनात जवानों का मनोबल इससे और दृढ़ होता है कि वे नक्सलवाद को जड़ से खत्म करके ही दम लेंगे ।
निष्कर्ष
ज़िले विकास अमन चैन व शांति के बहाली में इसस घटना ने बीजापुर के तीन वीर सपूतों से वंचित कर दिया है । जहाँ एक ओर शहीद परिवारों के लिए यह अपूरणीय नहीं बल्कि अविस्मरणीय क्षति है, उसे किसी भी सूरत में भरपाई नहीं किया जा सकता, वहीं दूसरी ओर यह घटना सुरक्षा बलों के उस संकल्प को और मजबूत करती है कि बस्तर के अंचल में स्थित बीजापुर को नक्सल मुक्त बनाना है । पुलिस अधिकारियों द्वारा दी गई श्रद्धांजलि उन वीरों के प्रति सम्मान और राष्ट्र की कृतज्ञता का प्रतीक है ।

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