रायपुर. छत्तीसगढ़ के स्थापना दिवस पर राजधानी में राज्योत्सव का रंगारंग आयोजन किया गया. आयोजन स्थल पर अन्य शासकीय विभागों की तुलना में वन विभाग का स्टाल लोगों को ज्यादा ही आकर्षित कर रहा था. लेकिन वन विभाग के अधिकारियों की लापरवाही की वजह से लोग अंतिम दिन तक इसका लाभ नहीं ले पाए, क्योंकि समय पर पैसे नहीं मिलने की वजह से ठेकेदार राज्योत्सव खत्म होने से पहले ही पंडाल उखाड़कर ले गया
राज्योत्सव के अवसर पर राजधानी के साइंस कॉलेज मैदान में आकर्षक साज-सज्जा के साथ तमाम शासकीय विभागों ने अपने-अपने स्टाल लोगों को आकर्षित करने के लिए सजाए हुए थे. इन विभागों में वन विभाग का स्टाल खास था. स्टॉल में वनवासियों के उत्थान के लिए संचालित योजनाओं की जीवंत प्रदर्शनी लगाई गई थी, जो लोगों को खूब लुभा रही थी.
यही नहीं स्टॉल में छत्तीसगढ़ आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधीय पादप बोर्ड की ओर से रोजाना परंपरागत वैद्यों द्वारा निःशुल्क परामर्श के साथ औषधि भी दी जा रही थी. इसके अलावा स्टाल के अलग-अलग भाग में संयुक्त वन प्रबंधन समिति तथा महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा प्रसंस्करण के कार्यों, नरवा विकास परियोजना अंतर्गत भू-जल संरक्षण का विशाल प्रादर्श (मॉडल), छत्तीसगढ़ हर्बल संजीवनी के स्टॉल व अन्य उत्पाद के स्टॉल लगाए गए थे.
शायद बड़ी संख्या में स्टाल में लोगों की उमड़ती भीड़ विभाग के अधिकारियों को रास नहीं आई, यही वजह है कि राज्योत्सव के दिन में बढ़ोतरी होने के बाद स्टाल को पंडाल से सजाने वाले ठेकेदार ने पैसे नहीं मिलने की वजह से समय पूरा होने से पहले ही पंडाल को उखाड़कर ले गया. पूरे वाकये के वायरल हो रहे वीडियो को देखने पर समझ आता है कि अधिकारी पैसा देने के संबंध में आश्वासन देना तो दूर उससे बात करना भी मुनासिब नहीं समझे.
इस तरह से वन विभाग के अधिकारियों की लापरवाही राज्योत्सव में आने वाले बहुत से दर्शक विभाग की बेहतरीन प्रदर्शनी को देखने से महरुम रह गए. अधिकारियों की इस हरकत का असर विभाग की छवि पर भी पड़ेगा, क्योंकि वन औषधियों (संजीवनी) की वजह आम लोगों के बीच अपनी पहचान रखता है. इस संबंध में वन विभाग के एपीसीसीएफ अरुण पांडेय से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव करना तक गंवारा नहीं किया.

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