August 11, 2026

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छात्रों पर लाठीचार्ज से भड़की CJP, 24 जिलों में आंदोलन का ऐलान; सरकार को दी बड़े जनआंदोलन की चेतावनी

रांची। राजधानी रांची में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुए कथित लाठीचार्ज के बाद झारखंड की राजनीति गरमा गई है। छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने सरकार के खिलाफ राज्यव्यापी आंदोलन की तैयारी का ऐलान किया है। पार्टी ने कहा है कि छात्रों की मांगों को लेकर आंदोलन को अब केवल रांची तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसे झारखंड के सभी 24 जिलों तक ले जाने की तैयारी की जा रही है।

CJP सदस्य रवि पीटर ने छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई की निंदा करते हुए इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन कर रहे छात्रों के साथ जिस तरह का व्यवहार किया गया, वह लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं है। रवि पीटर ने यह भी आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार ‘गुरुजी’ के सिद्धांतों से भटक गई है।

छात्रों की मांगों पर सरकार को घेरा

रवि पीटर के मुताबिक, छात्र लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर अनशन और प्रदर्शन कर रहे हैं। सरकार के प्रतिनिधियों की आंदोलनकारी छात्रों से मुलाकात भी हुई है, लेकिन इसके बावजूद उनकी मांगों के समाधान की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई।

उन्होंने कहा कि सरकार ने छात्रों की मांगों पर आगे बढ़कर समाधान निकालने की पर्याप्त कोशिश नहीं की। ऐसे में अब संगठन छात्रों को दोबारा एकजुट करने की तैयारी कर रहा है।

CJP का कहना है कि अलग-अलग क्षेत्रों में छात्रों का अनशन जारी रहेगा। इसके साथ ही पार्टी स्तर पर राज्यव्यापी आंदोलन की विस्तृत रणनीति तैयार की जाएगी।

रांची में लाठीचार्ज को लेकर पुलिस पर गंभीर आरोप

सोमवार को रांची में हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर CJP सदस्य कमलेश ने भी सरकार और पुलिस प्रशासन पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सोमवार शाम करीब सात बजे अंधेरे में पुलिस ने आंदोलन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज किया।

कमलेश ने कहा कि अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई लोकतांत्रिक व्यवस्था में उचित नहीं मानी जा सकती। उन्होंने सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया।

हालांकि, पुलिस कार्रवाई को लेकर लगाए गए इन आरोपों पर सरकार और पुलिस प्रशासन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।

किन परीक्षाओं को लेकर आंदोलन?

CJP नेता कमलेश ने छात्रों की प्रमुख मांगों का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक आंदोलनकारी छात्र टीडीपीएल कंपनी द्वारा आयोजित विभिन्न परीक्षाओं को रद्द करने की मांग कर रहे हैं।

इसके अलावा JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने की मांग भी दोहराई गई है। CJP का कहना है कि इन्हीं मुद्दों को लेकर छात्र लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं और सरकार को उनकी मांगों पर स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए।

हेमंत सोरेन सरकार पर तीखा हमला

कमलेश ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को संबोधित करते हुए सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि राज्य की जनता अपनी समस्याएं मुख्यमंत्री और राज्य सरकार के सामने ही रखेगी।

उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि अगर जनता अपनी मांग मुख्यमंत्री के सामने नहीं रखेगी तो क्या वह अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग या उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन के पास जाएगी?

CJP नेता ने कहा कि लोकतंत्र में जनता को अपनी समस्याएं सरकार तक पहुंचाने का अधिकार है। उनके मुताबिक सरकार को यह समझना चाहिए कि पुलिस की ताकत या लाठी के बल पर लोगों की आवाज को हमेशा के लिए दबाया नहीं जा सकता।

‘जनप्रतिनिधि जनता के सेवक हैं’

कमलेश ने सरकार को जनप्रतिनिधियों की भूमिका की याद दिलाते हुए कहा कि सत्ता में आने के बाद किसी भी सरकार को खुद को जनता का मालिक नहीं समझना चाहिए। जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों की जिम्मेदारी लोगों की समस्याओं को सुनना और उनका समाधान करना है।

उन्होंने दावा किया कि छात्रों की आवाज दबाने की कोशिश के बावजूद आंदोलन को कमजोर नहीं होने दिया जाएगा। CJP के मुताबिक छात्रों के मुद्दे को लेकर राज्य के अलग-अलग हिस्सों में आंदोलन को और मजबूत किया जाएगा।

24 जिलों तक पहुंचेगा आंदोलन

रांची में लाठीचार्ज की घटना के बाद अब आंदोलन के व्यापक होने की संभावना जताई जा रही है। CJP ने झारखंड के सभी 24 जिलों में छात्रों को संगठित करने की बात कही है।

अगर संगठन अपनी घोषित रणनीति के अनुसार आगे बढ़ता है, तो आने वाले दिनों में छात्र मुद्दों को लेकर झारखंड की राजनीति में हलचल बढ़ सकती है। फिलहाल छात्रों की परीक्षा संबंधी मांगें, उनका आंदोलन और रांची में हुई पुलिस कार्रवाई राजनीतिक चर्चा का बड़ा मुद्दा बन गए हैं।

अब नजर इस बात पर है कि राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन CJP की ओर से लगाए गए आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देता है और छात्रों की मांगों को लेकर कोई ठोस निर्णय लिया जाता है या नहीं।