January 17, 2026

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अमेरिका ने रेप और हत्या के दोषियों की रिहाई पर जताई आपत्ति : यह अनुचित व न्याय का उपहास!

11 आरोपियों को 2008 में हत्या व सामूहिक दुष्कर्म के दोषीयो को उम्रकैद की सजा सुनाई थी

अमेरिका : बिलकिस बानो रेप केस के दोषियों की रिहाई के फैसले को लेकर जहां देश भर में गुजरात सरकार की कड़ी आलोचना हो रही है वही अमेरिका ने भी इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है।

अमेरिका के अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) ने भारत में बिलकिस बानो के साथ सामूहिक बलात्कार और उसके परिवार के सदस्यों की हत्या के लिए 11 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के बाद रिहा करने के फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है।

USCIRF ने इसे “न्याय का उपहास” कहते हुए कहा, “यह धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा में लिप्त लोगों के लिए भारत में दण्ड से मुक्ति के एक पैटर्न का हिस्सा है।”

आयोग के आयुक्त स्टीफन श्नेक ने कहा कि यह फैसला धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा में शामिल लोगों को सजा से मुक्त करने के एक पैटर्न का हिस्सा है।

ज्ञात हो की इस मामले में मुंबई की विशेष सीबीआई अदालत ने 11 आरोपियों को 2008 में हत्या व सामूहिक दुष्कर्म का दोषी मानकर उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
जबकि भारत के कई राष्ट्रीय टीवी चैनलों में इस नरसंहार का इस्टिंग ऑपरेशन का प्रसारण किया था जिसमे अपराधियों ने खुद अपना जुल्म कुबूल किया था।

अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) ने गुजरात के बिलकिस बानो सामूहिक दुष्कर्म मामले के 11 दोषियों की समय पूर्व रिहाई के फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है।

आयोग ने कहा कि उम्रकैद की सजा पाए दोषियों की जल्दी रिहाई को अनुचित व न्याय का उपहास है। USCIRF के उपाध्यक्ष अब्राहम कूपर ने एक बयान जारी कर रिहाई के फैसले की निंदा की है।

आपको बता दें की वर्ष 2002 में हुए गोधरा कांड के बाद गुजरात में दंगों के दौरान गर्भवती बिलकिस बानो के सामूहिक दुष्कर्म किया गया था और उसकी पांच साल की बेटी व 13 अन्य की हत्या हुई थी। इस मामले की निष्पक्ष सुनवाई गुजरात के बजाए मुंबई की विशेष अदालत में हुई।

मामले पर मुंबई की विशेष सीबीआई अदालत ने 11 दोषीयों को 2008 में हत्या व सामूहिक दुष्कर्म का दोषी मानकर उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

अमेरिकी धार्मिक स्वतंत्रता आयोग ने श्नेक के हवाले से कहा कि 2002 के गुजरात दंगों के नरसंहार के जिम्मेदारों को सजा दिलाने में तंत्र नाकाम रहा है।
उन्होंने इसे भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा में लिप्त लोगों को सजा से मुक्ति दिलाने का एक तरीका करार दिया है।