नई दिल्ली. हर साल पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा निकाली जाती है। 10 दिन तक चलने वाली इस यात्रा में दूर-दूर के भक्त शामिल होते हैं। आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितियी को ये यात्रा निकाली जाती है। इस साल ये 20 जून से शुरू होगी। भगवान जगन्नाथ को विष्णु का अवतार माना जाता है। इस जगह से कई इंटरेस्टिंग फैक्ट्स जुड़े हैं। इस यात्रा की अपनी कुछ परंपराएं हैं। जिनमें से एक ये भी है कि यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ अपने भाई-बहन के साथ अपनी मौसी के घर गुंडिचा जाते हैं। आइए जानते हैं यात्रा से जुड़ी कुछ बातें-
गुंडीचा मंदिर में जाते हैं भगवान
दरअसल, गुंडिचा देवी को भगवान जगन्नाथ की मौसी के रूप में पूजा जाता है। यही वजह है कि रथ यात्रा के अगले दिन भगवान जगन्नाथ गुंडीचा मंदिर में एक हफ्ते के लिए जाते हैं। इस दौरान भगवान की पूजा इसी मंदिर में होती है। हफ्त भर के दौरान यहां पर अलग-अलग उत्सवों का आयोजन किया जाता है। साथ ही भगवान को कई तरह के व्यंजनों का भोग भी लगता है।
इस दिन लौटते हैं वापिस
आषाढ़ शुक्ल दशमी को जगन्नाथजी की वापसी यात्रा शुरू होती है। इसे बाहुड़ा यात्रा कहते हैं। इसमें शाम तक रथ जगन्नाथ मंदिर पहुंच जाता है और फिर एक दिन के लिए जगन्नाथजी रथ में रहते हैं, ताकी भक्त उनके दर्शन कर सकें। फिर अगले ही दिन प्रतिमाओं को मंत्रोच्चार के साथ मंदिर के गर्भगृह में फिर से स्थापित कर दिया जाता है।
बदल दी जाती हैं प्रतिमाएं
रिपोर्ट्स की मानें तो काष्ठ की बनी इन प्रतिमाओं को कुछ सालों बाद बदलने की परंपरा है। यह अवसर भी उत्सव के रूप में मनाया जाता है। वहीं पुरानी मूर्तियों को मंदिर परिसर में ही समाधि दी जाती है।

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