मनरेगा भुगतान मात्र 5रू, 5दिन के कार्य के बदले, एक विधवा महिला को दिया गया!
गांव से बाहर गए दो व्यक्तियों के खाते में डाला राशि
सरायपाली :
फर्जी मस्टररोल भरकर शासकीय राशि में गबन भ्रष्टाचार का मामला प्रकाश में आया है।
जिसे लेकर गांव के जागरूप नागरिकों ने लिखित शिकायत जनपद पंचायत सरायपाली सीईओ के नाम आवेदन दिया है।
मामला ग्राम पंचायत गोहेरापाली का है जहां मनरेगा अंतर्गत सरसरिया मुड़ा नया तालाब के नीचे नया तालाब का निर्माण कार्य जारी है।
जिसमें सरपंच रोजगार सहायिका और मेट द्वारा एन एम एम एस में अनुपस्थित मजदूरों की हाजिरी लगाई जा रही है तथा फर्जी मस्टररोल भरा जा रहा है।
जिसमें अजय दास पिता प्रेमदास जो कि गांव से बाहर रहता है , फिर भी उपस्थिति एन एम एम एस में लगाया गया है और उसके खाते में ₹900 डाला गया है।
आरोप यह भी लगाया गया है कि मेट श्रीबच्छ साहू (उप सरपंच का भतीजा है) के द्वारा कार्यस्थल में अनुपस्थित अपने भाई वीबचछ साहू तथा अपने पिता कैलाश साहू का एन एम एम एस में हाजिरी लगाया गया है तथा इसके खाते में भी ₹900 के राशि डाला गया है। जोकि, यह भी गांव से बाहर रहता है।
आगे आरोप है कि मनरेगा में कार्य करने वाले मजदूर की मजदूरी में कटौती की जा रही है। मजदूरों को 100, 120, 150 और 167 रू दैनिक मजदूरी दर से टी ए (T.A.) द्वारा मूल्यांकन किया जा रहा है, जो कि वर्तमान मजदूरी दर से बहुत कम है।
इससे मजदूर निराश और हताश है।
सरपंच तथा उप सरपंच द्वारा प्रशिक्षित एवं अनुभवी मेट के बदले अपने निजी स्वार्थ के लिए उप सरपंच का भतीजा श्रीबचछ साहू को मेट बनाया गया है, जिसके द्वारा खोदी गई खंती का गलत माफ लिया जा रहा है।
इसी क्रम में सबसे चौंकाने वाला मामला यह है कि श्रीमती जुगा पिता घसिया जो कि एक विधवा महिला है तथा रोजी में काम करती है जो लगातार 5 दिनों से मनरेगा काम पर गई लेकिन उसके मस्टररोल में केवल ₹5 की राशि ही डाली गई। जो कि अनुचित और गलत है ऐसे ही अनेकों मामलों को लेकर एक लिखित आवेदन देकर कार्यवाही के लिए गांव वालों ने सीईओ जनपद को दिया गया है।
ज्ञात हो की पूर्व में भी गोहेरापाली में मनरेगा के तहत सरसरिया मुड़ा तालाब में भ्रष्टाचार की शिकायत की गई थी लेकिन इसमें भी खानापूर्ति कर मामले को दबा दिया गया।
आपको बता दें की जहां शासन- प्रशासन मनरेगा जैसे कार्य पर लाखों-करोड़ों रू की राशि देकर कार्य को अंजाम दिया जा रहा है जिससे पलायन रोकने का भरपूर प्रयास कर रहे हैं लेकिन शासन प्रशासन में ही बैठे कुछ लोग जमीनी स्तर पर खुलेआम भ्रष्टाचार कर मजदूरों को पलायन के लिए विवश कर रहे हैं।

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