अनवर ढेबर
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में आरोपी अनवर ढेबर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने अनवर ढेबर की अंतरिम जमानत याचिका मंजूर कर ली है। हालांकि, यह राहत कई शर्तों के साथ दी गई है।
जानकारी के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने अनवर ढेबर को कुछ निर्धारित नियमों का पालन करने के निर्देश दिए हैं। इनमें राज्य से बाहर रहने समेत अन्य शर्तें शामिल हैं। जमानत मिलने के बावजूद मामले की न्यायिक प्रक्रिया जारी रहेगी।
शराब घोटाला मामले में मुख्य आरोपियों में शामिल
अनवर ढेबर छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाला मामले में प्रमुख आरोपियों में शामिल हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले में अनवर ढेबर के अलावा पूर्व IAS अधिकारी अनिल टुटेजा सहित कई लोगों को आरोपी बनाया है।
ED का आरोप है कि वर्ष 2019 से 2023 के बीच शराब कारोबार में कथित रूप से एक सिंडिकेट बनाकर अवैध तरीके से धन अर्जित किया गया।
जांच एजेंसी के अनुसार, कथित अनियमितताओं में शामिल थे—
- शराब खरीद दरों में हेरफेर।
- बिना हिसाब वाली शराब का निर्माण और बिक्री।
- एफएल-10ए लाइसेंस के माध्यम से कथित कमीशन वसूली।
- शराब कारोबार से अवैध कमाई का नेटवर्क।
ED ने की थी संपत्तियां अटैच
शराब घोटाला मामले में ED ने अनवर ढेबर से जुड़ी कई संपत्तियों पर कार्रवाई की थी। जांच एजेंसी ने रायपुर सहित अन्य स्थानों की संपत्तियों को अटैच किया था।
ED का दावा है कि ये संपत्तियां कथित अपराध से अर्जित धन से जुड़ी हुई हैं। मामले में जांच एजेंसी ने कई आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए अदालत में अभियोजन शिकायत भी दाखिल की है।
जमानत के बाद भी जारी रहेगी जांच
सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिलने के बाद अनवर ढेबर को अदालत द्वारा तय शर्तों का पालन करना होगा।
वहीं, शराब घोटाला मामले में जांच और कानूनी प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी। जांच एजेंसियां मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं।
क्या है छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामला?
छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले की जांच ED और राज्य की जांच एजेंसियां कर रही हैं। ED की ओर से दर्ज FIR में कथित रूप से 3200 करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले का उल्लेख किया गया है।
जांच एजेंसियों के अनुसार, कथित घोटाले में शराब कारोबार से जुड़े कई स्तरों पर अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है।
A कैटेगरी: डिस्टलरी संचालकों से कथित कमीशन वसूली
जांच एजेंसियों के अनुसार, डिस्टलरी संचालकों से शराब सप्लाई के बदले कथित रूप से कमीशन लिया जाता था।
आरोप है कि—
- शुरुआत में प्रति पेटी कमीशन लिया गया।
- बाद में यह राशि बढ़ाई गई।
- कीमतों में बदलाव और बिलिंग प्रक्रिया के जरिए कथित समायोजन किया गया।
B कैटेगरी: नकली होलोग्राम के जरिए बिक्री का आरोप
जांच में कथित तौर पर यह बात सामने आने का दावा किया गया कि अतिरिक्त शराब तैयार कर उस पर नकली होलोग्राम लगाकर सरकारी दुकानों के माध्यम से बिक्री की गई।
आरोपों के अनुसार—
- नकली होलोग्राम के इस्तेमाल से शराब बिक्री का नेटवर्क चलाया गया।
- कुछ जिलों में शराब खपाने की व्यवस्था की गई।
- बिक्री रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ी की गई।
C कैटेगरी: सप्लाई जोन में कथित हेरफेर
जांच एजेंसियों के अनुसार, देशी शराब सप्लाई व्यवस्था में जोन निर्धारण के दौरान कथित अनियमितताएं हुईं।
आरोप है कि सप्लाई जोन में बदलाव और टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से अवैध धन वसूली की गई।
आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर
अनवर ढेबर को सुप्रीम कोर्ट से मिली अंतरिम जमानत के बाद अब सभी की नजर आगे की न्यायिक कार्रवाई पर होगी। जांच एजेंसियां मामले में दस्तावेजों, वित्तीय लेनदेन और अन्य आरोपियों की भूमिका की जांच जारी रखे हुए हैं।

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