August 20, 2026

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फर्जी दिव्यांगता सर्टिफिकेट पर बड़ा एक्शन: 186 मामलों की जांच के लिए बनेगा विशेष मेडिकल बोर्ड

फर्जी दिव्यांगता सर्टिफिकेट

छत्तीसगढ़ में फर्जी दिव्यांगता सर्टिफिकेट से जुड़े मामलों को लेकर सरकार ने जांच की प्रक्रिया तेज करने की तैयारी शुरू कर दी है। मंगलवार को महानदी भवन, मंत्रालय, अटल नगर में समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े और स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल की संयुक्त बैठक में इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई।

बैठक में दिव्यांगजनों से जुड़ी योजनाओं और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के साथ-साथ दिव्यांगता प्रमाण-पत्र के आधार पर शासकीय सेवा में कार्यरत लोगों के मामलों की जांच को लेकर आवश्यक कदमों पर विचार-विमर्श किया गया।

186 मामलों की होगी जांच

बैठक में सामने आया कि दिव्यांगता प्रमाण-पत्र के आधार पर शासकीय सेवा में कार्यरत 186 व्यक्तियों से संबंधित प्रकरणों की जांच कराई जाएगी।

इन मामलों की जांच सामान्य प्रशासन विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप राज्य मेडिकल बोर्ड अथवा संभागीय मेडिकल बोर्ड के माध्यम से किए जाने पर चर्चा हुई है।

संबंधित व्यक्तियों को मेडिकल बोर्ड के समक्ष उपस्थित होकर स्वास्थ्य परीक्षण कराने के लिए आवश्यक निर्देश जारी किए जाएंगे।

जांच की प्रक्रिया में ये कदम शामिल होंगे

  • संबंधित व्यक्तियों को मेडिकल बोर्ड के समक्ष उपस्थित होना होगा।
  • राज्य मेडिकल बोर्ड या संभागीय मेडिकल बोर्ड के जरिए परीक्षण कराया जाएगा।
  • दिव्यांगता की वास्तविक स्थिति का मेडिकल परीक्षण किया जाएगा।
  • निर्धारित समय पर भौतिक जांच के लिए उपस्थित होने वाले मामलों की समीक्षा की जाएगी।
  • जांच प्रक्रिया को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश तय किए जाएंगे।

विशेष मेडिकल बोर्ड बनाने पर जोर

फर्जी प्रमाण-पत्र से जुड़े मामलों की जांच को जल्द पूरा करने के लिए विशेष मेडिकल बोर्ड की व्यवस्था पर भी जोर दिया गया है। सरकार का उद्देश्य है कि ऐसे मामलों का परीक्षण निर्धारित प्रक्रिया के तहत तेजी से पूरा किया जाए और रिपोर्ट समय पर उपलब्ध हो सके।

अधिकारियों ने बताया कि राज्य मेडिकल एवं संभागीय मेडिकल बोर्ड में परीक्षण की प्रक्रिया के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश तैयार किए जाएंगे। इससे जांच की प्रक्रिया को एक निर्धारित व्यवस्था के तहत आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

दिव्यांगता प्रमाण-पत्र और UDID कार्ड की प्रक्रिया होगी आसान

बैठक में केवल जांच से जुड़े मामलों पर ही चर्चा नहीं हुई। पात्र दिव्यांगजनों को सरकारी सुविधाओं का लाभ आसानी से मिल सके, इसके लिए दिव्यांगता प्रमाण-पत्र और यूडीआईडी कार्ड जारी करने की प्रक्रिया को भी सरल बनाने पर जोर दिया गया।

मेडिकल बोर्ड में विषय-विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी चर्चा हुई। इसका उद्देश्य यह है कि दिव्यांगता परीक्षण के लिए आवश्यक विशेषज्ञता संबंधित स्थान पर उपलब्ध हो सके।

ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में लगेंगे विशेष शिविर

बैठक में दूरस्थ और ग्रामीण इलाकों में रहने वाले दिव्यांगजनों की सुविधा को भी प्राथमिकता देने की बात कही गई।

इसके लिए विशेष मेडिकल बोर्ड और दिव्यांगता परीक्षण शिविर आयोजित करने की व्यवस्था को मजबूत करने पर चर्चा हुई। इससे ऐसे लोगों को प्रमाण-पत्र और यूडीआईडी कार्ड बनवाने के लिए बार-बार दूर के शहरों में जाने की परेशानी कम हो सकती है।

सरकार की ओर से पात्र दिव्यांगजनों को समयबद्ध तरीके से दिव्यांगता प्रमाण-पत्र और यूडीआईडी कार्ड उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं को मजबूत करने पर जोर दिया गया है।

योजनाओं और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने पर फोकस

संयुक्त बैठक में दिव्यांगजनों, उभयलिंगी समुदाय और अन्य अंतर्विभागीय विषयों से संबंधित कल्याणकारी योजनाओं पर भी चर्चा हुई। संबंधित योजनाओं और स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी और सुगम बनाने की दिशा में विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया गया।

फर्जी प्रमाण-पत्र से जुड़े मामलों की जांच के साथ-साथ वास्तविक रूप से पात्र दिव्यांगजनों को किसी तरह की परेशानी न हो, यह सुनिश्चित करना भी बैठक का अहम विषय रहा।

सरकार की पहल के प्रमुख बिंदु

  • 186 शासकीय कर्मचारियों से जुड़े मामलों की जांच की जाएगी।
  • राज्य या संभागीय मेडिकल बोर्ड के माध्यम से परीक्षण कराया जाएगा।
  • विशेष मेडिकल बोर्ड की व्यवस्था पर जोर दिया गया है।
  • मेडिकल परीक्षण के बाद रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया को तेज करने की तैयारी है।
  • मेडिकल बोर्ड में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर चर्चा हुई।
  • ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में विशेष जांच शिविर लगाए जाने पर विचार हुआ।
  • पात्र दिव्यांगजनों को प्रमाण-पत्र और यूडीआईडी कार्ड समय पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था मजबूत की जाएगी।

इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य एक ओर दिव्यांगता प्रमाण-पत्र से जुड़े संदिग्ध मामलों की निष्पक्ष और निर्धारित प्रक्रिया के तहत जांच करना है, वहीं दूसरी ओर वास्तविक रूप से पात्र दिव्यांगजनों को प्रमाण-पत्र और सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से उपलब्ध कराना है।