इंदौर फर्जी बिल घोटाला
इंदौर नगर निगम के बहुचर्चित 103 करोड़ रुपये के फर्जी बिल घोटाले में विशेष न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। मामले में आरोपी इंजीनियर अभय राठौर और ठेकेदार राहुल बड़ेरा को फिलहाल जेल में ही रहना होगा। दोनों की ओर से दाखिल जमानत याचिकाओं को विशेष न्यायालय ने निरस्त कर दिया है।
आरोपियों ने प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए जमानत की मांग की थी। हालांकि अदालत ने दोनों को राहत देने से इनकार कर दिया।
103 करोड़ के फर्जी बिल मामले में दोनों पर गंभीर आरोप
इंदौर नगर निगम में फर्जी बिलों के जरिए कथित तौर पर करोड़ों रुपये के घोटाले का मामला सामने आया था। जांच के दौरान इंजीनियर अभय राठौर और ठेकेदार राहुल बड़ेरा की भूमिका महत्वपूर्ण बताई गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रवर्तन निदेशालय ने भी जांच शुरू की। ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज कर वित्तीय लेनदेन और संपत्तियों से जुड़े पहलुओं की जांच की।
जून 2024 में ईडी ने दर्ज किया था केस
मामले में दोनों आरोपितों की मुख्य भूमिका सामने आने के बाद जून 2024 में ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया था।
इसके बाद एजेंसी ने मामले की विस्तृत जांच की। जांच के दौरान आरोपितों से जुड़े वित्तीय लेनदेन और संपत्तियों की जानकारी जुटाई गई।
ईडी ने जांच के दौरान आरोपितों की कुछ संपत्तियों को भी अटैच किया है। एजेंसी की कार्रवाई का उद्देश्य कथित तौर पर अपराध से जुड़े धन और उससे बनाई गई संपत्तियों का पता लगाना था।
चालान भी पेश हो चुका है
इस मामले में जांच आगे बढ़ने के बाद ईडी की ओर से चालान भी पेश किया जा चुका है। इसके बाद आरोपितों की ओर से जमानत के लिए विशेष न्यायालय का रुख किया गया।
अदालत में आरोपितों की ओर से ईडी की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए जमानत की मांग की गई थी। लेकिन सुनवाई के बाद विशेष न्यायालय ने दोनों की जमानत याचिका खारिज कर दी।
मामले में अब तक की प्रमुख बातें
- इंदौर नगर निगम में 103 करोड़ रुपये के फर्जी बिल घोटाले का मामला।
- इंजीनियर अभय राठौर और ठेकेदार राहुल बड़ेरा आरोपी हैं।
- दोनों को मामले में महत्वपूर्ण भूमिका वाला बताया गया है।
- ईडी ने जून 2024 में मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया।
- जांच के दौरान संपत्तियां अटैच की गईं।
- मामले में ईडी की ओर से चालान पेश किया जा चुका है।
- जून 2026 के पहले सप्ताह में दोनों की गिरफ्तारी हुई।
- विशेष न्यायालय ने दोनों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं।
जेल में ही रहेंगे दोनों आरोपी
विशेष न्यायालय से जमानत नहीं मिलने के बाद अभय राठौर और राहुल बड़ेरा को फिलहाल जेल में ही रहना होगा। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।
ईडी की जांच के दौरान सामने आए वित्तीय लेनदेन और संपत्तियों से जुड़े तथ्यों को मामले की आगे की सुनवाई में महत्वपूर्ण माना जा सकता है।
103 करोड़ रुपये के कथित फर्जी बिल घोटाले से जुड़े इस मामले में अब अदालत की आगामी कार्यवाही पर नजर रहेगी। जमानत याचिका खारिज होने के बाद आरोपितों के सामने आगे उपलब्ध कानूनी विकल्पों का रास्ता खुला है।

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