August 18, 2026

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बैंक के डिप्टी मैनेजर ने ही उड़ाए 14.97 लाख! ग्राहक की FD तुड़वाकर दूसरे खाते में भेजी रकम, चेक-ATM से निकाले पैसे

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में बैंक से जुड़ा एक हैरान करने वाला कथित फर्जीवाड़ा सामने आया है। आरोप है कि एक्सिस बैंक के डिप्टी मैनेजर ने ग्राहक की जानकारी और सहमति के बिना उसकी फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) समय से पहले बंद करवा दी और करीब 14.97 लाख रुपये दूसरे खाते में ट्रांसफर कर दिए।

मामले में गंज थाना पुलिस ने बैंक के डिप्टी मैनेजर कुलदीप सिंह और एक निजी फर्म के संचालक योगेश येडे के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

फर्जी कस्टमर रिक्वेस्ट फॉर्म से बदला मोबाइल नंबर

पूरा मामला देवेंद्र नगर स्थित एक्सिस बैंक की शाखा से जुड़ा बताया जा रहा है। पीड़ित सुषमा कुमार का बैंक में खाता है।

शिकायत के मुताबिक, बैंक के डिप्टी मैनेजर कुलदीप सिंह ने कथित तौर पर बिना ग्राहक की जानकारी के एक फर्जी कस्टमर रिक्वेस्ट फॉर्म तैयार कराया। इसके जरिए खाते में दर्ज मोबाइल नंबर बदल दिया गया।

मोबाइल नंबर बदलने के बाद खाते से जुड़े बैंकिंग कार्यों को अंजाम देने का आरोप है।

इसके बाद FD पर किया गया कथित खेल

पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, ग्राहक के खाते में मौजूद 14.40 लाख रुपये से अधिक की FD को समय से पहले बंद कर दिया गया।

FD की रकम बचत खाते में जमा होने के बाद खाते में पहले से मौजूद राशि भी इसमें जुड़ गई। इसके बाद कुल करीब 14.97 लाख रुपये गुढ़ियारी स्थित एक निजी फर्म के खाते में ट्रांसफर कर दिए गए।

यह रकम इंडियन सेल्स नाम के खाते में भेजे जाने की बात सामने आई है।

चेक और ATM से निकाली गई रकम

जांच में पुलिस को पता चला कि इंडियन सेल्स का खाता योगेश येडे द्वारा संचालित किया जाता है। आरोप है कि खाते में रकम पहुंचने के बाद चेक और ATM के माध्यम से पैसे निकाले गए।

अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि खाते में रकम ट्रांसफर करने और उसके बाद पैसे निकालने की पूरी प्रक्रिया में किस-किस व्यक्ति की भूमिका थी।

7 अगस्त को हुआ फर्जीवाड़े का खुलासा

मामले का खुलासा तब हुआ जब सुषमा कुमार 7 अगस्त को बैंक पहुंचीं और अपने खाते की जानकारी ली।

खाते में लेनदेन की जानकारी देखने पर उन्हें बड़ी रकम के ट्रांसफर और FD बंद किए जाने का पता चला। इसके बाद उन्होंने बैंक प्रबंधन से शिकायत की।

बैंक स्तर पर मामले की जांच की गई। आंतरिक जांच में कथित अनियमितता सामने आने के बाद बैंक मैनेजर रितेंद्र रामटेके ने गंज थाने में शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस खंगाल रही बैंक रिकॉर्ड

FIR दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच में बैंक के डिजिटल और दस्तावेजी रिकॉर्ड महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

पुलिस मुख्य रूप से इन बिंदुओं की जांच कर रही है—

कथित फर्जी कस्टमर रिक्वेस्ट फॉर्म किसने तैयार किया?
ग्राहक का मोबाइल नंबर किस प्रक्रिया से बदला गया?
FD समय से पहले बंद करने की अनुमति किस स्तर से दी गई?
14.97 लाख रुपये इंडियन सेल्स के खाते में किस आधार पर ट्रांसफर किए गए?
चेक और ATM से रकम किसने निकाली?
रकम निकालने के बाद उसका इस्तेमाल कहां किया गया?
क्या इस मामले में बैंक या बाहरी लोगों की कोई और भूमिका थी?
बैंक कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में

मामले में बैंक के डिप्टी मैनेजर का नाम सामने आने के बाद पुलिस बैंकिंग प्रक्रिया से जुड़े हर चरण की जांच कर रही है। पुलिस यह भी देखेगी कि कथित फर्जीवाड़े में बैंक के अन्य कर्मचारियों की कोई भूमिका या लापरवाही थी या नहीं।

फिलहाल पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर बैंक रिकॉर्ड, खाते से जुड़े दस्तावेज, चेक और ATM ट्रांजेक्शन की जानकारी जुटानी शुरू कर दी है।

14.97 लाख के लेनदेन ने बढ़ाई चिंता

बैंक खाते और FD को ग्राहक की सबसे सुरक्षित वित्तीय व्यवस्था माना जाता है। ऐसे में ग्राहक की जानकारी के बिना कथित तौर पर FD बंद कर बड़ी रकम दूसरे खाते में ट्रांसफर किए जाने का मामला गंभीर सवाल खड़े करता है।

हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगी। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि कथित धोखाधड़ी कैसे अंजाम दी गई और इसमें कितने लोग शामिल थे।

जांच पूरी होने के बाद ही पूरे फर्जीवाड़े की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।