August 18, 2026

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बीजापुर के बालक आश्रम में 5वीं के छात्र की मलेरिया से मौत, विधायक मंडावी ने सरकार को घेरा; बोले- ‘मलेरिया मुक्त बस्तर’ का दावा झूठा

बीजापुर। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले से आदिवासी बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर चिंताजनक खबर सामने आई है। जांगला स्थित बालक आश्रम में पढ़ने वाले कक्षा पांचवीं के छात्र लश्कर वट्टी की मलेरिया से मौत हो गई। घटना के बाद आश्रम में रहने वाले बच्चों की स्वास्थ्य सुरक्षा और समय पर इलाज उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।

बताया जा रहा है कि छात्र की तबीयत बिगड़ने के बाद इलाज में देरी को लेकर परिजनों और स्थानीय स्तर पर सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, पूरे घटनाक्रम में इलाज और प्रशासनिक स्तर पर हुई कार्रवाई को लेकर आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।

छात्र की मौत के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल

लश्कर वट्टी जांगला के बालक आश्रम में रहकर पढ़ाई कर रहा था। उसकी मलेरिया से मौत के बाद आश्रम में रहने वाले अन्य बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।

आदिवासी और दूरस्थ इलाकों में मलेरिया लंबे समय से स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए चुनौती रहा है। ऐसे क्षेत्रों में समय पर जांच, दवा और उपचार उपलब्ध कराना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

घटना के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि आश्रम में रहने वाले बच्चों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण किस तरह किया जा रहा था और बीमारी के लक्षण सामने आने पर उपचार की व्यवस्था कितनी तेजी से की गई।

इन मुद्दों पर उठ रहे सवाल
आश्रम में बच्चों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण होता है या नहीं?
छात्र की बीमारी की पहचान कब हुई?
उपचार उपलब्ध कराने में किसी तरह की देरी हुई या नहीं?
आश्रम में मलेरिया से बचाव के पर्याप्त इंतजाम हैं या नहीं?
अन्य बच्चों की स्वास्थ्य जांच के लिए क्या कदम उठाए गए?
घटना के लिए जिम्मेदारी तय करने को लेकर प्रशासन क्या कार्रवाई करेगा?
विधायक विक्रम शाह मंडावी ने सरकार को घेरा

घटना को लेकर बीजापुर विधायक विक्रम शाह मंडावी ने राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग पर निशाना साधा है। उन्होंने आदिवासी अंचल के बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर सरकार की व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए।

विधायक का कहना है कि सरकार की ओर से बस्तर को मलेरिया मुक्त बनाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्थिति इन दावों से अलग दिखाई दे रही है।

मंडावी ने छात्र की मौत का हवाला देते हुए ‘मलेरिया मुक्त बस्तर’ के दावे पर सवाल उठाया और इसे झूठा बताया। उनके बयान के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस भी तेज होने की संभावना है।

‘मलेरिया मुक्त बस्तर’ के दावे पर सवाल

बस्तर संभाग में मलेरिया की रोकथाम लंबे समय से स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकताओं में रही है। ग्रामीण और वन क्षेत्रों में बीमारी की समय पर पहचान और उपचार के लिए विभिन्न स्तरों पर अभियान चलाए जाते हैं।

इसके बावजूद किसी आश्रम में रहने वाले बच्चे की मलेरिया से मौत की घटना सामने आने के बाद निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

हालांकि, किसी एक घटना के आधार पर पूरे क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। इसके लिए प्रशासन की जांच, स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट और बीमारी से जुड़े आधिकारिक आंकड़ों को देखना जरूरी होगा।

आश्रम के दूसरे बच्चों की जांच जरूरी

छात्र की मौत के बाद बालक आश्रम में रह रहे अन्य बच्चों की स्वास्थ्य जांच को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। मलेरिया के लक्षण वाले बच्चों की तत्काल जांच और जरूरत के अनुसार उपचार बेहद जरूरी है।

इसके अलावा आश्रम परिसर में मच्छरों से बचाव, साफ-सफाई और सुरक्षित पेयजल जैसी व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की आवश्यकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों में बुखार को सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच और उपचार से बीमारी को गंभीर होने से रोका जा सकता है।

प्रशासन की कार्रवाई पर नजर

घटना के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रशासन मामले की जांच किस स्तर पर करता है। छात्र को बीमारी कब हुई, उसकी जांच और इलाज कब शुरू हुआ तथा उसे बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने में कितना समय लगा—इन सभी पहलुओं की जांच महत्वपूर्ण होगी।

यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी तय करने की मांग भी उठ सकती है।

फिलहाल बीजापुर की इस घटना ने एक बार फिर आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों में बच्चों की स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर गंभीर चर्चा छेड़ दी है। एक छात्र की मौत के बाद अब प्रशासन के सामने चुनौती है कि आश्रम में रह रहे अन्य बच्चों की तत्काल स्वास्थ्य जांच कराई जाए और मलेरिया की रोकथाम के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।