गरारे करने के फायदे
जापान की लाइफस्टाइल को अक्सर अनुशासन, साफ-सफाई और रोजमर्रा की छोटी-छोटी स्वस्थ आदतों के लिए जाना जाता है। इन्हीं आदतों में कुल्ला करना और गरारे करना भी शामिल है। जापान में Ugai यानी गरारे करने की आदत को खास तौर पर स्वच्छता से जोड़ा जाता है और कई लोग इसे बाहर से घर लौटने के बाद अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाते हैं।
हालांकि, यह समझना जरूरी है कि गरारे करना किसी वायरल बीमारी का इलाज नहीं है और न ही इससे संक्रमण से पूरी तरह बचाव की गारंटी मिलती है। फिर भी नमक मिले गुनगुने पानी से गरारे गले में होने वाली खराश और असहजता को शांत करने में मदद कर सकते हैं।
जापान में क्यों लोकप्रिय है गरारे करने की आदत?
जापान में व्यक्तिगत स्वच्छता को लेकर बचपन से ही कई आदतों पर जोर दिया जाता है। हाथ धोने के साथ-साथ मुंह की सफाई और गरारे करना भी कुछ लोगों की रोजाना की दिनचर्या का हिस्सा है।
बाहर से आने के बाद मुंह और गले को साफ करने का विचार इसी स्वच्छता की आदत से जुड़ा है। हालांकि, यह दावा करना सही नहीं होगा कि जापान में वायरल संक्रमण केवल गरारे करने की वजह से कम होते हैं। संक्रमण पर मौसम, टीकाकरण, मास्किंग, हाथों की स्वच्छता, वेंटिलेशन और अन्य कई कारकों का प्रभाव पड़ता है।
नमक-पानी से गरारे क्यों किए जाते हैं?
गुनगुने नमक-पानी से गरारे गले की खराश और जलन में अस्थायी राहत दे सकते हैं। नमक का घोल गले की सतह से अतिरिक्त म्यूकस को हटाने में मदद कर सकता है और गरारे करने की प्रक्रिया से गले की सफाई भी होती है।
इसी वजह से सर्दी-जुकाम या गले में खराश होने पर कई लोग इसे घरेलू उपाय के तौर पर अपनाते हैं।
गरारे करने के फायदे मुख्य रूप से गले की असहजता और स्वच्छता से जुड़े हो सकते हैं, लेकिन इसे वायरस को शरीर से बाहर निकालने या वायरल संक्रमण को रोकने का निश्चित तरीका नहीं माना जाना चाहिए।
नमक-पानी से गरारे करने का सही तरीका
गरारे करते समय पानी निगलने के बजाय उसे मुंह और गले में अच्छी तरह घुमाकर बाहर निकालना चाहिए।
आप इस तरह कर सकते हैं:
- एक गिलास गुनगुने पानी में थोड़ी मात्रा में नमक मिलाएं।
- नमक को पानी में अच्छी तरह घोल लें।
- पानी का थोड़ा हिस्सा मुंह में लेकर कुछ सेकंड तक कुल्ला करें।
- इसके बाद सिर को हल्का पीछे करके गले में गरारे करें।
- गरारे करने के बाद पानी बाहर निकाल दें।
- पानी को निगलने से बचें।
बहुत ज्यादा नमक डालने की जरूरत नहीं है। अत्यधिक नमकीन पानी गले में जलन पैदा कर सकता है।
दिन में कितनी बार करें?
गले में खराश होने पर नमक-पानी के गरारे कुछ लोगों को राहत दे सकते हैं। इसे अपनी सुविधा के अनुसार किया जा सकता है, लेकिन बार-बार या बहुत अधिक नमक वाले पानी से गरारे करना जरूरी नहीं है।
अगर गले में दर्द लंबे समय तक बना रहे, तेज बुखार हो, सांस लेने या निगलने में परेशानी हो या लक्षण लगातार बढ़ते जाएं, तो केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
बच्चों को गरारे कब सिखाएं?
छोटे बच्चों को गरारे करवाते समय विशेष सावधानी जरूरी है। जो बच्चे पानी को गलती से निगल सकते हैं या गरारे करने की प्रक्रिया समझ नहीं पाते, उन्हें यह तरीका नहीं सिखाना चाहिए।
बच्चे को गरारे सिखाने से पहले यह सुनिश्चित करें कि वह पानी को निगले बिना सुरक्षित तरीके से बाहर निकाल सकता है।
बच्चों में अच्छी स्वच्छता की आदतें विकसित करने के लिए ये तरीके अपनाए जा सकते हैं:
- हाथ धोने की आदत डालें।
- बाहर से आने के बाद हाथ और चेहरा साफ करवाएं।
- खांसते या छींकते समय मुंह ढकना सिखाएं।
- व्यक्तिगत तौलिया और पानी की बोतल साझा न करने की आदत डालें।
- पर्याप्त नींद और संतुलित भोजन पर ध्यान दें।
क्या गरारे करने से वायरल बीमारी नहीं होगी?
यह सबसे महत्वपूर्ण सवाल है। गरारे करना वायरल इंफेक्शन से 100 प्रतिशत बचाव की गारंटी नहीं देता। इसी तरह यह कहना भी सही नहीं है कि गरारे करने से वायरस फेफड़ों तक पहुंचने से पहले निश्चित रूप से बाहर निकल जाता है।
वायरल संक्रमण से बचाव के लिए हाथों की सफाई, भीड़भाड़ वाली जगहों पर सावधानी, पर्याप्त वेंटिलेशन, बीमार व्यक्ति से उचित दूरी और संबंधित बीमारी के लिए उपलब्ध टीकाकरण जैसी प्रमाणित सावधानियां ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।
इसलिए जापानी लोगों की गरारे करने की आदत को एक स्वच्छता और गले की देखभाल से जुड़ी दिनचर्या के रूप में देखा जा सकता है, न कि किसी बीमारी की पक्की रोकथाम या इलाज के तौर पर।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। किसी बीमारी के लक्षण होने पर डॉक्टर की सलाह को घरेलू उपायों का विकल्प न मानें।

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