PM CARES Fund
नई दिल्ली। कोरोना महामारी के दौरान मार्च 2020 में स्थापित PM CARES Fund की वित्तीय वर्ष 2024-25 की ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक हो गई है। रिपोर्ट के अनुसार 31 मार्च 2025 तक फंड का कुल क्लोजिंग बैलेंस बढ़कर ₹8,452.07 करोड़ हो गया। खास बात यह है कि इस रकम का बड़ा हिस्सा बैंक की फिक्स्ड डिपॉजिट यानी FD में रखा गया है।
ऑडिट स्टेटमेंट के मुताबिक कुल कॉर्पस में से करीब 93 फीसदी रकम यानी ₹7,846.65 करोड़ फिक्स्ड डिपॉजिट में है। वहीं सेविंग्स बैंक खातों में ₹605.41 करोड़ रखे गए हैं।
रिपोर्ट सामने आने के बाद फंड में मौजूद बड़ी राशि, इसके इस्तेमाल और ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक होने में हुई देरी को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं।
PM CARES Fund में कितनी रकम है?
31 मार्च 2025 को समाप्त वित्त वर्ष के लिए उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक फंड की वित्तीय स्थिति इस प्रकार है:
कुल क्लोजिंग बैलेंस: ₹8,452.07 करोड़
फिक्स्ड डिपॉजिट: ₹7,846.65 करोड़
FD में कुल कॉर्पस का हिस्सा: करीब 93%
सेविंग्स बैंक खातों में: ₹605.41 करोड़
घरेलू दान: ₹479.04 करोड़
विदेशी दान: ₹92.83 लाख
FD पर ब्याज: ₹469.37 करोड़
एजेंसियों से रिफंड: ₹324.66 करोड़
इन आंकड़ों से पता चलता है कि फंड की कुल राशि में ब्याज से होने वाली आय भी महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है।
FD से एक साल में ₹469 करोड़ की कमाई
वित्त वर्ष 2024-25 में PM CARES Fund को घरेलू स्रोतों से करीब ₹479 करोड़ का दान मिला। इसी अवधि में फिक्स्ड डिपॉजिट और सेविंग्स अकाउंट पर मिलने वाले ब्याज से करीब ₹469.37 करोड़ की आय दर्ज की गई।
यानी एक साल के दौरान ब्याज से हुई कमाई लगभग उस राशि के बराबर रही, जितना घरेलू दान फंड को प्राप्त हुआ।
इसका एक बड़ा कारण फंड की रकम का अधिकांश हिस्सा फिक्स्ड डिपॉजिट में रखा जाना है।
₹8,452 करोड़ के मुकाबले खर्च कितना हुआ?
ऑडिट स्टेटमेंट में वित्त वर्ष के दौरान खर्च की राशि बेहद कम दिखाई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक इस अवधि में कुल ₹87.85 लाख का भुगतान हुआ।
इसमें लगभग ₹87.84 लाख PM CARES for Children Scheme के लिए जारी किए गए। यह योजना कोविड-19 महामारी के दौरान अपने माता-पिता या अभिभावक खोने वाले बच्चों की सहायता के लिए शुरू की गई थी।
इसके अलावा करीब ₹451 बैंक और SMS चार्ज के रूप में खर्च हुए।
इस तरह उपलब्ध आंकड़ों को देखें तो वित्त वर्ष के दौरान फंड के कुल आकार की तुलना में खर्च बेहद छोटा रहा।
एजेंसियों से ₹324 करोड़ का रिफंड
ऑडिट रिपोर्ट में क्रियान्वयन एजेंसियों से ₹324.66 करोड़ के रिफंड का भी उल्लेख है। उपलब्ध विवरण में DRDO और NHAI जैसी एजेंसियों से संबंधित रिफंड का जिक्र सामने आया है।
हालांकि, रिपोर्ट के एक-पेज के वित्तीय स्टेटमेंट से यह स्पष्ट नहीं होता कि यह राशि किन विशेष परियोजनाओं से वापस आई या रिफंड की विस्तृत वजह क्या थी।
यही वजह है कि इस मद को लेकर भी अधिक विस्तृत जानकारी की मांग उठ रही है।
ऑडिट रिपोर्ट में देरी पर भी सवाल
वित्तीय वर्ष 2024-25 का समापन 31 मार्च 2025 को हुआ था। लेकिन उपलब्ध जानकारी के अनुसार संबंधित ऑडिट स्टेटमेंट पर हस्ताक्षर अगस्त 2026 के पहले सप्ताह में किए गए।
ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद कुछ वित्तीय विशेषज्ञों और कार्यकर्ताओं ने रिपोर्ट तैयार होने में लगी अवधि पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि वित्तीय रिपोर्ट समय पर उपलब्ध होने से फंड की गतिविधियों और वित्तीय स्थिति को समझना आसान होता।
RTI और CAG ऑडिट को लेकर क्या विवाद है?
PM CARES Fund की पारदर्शिता को लेकर लंबे समय से बहस होती रही है। RTI कार्यकर्ताओं और विपक्ष की ओर से फंड को सूचना के अधिकार कानून तथा CAG ऑडिट के दायरे में लाने की मांग की जाती रही है।
वहीं केंद्र सरकार और PM CARES ट्रस्ट का रुख रहा है कि यह एक सार्वजनिक चैरिटेबल ट्रस्ट है, जो स्वैच्छिक योगदान से संचालित होता है और इसमें सरकारी बजट से पैसा नहीं दिया गया है। इसी आधार पर सरकार का कहना है कि यह RTI अधिनियम के तहत ‘पब्लिक अथॉरिटी’ की श्रेणी में नहीं आता।
इस मुद्दे पर अलग-अलग पक्षों के अपने तर्क हैं और फंड की पारदर्शिता को लेकर बहस लगातार बनी हुई है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह ऑडिट रिपोर्ट?
PM CARES Fund का गठन कोविड-19 जैसी आपात स्थिति से निपटने और राहत कार्यों में सहायता के उद्देश्य से किया गया था। ऐसे में इसकी वित्तीय स्थिति से जुड़े आंकड़े सार्वजनिक होना महत्वपूर्ण है।
31 मार्च 2025 तक ₹8,452.07 करोड़ का कॉर्पस, उसमें से 93 फीसदी राशि का FD में होना, ब्याज से ₹469.37 करोड़ की आय और वित्त वर्ष में करीब ₹87.85 लाख का भुगतान—ये सभी आंकड़े रिपोर्ट को चर्चा में ला रहे हैं।
हालांकि, इन आंकड़ों की व्याख्या करते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि कम खर्च का आंकड़ा अपने आप में फंड के गलत इस्तेमाल या अनियमितता का प्रमाण नहीं है। फंड की प्रकृति, स्वीकृत परियोजनाओं और ट्रस्ट के निर्णयों को साथ में देखने पर ही पूरी तस्वीर सामने आती है।
नोट: इस रिपोर्ट में दिए गए वित्तीय आंकड़े उपलब्ध ऑडिट स्टेटमेंट में बताए गए विवरण पर आधारित हैं। किसी भी आरोप या सवाल को अंतिम निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

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