August 18, 2026

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बिहार के अशोक धाम मंदिर में दर्दनाक हादसा: भगदड़ में 7 कांवरियों की मौत, एक दर्जन से ज्यादा घायल

अशोक धाम मंदिर भगदड़

लखीसराय। सावन के तीसरे सोमवार और नाग पंचमी के मौके पर बिहार के लखीसराय स्थित प्रसिद्ध अशोक धाम मंदिर में सोमवार सुबह बड़ा हादसा हो गया। मंदिर में अचानक भगदड़ मचने से 7 कांवरियों की मौत हो गई, जबकि एक दर्जन से अधिक श्रद्धालुओं के घायल होने की जानकारी सामने आई है। हादसे के बाद मंदिर परिसर और आसपास के इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

सावन के तीसरे सोमवार को भगवान भोलेनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए सुबह से ही अशोक धाम मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुट रही थी। नाग पंचमी का पर्व होने के कारण भी मंदिर में सामान्य दिनों की तुलना में काफी ज्यादा संख्या में लोग पहुंचे थे।

अचानक बिगड़े हालात, एक-दूसरे पर गिरने लगे श्रद्धालु

जानकारी के मुताबिक, मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही थी। मंदिर परिसर में प्रवेश और निकास के लिए सीमित जगह होने के कारण भीड़ का दबाव बढ़ गया। इसी दौरान अचानक भगदड़ जैसे हालात पैदा हो गए।

कुछ ही समय में स्थिति इतनी बिगड़ गई कि लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। भीड़ में कई श्रद्धालु नीचे गिर गए और उनके ऊपर दूसरे लोग गिरते चले गए। इस दर्दनाक हादसे में 7 कांवरियों की जान चली गई।

हादसे के बाद मौके पर मौजूद लोगों में चीख-पुकार मच गई। स्थानीय लोगों और पुलिसकर्मियों ने तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया।

घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया

घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे। घायलों को एंबुलेंस और अन्य वाहनों की मदद से अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार जारी है।

प्रशासन की ओर से मृतकों की पहचान और घायलों की स्थिति से जुड़ी जानकारी जुटाई जा रही है। हादसे के बाद मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी गई है।

प्रारंभिक जानकारी में अचानक बढ़ी भीड़ को हादसे की संभावित वजह बताया जा रहा है। हालांकि भगदड़ वास्तव में किन परिस्थितियों में हुई, इसकी पूरी तस्वीर जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

सावन के सोमवार पर उमड़ी थी भारी भीड़

अशोक धाम मंदिर में सावन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक करने पहुंचते हैं। सोमवार होने के कारण इस बार भी सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी थीं।

नाग पंचमी के पर्व ने भी श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ा दी। दूर-दराज के क्षेत्रों से कांवर लेकर पहुंचे श्रद्धालुओं के साथ स्थानीय लोगों की भी बड़ी संख्या मंदिर में मौजूद थी।

भीड़ बढ़ने के साथ मंदिर के आसपास के रास्तों पर भी दबाव बढ़ता गया। ऐसे में भीड़ को नियंत्रित करना प्रशासन के लिए चुनौती बन गया।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

अशोक धाम मंदिर भगदड़ के बाद अब मंदिर की सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। इतने बड़े धार्मिक आयोजन के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त इंतजाम किए गए थे या नहीं, इसकी जांच जरूरी होगी।

इन बिंदुओं पर भी सवाल उठ रहे हैं—

क्या श्रद्धालुओं के प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग रास्ते बनाए गए थे?
क्या मंदिर परिसर में पर्याप्त बैरिकेडिंग की व्यवस्था थी?
क्या भीड़ की लगातार निगरानी की जा रही थी?
क्या पर्याप्त संख्या में पुलिस और सुरक्षाकर्मी तैनात थे?
क्या आपात स्थिति में श्रद्धालुओं को बाहर निकालने के लिए वैकल्पिक रास्ते उपलब्ध थे?

फिलहाल इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा।

प्रशासन ने शुरू किया राहत और बचाव कार्य

हादसे के बाद प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य तेज कर दिया है। पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीमें मौके पर मौजूद हैं। घायलों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।

मृतकों की पहचान की प्रक्रिया भी जारी है। प्रशासन की ओर से हादसे के कारणों और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े पहलुओं की जानकारी जुटाई जा रही है।

धार्मिक स्थलों पर बड़े पर्व और त्योहारों के दौरान लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में भीड़ प्रबंधन, सुरक्षित प्रवेश-निकास और आपातकालीन व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

अशोक धाम मंदिर में हुए इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर बड़े धार्मिक आयोजनों में भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा इंतजामों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजर प्रशासन की जांच और आगे की कार्रवाई पर है।