भोपाल। मध्य प्रदेश में दूध से बने खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश के बाद प्रदेश में एनालॉग पनीर के उत्पादन, बिक्री और इस्तेमाल पर सख्ती शुरू कर दी गई है। खाद्य सुरक्षा विभाग की टीमों ने बुधवार को कई जिलों में एक साथ कार्रवाई करते हुए पनीर, मावा और घी समेत करीब 8,135 किलो अमानक खाद्य सामग्री जब्त की।
सरकार की इस कार्रवाई के बाद दुकानदारों और खाद्य कारोबारियों में हड़कंप की स्थिति है। खास तौर पर उन उत्पादों की जांच बढ़ा दी गई है, जिनमें दूध की जगह दूसरे फैट या सामग्री का इस्तेमाल किए जाने की आशंका है।
एनालॉग पनीर पर सरकार सख्त
मध्य प्रदेश सरकार ने एनालॉग पनीर को लेकर स्पष्ट रुख अपनाया है। खाद्य सुरक्षा विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि जहां भी प्रतिबंधित या अमानक उत्पाद मिले, उसे तत्काल जब्त किया जाए।
स्वास्थ्य राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल के मुताबिक, प्रदेश में एनालॉग पनीर पर पूर्ण प्रतिबंध लागू है। इसके साथ ही पड़ोसी राज्यों से ऐसे उत्पादों की आवक रोकने के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में भी निगरानी बढ़ाई गई है।
कार्रवाई में क्या-क्या मिला?
खाद्य सुरक्षा टीमों की कार्रवाई में बड़ी मात्रा में संदिग्ध और अमानक खाद्य सामग्री सामने आई।
करीब 8,135 किलो सामग्री जब्त
पनीर के साथ मावा और घी की भी जांच
कई स्थानों से खाद्य पदार्थों के सैंपल लिए गए
संदिग्ध उत्पादों को कार्रवाई के दौरान जब्त किया गया
सीमावर्ती इलाकों में वाहनों और खाद्य सामग्री की जांच बढ़ाई गई
दुकानदारों को देना होगा असली पनीर का ब्यौरा
सरकार ने पनीर बेचने वाले कारोबारियों के लिए भी नियम सख्त किए हैं। अब विक्रेताओं को यह स्पष्ट जानकारी रखनी होगी कि उनके पास मौजूद पनीर कहां से आया है और उसका निर्माण किस प्रकार किया गया है।
ग्राहकों को भी पनीर के बारे में सही जानकारी देना जरूरी होगा। यानी दुकानदार को यह बताना होगा कि उत्पाद वास्तविक दूध से तैयार किया गया है या नहीं।
खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम कभी भी दुकानों, होटल, रेस्टोरेंट और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों से सैंपल ले सकती है। जांच में गड़बड़ी मिलने पर संबंधित उत्पाद को जब्त करने के साथ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
किन उत्पादों पर रहेगी नजर?
सरकार की कार्रवाई केवल पनीर तक सीमित नहीं है। जांच के दायरे में दूध से जुड़े कई दूसरे खाद्य उत्पाद भी शामिल हैं।
एनालॉग पनीर
मावा
घी
मसाला-नमकीन पनीर
आइसक्रीम
चॉकलेट और अन्य संबंधित उत्पाद
इन उत्पादों के निर्माण, स्टोरेज और बिक्री में नियमों का उल्लंघन मिलने पर कार्रवाई की जा सकती है।
921 सैंपल में 123 निकले अमानक
सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2025-26 में मध्य प्रदेश में पनीर के 921 नमूने जांच के लिए राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला भेजे गए थे। इनमें से 123 सैंपल अमानक पाए गए।
यानी जांच किए गए नमूनों में करीब 13 फीसदी पनीर गुणवत्ता के निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतरा। इसी तरह के आंकड़ों ने खाद्य सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाई है।
दूसरे राज्यों से आने वाले माल पर भी नजर
मध्य प्रदेश की सीमा महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों से जुड़ी हुई है। ऐसे में सरकार ने दूसरे राज्यों से आने वाले संदिग्ध दुग्ध उत्पादों की निगरानी बढ़ाने का फैसला किया है।
सीमावर्ती जिलों में चेकिंग बढ़ने से ऐसे कारोबारियों पर शिकंजा कसने की कोशिश की जा रही है, जो बिना उचित जानकारी या मानकों के खाद्य सामग्री प्रदेश में लाते हैं।
ग्राहकों के लिए क्या बदलेगा?
इस कार्रवाई का सीधा असर आम ग्राहकों पर भी पड़ सकता है। अब पनीर खरीदते समय उपभोक्ता उसके स्रोत और गुणवत्ता के बारे में जानकारी मांग सकते हैं।
सरकार का उद्देश्य यही है कि बाजार में बिकने वाला पनीर निर्धारित खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप हो और ग्राहकों को उत्पाद की वास्तविक जानकारी मिल सके।
फिलहाल प्रदेशभर में खाद्य सुरक्षा विभाग की निगरानी जारी है। आने वाले दिनों में जांच और सैंपलिंग का दायरा और बढ़ सकता है। 8,135 किलो सामग्री की जब्ती और बड़ी संख्या में अमानक सैंपल सामने आने के बाद नकली पनीर और एनालॉग डेयरी उत्पादों के खिलाफ कार्रवाई सरकार की प्राथमिकता बनती दिखाई दे रही है।

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