August 13, 2026

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CM मोहन यादव का बड़ा बयान: ‘एक देश तो कानून भी एक’, UCC पर फिर खुलकर बोले मुख्यमंत्री

भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक बार फिर यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) यानी समान नागरिक संहिता की जोरदार वकालत की है। गुरुवार को अपने बयान में मुख्यमंत्री ने कहा कि जब देश एक है तो नागरिकों के लिए कानून भी समान होना चाहिए। उनके इस बयान के बाद एक बार फिर UCC को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज होने की संभावना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की एकता, अखंडता और समानता को मजबूत करने के लिए सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था जरूरी है। उनका कहना है कि अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों की जगह एक समान व्यवस्था होने से नागरिकों के अधिकारों और जिम्मेदारियों को लेकर स्पष्टता बढ़ सकती है।

‘देश एक है तो कानून भी एक होना चाहिए’

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने UCC को लेकर अपनी राय स्पष्ट करते हुए कहा कि भारत जैसे बड़े और विविधतापूर्ण देश में सभी नागरिकों के लिए समान कानून की व्यवस्था होनी चाहिए।

उन्होंने एक समान कानूनी व्यवस्था की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि देश की पहचान एकता और अखंडता से है। ऐसे में कानून के स्तर पर भी समानता महत्वपूर्ण है।

मुख्यमंत्री के अनुसार, समान कानून का उद्देश्य किसी वर्ग को अलग करना नहीं, बल्कि सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और अवसर सुनिश्चित करना होना चाहिए।

UCC में किन विषयों को शामिल किया जाता है?

यूनिफॉर्म सिविल कोड मुख्य रूप से नागरिकों के व्यक्तिगत मामलों से जुड़े कानूनों में समानता की बात करता है। इसके तहत कई महत्वपूर्ण विषय आते हैं।

विवाह
तलाक
उत्तराधिकार
गोद लेना
परिवार से जुड़े व्यक्तिगत अधिकार
संपत्ति और पारिवारिक मामलों से जुड़े नियम

फिलहाल भारत में इन विषयों से जुड़े कई मामलों पर अलग-अलग समुदायों के व्यक्तिगत कानून लागू होते हैं। UCC का विचार इन व्यक्तिगत मामलों के लिए समान कानूनी व्यवस्था तैयार करने से जुड़ा है।

मध्य प्रदेश में भी UCC को लेकर कदम

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दावा किया कि मध्य प्रदेश सरकार भी समान नागरिक संहिता की दिशा में आगे बढ़ रही है। राज्य सरकार की ओर से पहले भी इस मुद्दे पर समर्थन जताया जाता रहा है।

मुख्यमंत्री का कहना है कि सरकार ऐसी व्यवस्था की दिशा में काम कर रही है, जिसमें सभी वर्गों के हितों को ध्यान में रखा जाए और नागरिकों को समान अधिकार मिलें।

हालांकि, UCC जैसे व्यापक विषय को लागू करने की प्रक्रिया आसान नहीं है। इसमें विभिन्न समुदायों के व्यक्तिगत कानून, परंपराएं और सामाजिक परिस्थितियां महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

UCC पर देश में लंबे समय से बहस

समान नागरिक संहिता भारत में लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय रही है। इसके समर्थकों का तर्क है कि अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के स्थान पर समान व्यवस्था होने से कानून के सामने समानता को बढ़ावा मिलेगा।

वहीं, विरोध करने वाले पक्षों की ओर से धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं तथा व्यक्तिगत कानूनों पर संभावित प्रभाव को लेकर चिंताएं जताई जाती रही हैं।

यही वजह है कि UCC केवल कानूनी विषय नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर भी बेहद महत्वपूर्ण मुद्दा माना जाता है।

मोहन यादव के बयान के बाद बढ़ सकती है सियासी हलचल

मुख्यमंत्री के ताजा बयान के बाद UCC को लेकर राजनीतिक बहस फिर तेज हो सकती है। खासकर मध्य प्रदेश में सरकार की ओर से इस मुद्दे को लेकर लगातार समर्थन जताए जाने के कारण आने वाले समय में इसे लेकर नए राजनीतिक बयान सामने आने की संभावना है।

मुख्यमंत्री ने अपने बयान में समान कानून व्यवस्था को देश की एकता और नागरिकों के समान अधिकारों से जोड़ते हुए इसे आगे बढ़ाने की जरूरत बताई है।

अब नजर इस बात पर रहेगी कि मध्य प्रदेश सरकार UCC को लेकर आगे कौन से ठोस कदम उठाती है और राष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों के बीच बहस किस दिशा में जाती है।