August 13, 2026

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3 साल से स्कूल भवन का इंतजार! पंचायत भवन में पढ़ रहे बस्तर के बच्चे, एक ही जगह चल रही पढ़ाई और सरकारी दफ्तर

जगदलपुर। बस्तर में शिक्षा व्यवस्था को लेकर किए जा रहे दावों के बीच तोकापाल विकासखंड के ग्राम एर्राकोट से सामने आई तस्वीर व्यवस्था की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर रही है। यहां बच्चे नियमित रूप से स्कूल पहुंच रहे हैं, लेकिन उनके पास पढ़ाई के लिए अपना स्कूल भवन नहीं है। तीन साल पहले जर्जर स्कूल भवन को तोड़ दिया गया था, लेकिन अब तक नया भवन तैयार नहीं हो सका है।

नतीजा यह है कि बच्चों की कक्षाएं अब पंचायत भवन में संचालित हो रही हैं। जिस भवन में बच्चों की पढ़ाई होती है, वहीं राशन वितरण, पंचायत से जुड़े कामकाज और पोस्ट ऑफिस की गतिविधियां भी चलती हैं। इससे बच्चों की पढ़ाई के लिए उपलब्ध जगह और सुविधाओं को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

जर्जर भवन तोड़ा, लेकिन नया भवन नहीं बना

एर्राकोट में पुराना स्कूल भवन जर्जर हालत में पहुंच गया था। बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए करीब तीन साल पहले इसे तोड़ दिया गया। उस समय उम्मीद थी कि पुराने भवन की जगह जल्द ही नया स्कूल भवन तैयार कर दिया जाएगा।

शुरुआत में बच्चों की पढ़ाई के लिए दो अतिरिक्त कमरों और एक सीएससी भवन का इस्तेमाल किया गया। लेकिन इनमें से एक अतिरिक्त कमरे की हालत भी खराब हो गई। छत का प्लास्टर गिरने के बाद बच्चों को वहां पढ़ाना सुरक्षित नहीं माना गया।

इसके बाद बच्चों को पंचायत भवन में शिफ्ट कर दिया गया।

पंचायत भवन बना बच्चों का स्कूल

फिलहाल पंचायत भवन में बच्चों की कक्षाएं लग रही हैं। लेकिन यह भवन केवल स्कूल के लिए इस्तेमाल नहीं होता।

इसी परिसर में अलग-अलग सरकारी और सार्वजनिक गतिविधियां भी संचालित होती हैं।

  • बच्चों की कक्षाएं यहीं लगती हैं।
  • पंचायत से जुड़े काम भी इसी भवन में होते हैं।
  • राशन वितरण की व्यवस्था भी यहीं होती है।
  • पोस्ट ऑफिस का काम भी इसी भवन से संचालित होता है।

ऐसे में पढ़ाई के लिए बच्चों को पर्याप्त और स्थायी वातावरण मिल पा रहा है या नहीं, यह बड़ा सवाल है।

तीन साल बाद भी निर्माण का इंतजार

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब जर्जर भवन को तीन साल पहले तोड़ दिया गया था, तो नया स्कूल भवन अब तक क्यों नहीं बन पाया?

स्कूल भवन टूटने के बाद बच्चों और शिक्षकों को उम्मीद थी कि कुछ समय के लिए ही वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ेगी। लेकिन समय बीतता गया और अस्थायी व्यवस्था ही स्थायी जैसी स्थिति में पहुंच गई।

तीन साल का लंबा समय गुजरने के बावजूद नया भवन तैयार नहीं होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने की चिंता बनी हुई है।

शिक्षकों के सामने भी चुनौती

शिक्षकों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा सबसे पहली प्राथमिकता है। इसी वजह से खराब कमरे में कक्षाएं संचालित करने के बजाय पंचायत भवन में पढ़ाई कराई जा रही है।

हालांकि, पंचायत भवन में पढ़ाई कराना स्थायी समाधान नहीं है। बच्चों के लिए स्कूल का अपना भवन होना जरूरी है, जहां कक्षाओं के साथ आवश्यक शैक्षणिक सुविधाएं भी उपलब्ध हों।

एक ही जगह पर कई तरह की गतिविधियां संचालित होने से पढ़ाई का माहौल प्रभावित होने की आशंका भी बनी रहती है।

बच्चों की पढ़ाई पर उठ रहे सवाल

स्कूल भवन केवल चार दीवारों और छत का नाम नहीं है। बच्चों को सुरक्षित कक्षाएं, बैठने की उचित व्यवस्था, शैक्षणिक सामग्री रखने की जगह और सीखने के लिए अनुकूल वातावरण भी चाहिए।

एर्राकोट में फिलहाल बच्चों को इन सुविधाओं के लिए स्थायी समाधान का इंतजार है।

ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षा की पहुंच बढ़ाने की बात लगातार होती है, लेकिन ऐसे मामले यह सवाल खड़ा करते हैं कि बच्चों तक स्कूल पहुंचने के बाद क्या उन्हें स्कूल की बुनियादी सुविधाएं भी मिल पा रही हैं?

अब स्थायी भवन की जरूरत

एर्राकोट के बच्चों के लिए पंचायत भवन में चल रही कक्षाएं तत्काल परिस्थिति में भले ही एक विकल्प हों, लेकिन इसे लंबे समय तक जारी रखना उचित नहीं माना जा सकता।

अब जरूरत है कि संबंधित विभाग स्कूल भवन निर्माण की स्थिति स्पष्ट करे और यह बताया जाए कि नया भवन कब तक तैयार होगा।

तीन साल से स्कूल भवन का इंतजार कर रहे एर्राकोट के बच्चों की कहानी सिर्फ एक गांव की समस्या नहीं, बल्कि दूरदराज के इलाकों में बुनियादी शिक्षा सुविधाओं की चुनौतियों की तस्वीर भी पेश करती है। बच्चों को सुरक्षित और स्थायी स्कूल भवन कब मिलेगा, अब निगाहें इसी पर टिकी हैं।