August 8, 2026

खबरों पर नजर हर पहर

छत्तीसगढ़ में श्रमिकों को बड़ा सहारा, ढाई साल में 17.82 लाख को मिला योजनाओं का लाभ; ₹800 करोड़ से अधिक खर्च

रायपुर। छत्तीसगढ़ में श्रमिकों के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को लेकर राज्य सरकार ने पिछले ढाई वर्षों में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार ने श्रमिक कल्याण को केवल योजनाओं तक सीमित रखने के बजाय इसे पारदर्शिता, तकनीकी नवाचार और त्वरित सेवा व्यवस्था से जोड़ने का प्रयास किया है।

श्रम एवं उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन के मार्गदर्शन में श्रम विभाग द्वारा श्रमिकों के पंजीयन से लेकर विभिन्न योजनाओं के हितलाभ तक की प्रक्रिया को सरल और सुगम बनाने पर जोर दिया गया है। सरकार के अनुसार, इन प्रयासों का सीधा लाभ प्रदेश के लाखों श्रमिक परिवारों को मिला है।

17.82 लाख श्रमिकों को मिला योजनाओं का लाभ

श्रम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 1 जनवरी 2024 से 30 जून 2026 के बीच लगभग 12.65 लाख नए श्रमिकों का पंजीयन किया गया। इसी अवधि में विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से लगभग 17.82 लाख श्रमिक लाभान्वित हुए।

इन योजनाओं पर सरकार ने 800 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की है। निर्माण श्रमिकों को लगभग 780 करोड़ रुपये, जबकि असंगठित श्रमिकों को करीब 187 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की गई।

हितलाभ वितरण में पारदर्शिता लाने के लिए प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) व्यवस्था को भी लागू किया गया है। इससे सहायता राशि सीधे पात्र हितग्राहियों के बैंक खातों तक पहुंचाई जा रही है।

67 कल्याणकारी योजनाओं से मिल रहा लाभ

प्रदेश में संगठित, असंगठित और निर्माण क्षेत्र से जुड़े श्रमिकों के हितों की सुरक्षा के लिए विभिन्न श्रम कल्याण मंडलों के माध्यम से 67 कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं।

इन योजनाओं का उद्देश्य श्रमिकों और उनके परिवारों को आर्थिक सहायता के साथ सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराना है।

प्रमुख लाभों में शामिल हैं—

आवास सहायता
मातृत्व सहायता
मृत्यु एवं दिव्यांग सहायता
छात्रवृत्ति
शिक्षा सहायता
मेधावी विद्यार्थियों के लिए सहायता
प्रतियोगी परीक्षाओं की निःशुल्क कोचिंग
पौष्टिक भोजन की सुविधा
अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाएं
श्रमेव जयते से ऑनलाइन सेवाएं हुईं आसान

श्रमिकों के पंजीयन और योजनाओं का लाभ लेने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए श्रम विभाग ने ‘श्रमेव जयते’ वेबसाइट और मोबाइल एप विकसित किया है।

श्रमेव जयते पोर्टल

इसके माध्यम से श्रमिक ऑनलाइन पंजीयन, आवेदन और अन्य जरूरी सेवाओं का लाभ ले सकते हैं। इससे सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत कम हुई है और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले श्रमिकों के लिए भी सेवाएं अधिक सुलभ हुई हैं।

सभी 33 जिलों में श्रम कार्यालय

श्रम विभाग ने प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में भी काम किया है। नए जिलों में श्रम अधिकारी कार्यालयों की स्थापना के लिए 20 पदों का सृजन किया गया है।

वर्तमान में राज्य के सभी 33 जिलों में श्रम कार्यालयों का संचालन सुनिश्चित किया गया है। इनमें 10 जिलों में सहायक श्रमायुक्त कार्यालय और 23 जिलों में श्रम पदाधिकारी कार्यालय संचालित हैं।

इससे श्रमिकों से जुड़े मामलों के निराकरण और योजनाओं के क्रियान्वयन को जिला स्तर पर बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

24 घंटे चल रहा मुख्यमंत्री श्रमिक सहायता केंद्र

श्रमिकों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए मुख्यमंत्री श्रमिक सहायता केंद्र को 24 घंटे और सातों दिन संचालित किया जा रहा है।

इसके अलावा राज्यभर में मोबाइल शिविर आयोजित कर श्रमिकों के पंजीयन, नवीनीकरण और आवेदन संबंधी समस्याओं का समाधान किया गया है। इससे विशेष रूप से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के श्रमिकों को अपने क्षेत्र के नजदीक सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिली है।

आवास सहायता बढ़ाकर 1.50 लाख रुपये

श्रमिक परिवारों के सामाजिक सुरक्षा कवच को मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक आवास सहायता योजना के तहत आवास सहायता राशि बढ़ाकर 1.50 लाख रुपये कर दी गई है।

इसके अलावा मृत्यु एवं दिव्यांग सहायता सहित विभिन्न योजनाओं के माध्यम से जरूरतमंद श्रमिक परिवारों को आर्थिक संबल उपलब्ध कराया जा रहा है।

1.60 लाख से अधिक महिला श्रमिकों को मातृत्व सहायता

महिला श्रमिकों के लिए भी कई महत्वपूर्ण योजनाएं संचालित की जा रही हैं। मिनीमाता महतारी जतन योजना के तहत निर्माण और असंगठित क्षेत्र की 1.60 लाख से अधिक महिला श्रमिकों को मातृत्व सहायता प्रदान की गई है।

इसका उद्देश्य महिला श्रमिकों को मातृत्व के दौरान आर्थिक सहारा उपलब्ध कराना और उनके स्वास्थ्य एवं परिवार की जरूरतों में मदद करना है।

सिर्फ ₹5 में पौष्टिक भोजन

पंजीकृत श्रमिकों के लिए शहीद वीरनारायण सिंह श्रम अन्न योजना भी संचालित की जा रही है। इसके तहत श्रमिकों को मात्र 5 रुपये में पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।

इस योजना से काम के दौरान श्रमिकों को कम कीमत पर भोजन उपलब्ध कराने के साथ उनके दैनिक खर्च का बोझ कम करने में मदद मिल रही है।

श्रमिकों के बच्चों की शिक्षा पर भी जोर

सरकार ने श्रमिक परिवारों के बच्चों की शिक्षा और भविष्य को भी श्रमिक कल्याण की योजनाओं से जोड़ा है। मेधावी शिक्षा सहायता, छात्रवृत्ति और प्रतियोगी परीक्षाओं की निःशुल्क कोचिंग जैसी योजनाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को आगे बढ़ने का अवसर दिया जा रहा है।

इन योजनाओं का उद्देश्य आर्थिक कारणों से प्रतिभाशाली बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो और श्रमिक परिवारों के बच्चों को बेहतर शिक्षा एवं रोजगार के अवसर मिल सकें।

रोजगार के साथ श्रमिक अधिकारों पर भी फोकस

सरकार ने रोजगार सृजन और श्रमिक अधिकारों के बीच संतुलन बनाने के लिए श्रम कानूनों में भी कई बदलाव किए हैं। दुकानों एवं स्थापना अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन, फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉयमेंट, महिला श्रमिकों के लिए रात्रिकालीन कार्य की सुविधा और फैक्ट्री लाइसेंस की अवधि बढ़ाने जैसे निर्णय किए गए हैं।

इन सुधारों का उद्देश्य उद्योगों के लिए बेहतर वातावरण तैयार करने के साथ श्रमिकों के अधिकारों को भी मजबूत करना है।

ढाई साल में श्रमिक कल्याण की प्रमुख उपलब्धियां
12.65 लाख नए श्रमिकों का पंजीयन
17.82 लाख श्रमिक विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित
₹800 करोड़ से अधिक का व्यय
67 कल्याणकारी योजनाएं संचालित
33 जिलों में श्रम कार्यालय
1.60 लाख से अधिक महिला श्रमिकों को मातृत्व सहायता
निर्माण श्रमिक आवास सहायता बढ़कर ₹1.50 लाख
पंजीकृत श्रमिकों को ₹5 में पौष्टिक भोजन
ऑनलाइन सेवाओं के लिए श्रमेव जयते वेबसाइट और मोबाइल एप

छत्तीसगढ़ सरकार के अनुसार, पिछले ढाई वर्षों में श्रमिक कल्याण को विकास और सुशासन की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया गया है। पंजीयन और DBT से लेकर सहायता, आवास, भोजन, मातृत्व और शिक्षा तक कई स्तरों पर किए गए प्रयासों से लाखों श्रमिक परिवारों को लाभ पहुंचाने का दावा किया गया है। सरकार का जोर अब इन योजनाओं की पहुंच को और बेहतर बनाने तथा श्रमिकों को सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार देने पर है।