August 7, 2026

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खड़गवां में स्वच्छता मिशन की बड़ी पहल: प्लास्टिक प्रबंधन यूनिट जल्द होगी शुरू, अपशिष्ट पृथक्करण पर राज्य सलाहकार का फोकस

स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले के विकासखंड खड़गवां में स्वच्छता व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए राज्य स्तर पर विशेष निरीक्षण किया गया। राज्य सलाहकार पुरुषोत्तम पांडा ने गुरुवार को ग्राम पंचायत पौड़ीडीह, खड़गवां और लालपुर का दौरा कर ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन (एसएलडब्ल्यूएम) नियम-2026 के तहत संचालित गतिविधियों की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन, स्रोत स्तर पर कचरा पृथक्करण और जनजागरूकता को स्वच्छ गांव की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बताया।

निरीक्षण के दौरान उन्होंने ग्राम पंचायतों में डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण, अपशिष्ट पृथक्करण, प्लास्टिक कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण और स्वच्छता से जुड़े नवाचारों का जमीनी स्तर पर जायजा लिया। साथ ही ग्रामीणों से सीधे संवाद कर स्वच्छता को जनआंदोलन बनाने का संदेश दिया।

स्रोत स्तर पर कचरा पृथक्करण पर विशेष जोर

राज्य सलाहकार ने ग्राम पंचायत पौड़ीडीह में ग्रामीणों को घर से ही कचरे का सही तरीके से पृथक्करण करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने डस्टबिन के माध्यम से समझाया कि—

गीला कचरा अलग रखें।
सूखा कचरा अलग संग्रहित करें।
घरेलू खतरनाक कचरे का अलग निस्तारण करें।
अन्य अपशिष्ट को निर्धारित श्रेणी के अनुसार अलग करें।

उन्होंने कहा कि यदि घर से ही कचरे का पृथक्करण किया जाए तो उसका वैज्ञानिक प्रबंधन आसान हो जाता है और कई प्रकार के अपशिष्ट को उपयोगी संसाधन में बदला जा सकता है।

3R मॉडल अपनाने की अपील

पुरुषोत्तम पांडा ने ग्रामीणों से Reduce, Reuse और Recycle (3R) की अवधारणा को अपनाने की अपील की।

उन्होंने कहा कि—

प्लास्टिक का उपयोग कम करें।
उपयोग योग्य सामग्री का दोबारा इस्तेमाल करें।
प्लास्टिक कचरे का वैज्ञानिक तरीके से पुनर्चक्रण करें।

उनके अनुसार प्रभावी प्लास्टिक प्रबंधन न केवल पर्यावरण संरक्षण में मदद करेगा, बल्कि ग्रामीणों के लिए अतिरिक्त आय और रोजगार के अवसर भी उपलब्ध करा सकता है।

प्लास्टिक प्रबंधन यूनिट जल्द होगी शुरू

निरीक्षण के दौरान राज्य सलाहकार ने ग्राम पंचायत पौड़ीडीह में स्थापित प्लास्टिक प्रबंधन इकाई को जल्द शुरू करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि यूनिट के संचालन से—

गांव में एकत्रित प्लास्टिक कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण होगा।
प्लास्टिक आधारित स्थानीय व्यवसाय विकसित किए जा सकेंगे।
ग्रामीणों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।
स्वच्छता व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी।
“जोश” अभियान की सराहना

राज्य सलाहकार ने जिले में चल रहे “जोश – जर्नी ऑफ सैनिटेशन एंड हाइजीन” अभियान की विशेष सराहना की।

उन्होंने स्वच्छता प्रहरी राजेश द्वारा किए जा रहे कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस नवाचार से—

विद्यालयों में शौचालयों के उपयोग को बढ़ावा मिला है।
विद्यार्थियों की उपस्थिति में सुधार हुआ है।
स्वच्छता के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ी है।
युवाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर बने हैं।

उन्होंने इसे स्वच्छ भारत मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन का एक सफल उदाहरण बताया।

एफएसटीपी स्थापना की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश

बैठक के दौरान वर्ष 2026-27 की वार्षिक कार्ययोजना के तहत प्रस्तावित फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट (एफएसटीपी) की स्थापना पर भी विस्तार से चर्चा हुई।

राज्य सलाहकार ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि—

संयंत्र के लिए स्थल चयन की प्रक्रिया शीघ्र पूरी की जाए।
आवश्यक प्रशासनिक एवं तकनीकी स्वीकृतियां तेजी से प्राप्त की जाएं।
परियोजना में अनावश्यक विलंब न हो।

उन्होंने कहा कि एफएसटीपी की स्थापना से मलीय कीचड़ का वैज्ञानिक प्रबंधन सुनिश्चित होगा और जिले में ओडीएफ प्लस मॉडल ग्रामों के विकास को नई गति मिलेगी।

अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की रही मौजूदगी

निरीक्षण एवं समीक्षा बैठक में जनपद पंचायत खड़गवां के मुख्य कार्यपालन अधिकारी रूपेश बंजारे, खंड स्वच्छता अधिकारी नीतिज गुप्ता, सरपंच जय मरावी, उर्मिला सिंह, सचिव वंदना मिश्रा, गीता पांडे, भुनेश्वर सिंह, ब्लॉक समन्वयक नेहा ठाकुर, प्रभा पायसी, वार्ड पंच, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मितानिन तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

स्वच्छ गांव की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

स्वच्छ भारत मिशन के तहत खड़गवां में किया गया यह निरीक्षण केवल समीक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ग्रामीण स्तर पर ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन को मजबूत करने, प्लास्टिक प्रदूषण कम करने और जनभागीदारी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण संदेश भी लेकर आया। प्लास्टिक प्रबंधन यूनिट की शुरुआत, 3R मॉडल को बढ़ावा और एफएसटीपी स्थापना जैसी पहलें भविष्य में जिले को स्वच्छ, स्वस्थ और पर्यावरण अनुकूल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।