August 3, 2026

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1133 दिन बाद बृजभूषण शरण सिंह को बड़ी राहत! महिला पहलवान यौन शोषण मामले में कोर्ट ने किया बरी

करीब तीन वर्षों तक देशभर में चर्चा का विषय रहे महिला पहलवान यौन शोषण मामले में बड़ा कानूनी फैसला सामने आया है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने पूर्व भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) अध्यक्ष और पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह तथा सह-आरोपी विनोद तोमर को इस मामले में बरी कर दिया। यह फैसला अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) अश्विनी पंवार की अदालत ने सुनाया।

यह मामला जनवरी 2023 में महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आया था। लंबे विरोध प्रदर्शन, राजनीतिक बहस और न्यायिक प्रक्रिया के बाद 1133 दिन और 127 सुनवाई के पश्चात अदालत का यह महत्वपूर्ण निर्णय सामने आया।
अदालत ने क्या फैसला सुनाया?

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर पूर्व WFI अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह और सह-आरोपी विनोद तोमर को बरी कर दिया।

यह फैसला लंबे समय से चल रही कानूनी सुनवाई के बाद आया है और इस बहुचर्चित मामले का एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।
फैसले के बाद क्या बोले बृजभूषण शरण सिंह?

फैसला आने के बाद बृजभूषण शरण सिंह ने संक्षिप्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा—

"होइहि सोइ जो राम रचि राखा।"

इससे पहले अदालत पहुंचने पर उन्होंने मीडिया से कहा था कि वे केवल अदालत के फैसले का सम्मान करेंगे और जो निर्णय होगा, उसे स्वीकार करेंगे।
क्यों चर्चा में रहा था यह मामला?

जनवरी 2023 में देश की कई महिला पहलवानों ने बृजभूषण शरण सिंह पर यौन शोषण के आरोप लगाए थे। इसके बाद यह मामला राष्ट्रीय बहस का विषय बन गया।

इस दौरान कई महत्वपूर्ण घटनाएं हुईं—

जंतर-मंतर पर महिला पहलवानों का लंबा धरना।
खेल प्रशासन को लेकर सवाल।
राजनीतिक दलों की तीखी प्रतिक्रियाएं।
भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) में प्रशासनिक बदलाव।
पुलिस जांच और अदालत में लंबी सुनवाई।

इन घटनाओं ने इस मामले को खेल जगत से आगे बढ़ाकर राष्ट्रीय राजनीतिक और सामाजिक विमर्श का हिस्सा बना दिया।
1133 दिन और 127 सुनवाई का लंबा सफर

इस मुकदमे की न्यायिक प्रक्रिया काफी लंबी रही।

मुख्य तथ्य

मामला चर्चा में आया: जनवरी 2023
कुल अवधि: 1133 दिन
अदालत में सुनवाई: 127
फैसला: राउज एवेन्यू कोर्ट द्वारा बरी

लंबी सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें, गवाहों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार किया।
फैसले का क्या मतलब है?

अदालत द्वारा बरी किए जाने का अर्थ यह है कि इस मुकदमे में उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी मानकों के आधार पर आरोप सिद्ध नहीं हो सके। यह फैसला संबंधित मामले तक सीमित है और न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर दिया गया है।
इस फैसले पर आगे क्या हो सकता है?

कानूनी प्रक्रिया के तहत यदि अभियोजन पक्ष या शिकायतकर्ता इस निर्णय से असहमत होते हैं, तो वे उच्च अदालत में अपील करने का विकल्प चुन सकते हैं। ऐसे मामलों में अंतिम कानूनी स्थिति आगे की न्यायिक कार्यवाही पर निर्भर करती है।
देशभर में रहा था हाई-प्रोफाइल मामला

यह मामला पिछले तीन वर्षों में देश के सबसे चर्चित खेल और कानूनी मामलों में शामिल रहा। खिलाड़ियों के विरोध प्रदर्शन, राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और न्यायिक सुनवाई के कारण इस पर लगातार राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा होती रही।

अब अदालत के फैसले के बाद इस मुकदमे ने एक महत्वपूर्ण कानूनी पड़ाव पार कर लिया है। हालांकि, यदि इस फैसले को चुनौती दी जाती है, तो मामले की आगे की दिशा उच्च न्यायालय में होने वाली कार्यवाही से तय होगी।