मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भवनों के अधिभोग (ऑक्यूपेंसी) उल्लंघन से जुड़े मामलों को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई अहम बैठक में बड़ा फैसला लिया गया है। बैठक में तय किया गया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के पालन के लिए एक हाई लेवल कमेटी गठित की जाएगी, जो पूरे मामले का अध्ययन कर सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। जब तक समिति अपनी सिफारिशें नहीं देती और सरकार आगे की प्रक्रिया तय नहीं करती, तब तक नगर निगम भोपाल कोई कठोर कार्रवाई नहीं करेगा।
इस फैसले से फिलहाल उन भवन मालिकों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों को राहत मिली है, जो संभावित कार्रवाई को लेकर चिंतित थे।
मुख्यमंत्री ने बुलाई अहम समीक्षा बैठक
भोपाल में आयोजित इस बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ कई मंत्री, विधायक और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक में शामिल प्रमुख लोग—
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल
मंत्री विश्वास सारंग
मंत्री कृष्णा गौर
विधायक रामेश्वर शर्मा
विधायक भगवान दास सबनानी
अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई
नगरीय प्रशासन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी
भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा
नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन
बैठक का मुख्य उद्देश्य सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुपालन की रूपरेखा तैयार करना था।
क्यों बनी हाई लेवल कमेटी?
बैठक में बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा सिविल अपील क्रमांक 14604/2024 और विविध अपील डायरी क्रमांक 1713/2026 में दिए गए आदेशों के अनुपालन के लिए नीतिगत निर्णय आवश्यक हैं।
सरकार ने माना कि मामले के सभी कानूनी, प्रशासनिक और व्यावहारिक पहलुओं का गहन अध्ययन किए बिना कोई बड़ा कदम उठाना उचित नहीं होगा। इसी कारण विशेषज्ञों की एक उच्च स्तरीय समिति गठित करने का निर्णय लिया गया।
फिलहाल नहीं होगी सख्त कार्रवाई
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय यह रहा कि—
नगर निगम भोपाल फिलहाल किसी भवन पर कठोर कार्रवाई नहीं करेगा।
कार्रवाई से पहले समिति की रिपोर्ट का इंतजार किया जाएगा।
सरकार रिपोर्ट के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय करेगी।
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जाएगा।
इस निर्णय से फिलहाल प्रभावित भवनों के मालिकों को अस्थायी राहत मिली है।
समिति में कौन-कौन होंगे शामिल?
सरकार द्वारा गठित हाई लेवल कमेटी में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे।
समिति की संरचना
अध्यक्ष – अपर मुख्य सचिव, नगरीय विकास एवं आवास विभाग
अपर प्रमुख सचिव, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग
सचिव, श्रम विभाग
आयुक्त, नगरीय प्रशासन एवं विकास
महानिरीक्षक, पंजीयन एवं मुद्रांक
सदस्य सचिव, मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मंडल
उप सचिव, पर्यावरण विभाग
आयुक्त, नगर तथा ग्राम निवेश
विशेष आमंत्रित सदस्य
भोपाल कलेक्टर
नगर निगम आयुक्त, भोपाल
समिति क्या करेगी?
सरकार के अनुसार समिति—
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का विस्तृत अध्ययन करेगी।
भवनों के अधिभोग उल्लंघन से जुड़े सभी पहलुओं की समीक्षा करेगी।
कानूनी और प्रशासनिक समाधान सुझाएगी।
शासन को विस्तृत प्रतिवेदन सौंपेगी।
रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई का रोडमैप तैयार किया जाएगा।
भवन मालिकों के लिए क्या मायने हैं?
इस फैसले के बाद फिलहाल तत्काल कार्रवाई की आशंका टल गई है।
संभावित प्रभाव
भवन मालिकों को अस्थायी राहत।
कार्रवाई से पहले स्पष्ट नीति बनेगी।
कानूनी प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होगी।
प्रशासनिक निर्णयों में पारदर्शिता आने की संभावना।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप आगे की कार्रवाई होगी।
आगे क्या होगा?
समिति अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। इसके बाद राज्य सरकार रिपोर्ट पर विचार करेगी और तय करेगी कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन किस प्रक्रिया के तहत किया जाए। उसी के अनुरूप नगर निगम भोपाल भविष्य में आवश्यक कार्रवाई करेगा।

More Stories
1133 दिन बाद बृजभूषण शरण सिंह को बड़ी राहत! महिला पहलवान यौन शोषण मामले में कोर्ट ने किया बरी
दिल्ली सरकार का बड़ा ऐलान! 16 साल बाद आपदा प्रबंधन कर्मचारियों का मानदेय 100% तक बढ़ेगा
स्कूल में शराब पार्टी का VIDEO वायरल, दो शिक्षक निलंबित! शिक्षा विभाग की बड़ी कार्रवाई