कांकेर मलेरिया
कांकेर जिले में मलेरिया से एक 25 वर्षीय महिला की मौत हो गई। तीन माह के जुड़वा बच्चों की मां समेत अब तक जिले में चार लोगों की जान जा चुकी है। लगातार बढ़ते मामलों से ग्रामीणों में दहशत और स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
कांकेर: छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में कांकेर मलेरिया का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। भानुप्रतापपुर विकासखंड के ग्राम चिचगांव में मलेरिया से एक 25 वर्षीय महिला की मौत का मामला सामने आया है। इस मौत के साथ ही जिले में मलेरिया से मरने वालों की संख्या चार हो गई है।
सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि मृतका अपने पीछे 5 वर्ष की एक बेटी और केवल तीन माह के जुड़वा शिशुओं को छोड़ गई है। इस घटना ने पूरे गांव को गहरे सदमे में डाल दिया है और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, राकेश्वरी कोला (25 वर्ष), पति छबी लाल कोला, ग्राम चिचगांव की निवासी थीं। कुछ दिन पहले वह अपने मायके अड़जाल (मानपुर क्षेत्र) गई थीं।
परिजनों के मुताबिक, मायके में ही उनकी तबीयत बिगड़ने लगी थी। सोमवार को गांव की मितानिन ने घर पहुंचकर मलेरिया की जांच की, जिसमें उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई।
बताया जा रहा है कि उसी रात उनकी तबीयत अचानक ज्यादा बिगड़ गई। अगले दिन उनकी मृत्यु हो गई। रिपोर्टों के अनुसार, समय पर समुचित उपचार नहीं मिल पाने की बात भी सामने आ रही है। हालांकि, इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग की विस्तृत आधिकारिक जांच या बयान का इंतजार है।
तीन माह के जुड़वा बच्चों के सिर से उठा मां का साया
राकेश्वरी कोला की मौत ने पूरे परिवार को गहरे संकट में डाल दिया है।
उनके परिवार में:
5 वर्ष की एक बेटी
मात्र 3 माह के जुड़वा नवजात बच्चे
अब मां के बिना रह गए हैं। इस घटना के बाद गांव में शोक का माहौल है और परिवार के सामने बच्चों की देखभाल की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
जिले में अब तक चार मौतें
कांकेर जिले में मलेरिया के बढ़ते मामलों ने चिंता बढ़ा दी है।
अब तक:
मलेरिया से चार लोगों की मौत की जानकारी सामने आ चुकी है।
इनमें आश्रम-छात्रावासों में रहने वाले दो बच्चों की मौत भी शामिल है।
अब ग्रामीण क्षेत्र की एक महिला की मौत ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
लगातार सामने आ रहे मामलों के कारण स्थानीय लोग संक्रमण के फैलाव को लेकर चिंतित हैं।
स्वास्थ्य विभाग के दावों पर उठे सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि:
समय पर मलेरिया नियंत्रण अभियान प्रभावी ढंग से नहीं चलाया गया।
कई क्षेत्रों में नियमित छिड़काव नहीं हुआ।
बीमारी की शुरुआती पहचान और उपचार में भी देरी हुई।
हालांकि, इन आरोपों पर स्वास्थ्य विभाग की विस्तृत प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है।
ग्रामीणों में दहशत का माहौल
भानुप्रतापपुर और आसपास के गांवों में लगातार बढ़ रहे मलेरिया मामलों से लोगों में भय का माहौल है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि:
बरसात के मौसम में संक्रमण तेजी से फैल रहा है।
दूरस्थ गांवों तक स्वास्थ्य सुविधाएं समय पर नहीं पहुंच पा रही हैं।
गंभीर मरीजों को तत्काल उपचार उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती बना हुआ है।
ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग से विशेष चिकित्सा शिविर, व्यापक जांच अभियान और मच्छर नियंत्रण के प्रभावी उपायों की मांग की है।
मलेरिया से बचाव के लिए सावधानियां
विशेषज्ञों के अनुसार, बरसात के मौसम में मलेरिया से बचाव के लिए कुछ सावधानियां बेहद जरूरी हैं।
घर के आसपास पानी जमा न होने दें।
मच्छरदानी का नियमित उपयोग करें।
पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें।
तेज बुखार, ठंड लगना या कमजोरी महसूस होने पर तुरंत जांच कराएं।
डॉक्टर की सलाह के बिना दवा लेने से बचें।
मुख्य बातें
कांकेर जिले में मलेरिया से 25 वर्षीय महिला की मौत।
मृतका तीन माह के जुड़वा बच्चों और पांच वर्षीय बेटी की मां थी।
जिले में अब तक मलेरिया से चार लोगों की मौत की सूचना।
पहले दो आश्रम-छात्रावास के बच्चों की भी हो चुकी है मौत।
ग्रामीणों ने स्वास्थ्य सेवाओं और रोकथाम व्यवस्था पर सवाल उठाए।
स्वास्थ्य विभाग की विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार।

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