सुप्रीम कोर्ट ने NEET प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा पर स्वतंत्र जांच के संकेत दिए हैं। कोर्ट ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाई, जबकि आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों पर कार्रवाई जारी रखने को कहा।
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट NEET प्रदर्शन से जुड़े मामलों में अहम टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया है कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच आवश्यक है। शीर्ष अदालत ने कहा कि जांच केवल पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों पर हुए हमलों की भी निष्पक्ष जांच की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट ने साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि निर्दोष छात्रों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी, लेकिन जिन लोगों का आपराधिक रिकॉर्ड है या जो हिंसक गतिविधियों में शामिल पाए जाते हैं, उन्हें किसी प्रकार की राहत नहीं मिलेगी।
छात्रों को मिली बड़ी राहत
सुनवाई के दौरान अदालत ने अंतरिम राहत देते हुए कहा कि:
पुलिस दर्ज एफआईआर की जांच जारी रख सकती है।
प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ फिलहाल कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।
यह संरक्षण केवल शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के लिए होगा।
आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों पर कानून के अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी।
अदालत ने साफ किया कि जांच निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए ताकि निर्दोष छात्र किसी भी प्रकार की अनावश्यक कार्रवाई का शिकार न हों।
नाबालिग छात्रों को तत्काल रिहा करने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि:
18 वर्ष से कम आयु के जिन छात्रों या बच्चों को हिरासत में लिया गया है और जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उन्हें साधारण बॉन्ड पर तत्काल रिहा किया जाए।
संबंधित राज्य सरकारें इस आदेश का तत्काल पालन सुनिश्चित करें।
मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को निर्धारित की गई है।
हिंसा और पुलिस कार्रवाई दोनों की होगी जांच
मामले की सुनवाई प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बाग्ची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने की।
अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया लगाए गए आरोप इतने गंभीर हैं कि स्वतंत्र जांच आवश्यक प्रतीत होती है। जांच में निम्न बिंदुओं को शामिल किया जाएगा:
प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस बल प्रयोग।
पुलिसकर्मियों पर हुए हमलों की जांच।
हिंसा के दौरान हुई अन्य घटनाओं की निष्पक्ष पड़ताल।
हालांकि अंतिम आदेश देने से पहले केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार को हलफनामा एवं संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने का समय दिया गया है।
सुनवाई में क्या-क्या दलीलें दी गईं?
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया कि:
कई राज्यों में प्रदर्शन के दौरान जरूरत से अधिक बल प्रयोग किया गया।
लाठीचार्ज, पैलेट गन, रबर बुलेट और आंसू गैस का इस्तेमाल हुआ।
कई छात्र और एक मीडियाकर्मी भी घायल हुए।
वहीं केंद्र सरकार की ओर से पेश तुषार मेहता ने कहा कि:
प्रदर्शन के दौरान 280 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए।
हिंसा छात्रों ने नहीं बल्कि भीड़ में शामिल कुछ असामाजिक और आपराधिक तत्वों ने की।
पुलिस पर पत्थरबाजी और हमले भी हुए।
कई राज्यों को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने उन राज्यों के मुख्य सचिवों को नोटिस जारी किया है जहां विरोध प्रदर्शन हुए थे।
इन राज्यों में शामिल हैं:
महाराष्ट्र
बिहार
उत्तर प्रदेश
असम
मध्य प्रदेश
पश्चिम बंगाल
केरल
अदालत ने इन राज्यों के एडवोकेट जनरल और स्टैंडिंग काउंसिल को अगली सुनवाई में ऑनलाइन उपस्थित रहने का निर्देश दिया है।
सभी डिजिटल सबूत सुरक्षित रखने के आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने जांच को पारदर्शी बनाने के लिए महत्वपूर्ण निर्देश भी जारी किए।
अदालत ने कहा कि निम्न रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं:
सीसीटीवी फुटेज
ड्रोन फुटेज
बॉडी कैमरा रिकॉर्डिंग
वीडियोग्राफी
वायरलेस संचार रिकॉर्ड
पीसीआर लॉग और अन्य डिजिटल साक्ष्य
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि प्रदर्शनकारियों, विशेषकर छात्रों का व्यक्तिगत डेटा सुरक्षित रखा जाए और बिना आवश्यकता उसे सार्वजनिक न किया जाए।
मुख्य बातें
सुप्रीम कोर्ट ने NEET प्रदर्शन हिंसा की स्वतंत्र जांच के संकेत दिए।
प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ फिलहाल दंडात्मक कार्रवाई पर रोक।
आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों को राहत नहीं।
18 वर्ष से कम उम्र के निर्दोष छात्रों को तत्काल रिहा करने का आदेश।
पुलिस और प्रदर्शनकारियों दोनों से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी।
सीसीटीवी, ड्रोन फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का निर्देश।
कई राज्यों के मुख्य सचिवों को नोटिस जारी।
मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को होगी।

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