July 30, 2026

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छत्तीसगढ़ विधानसभा में दवाइयों पर घमासान! गुजरात में ब्लैकलिस्टेड कंपनी का मुद्दा उठा, स्वास्थ्य मंत्री ने दिया बड़ा जवाब

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा सदन में गूंजा। विपक्ष ने गुजरात में ब्लैकलिस्ट की गई दवा कंपनी और छत्तीसगढ़ में हुई दवाइयों की सप्लाई को लेकर सरकार से सवाल पूछे। कांग्रेस विधायक अटल श्रीवास्तव ने इस मामले में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल को घेरते हुए दवा खरीदी प्रक्रिया, गुणवत्ता जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई को लेकर जवाब मांगा।

वहीं, सरकार की ओर से स्वास्थ्य मंत्री ने पूरे मामले पर सफाई देते हुए कहा कि गुजरात में प्रतिबंधित की गई दवा और छत्तीसगढ़ में खरीदी गई दवा अलग-अलग हैं। उन्होंने बताया कि जनहित को ध्यान में रखते हुए सावधानी बरतते हुए संबंधित क्रय आदेश और दर अनुबंध को निरस्त कर दिया गया था।

विपक्ष ने उठाए ये सवाल

कांग्रेस विधायक अटल श्रीवास्तव ने सदन में पूछा कि क्या यह सही है कि दवा निर्माता कंपनी यूनिक्योर इंडिया लिमिटेड की एस्पिरिन टैबलेट गुणवत्ता मानकों पर विफल होने के कारण गुजरात में ब्लैकलिस्ट की गई थी।

उन्होंने सरकार से कई सवाल किए—

  • क्या गुजरात सरकार की ओर से ब्लैकलिस्ट की जानकारी छत्तीसगढ़ शासन या सीजीएमएससी को मिली थी?
  • क्या प्रतिबंधित कंपनी से दवा खरीदी गई?
  • दवा खरीद से पहले गुणवत्ता जांच क्यों नहीं कराई गई?
  • इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई की गई?

विपक्ष ने आरोप लगाया कि मरीजों को गुणवत्ताहीन दवाइयों की सप्लाई का खतरा पैदा हो सकता है और दवा खरीद प्रक्रिया की समीक्षा जरूरी है।

स्वास्थ्य मंत्री ने क्या दिया जवाब?

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने सदन में बताया कि गुजरात मेडिकल सर्विसेस कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा यूनिक्योर इंडिया लिमिटेड की कुछ दवाओं को गुणवत्ता मानकों पर विफल पाए जाने के कारण ब्लैकलिस्ट किया गया था।

मंत्री के अनुसार—

  • गुजरात में जिन दवाओं पर कार्रवाई हुई थी, वे एस्पिरिन गैस्ट्रो-रेजिस्टेंट टैबलेट्स आईपी 150 एमजी और 75 एमजी थीं।
  • इसकी जानकारी कंपनी की ओर से सीजीएमएससी को 25 मार्च 2026 को मिली थी।
  • छत्तीसगढ़ में जिस दवा के लिए क्रय आदेश जारी हुआ था, वह अलग श्रेणी की एस्पिरिन टैबलेट्स आईपी 75 एमजी (अनकोटेड टैबलेट) थी।

उन्होंने कहा कि दोनों दवाइयां तकनीकी रूप से अलग हैं और इन्हें एक समान नहीं माना जा सकता।

एहतियात के तौर पर लिया गया फैसला

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि जैसे ही कंपनी से संबंधित जानकारी मिली, जनहित और मरीजों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई की गई।

सरकार ने—

  • जारी किए गए क्रय आदेशों को निरस्त किया।
  • संबंधित दर अनुबंध को समाप्त किया।
  • आगे की प्रक्रिया में सावधानी बरती।

मंत्री ने कहा कि विभाग मरीजों को गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध कराने के लिए निर्धारित नियमों का पालन कर रहा है।

दवा जांच प्रक्रिया पर भी उठा सवाल

विधानसभा में विपक्ष ने दवाइयों की खरीद से पहले होने वाली जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। विधायक ने पूछा कि क्या दवाओं की सप्लाई से पहले बैच टेस्टिंग की जाती है।

इस पर मंत्री ने बताया कि सीजीएमएससी के नियमों के अनुसार दवा आने के बाद निर्धारित लैब में गुणवत्ता परीक्षण कराया जाता है। उन्होंने कहा कि खरीद प्रक्रिया तय नियमों के अनुसार संचालित होती है।

मामले के मुख्य बिंदु

  • गुजरात में यूनिक्योर इंडिया लिमिटेड की कुछ दवाओं पर कार्रवाई हुई थी।
  • छत्तीसगढ़ विधानसभा में विपक्ष ने मुद्दा उठाया।
  • स्वास्थ्य मंत्री ने दवाओं को अलग-अलग श्रेणी का बताया।
  • कंपनी से सूचना मिलने के बाद क्रय आदेश और अनुबंध निरस्त किए गए।
  • सरकार ने जनहित में एहतियाती कदम उठाने की बात कही।