July 30, 2026

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विधानसभा में भावुक हुए CM विष्णुदेव साय, तीजन बाई को श्रद्धांजलि देते हुए बोले- छत्तीसगढ़ ने अपना अनमोल रत्न खो दिया

तीजन बाई

छत्तीसगढ़ विधानसभा के पावस (मानसून) सत्र के पहले दिन का माहौल उस समय भावुक हो गया, जब मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विश्वविख्यात पंडवानी गायिका और पद्म विभूषण तीजन बाई को श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके निधन से केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश की लोककला और संस्कृति को अपूरणीय क्षति हुई है। उन्होंने तीजन बाई को छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान का सबसे चमकदार प्रतीक बताते हुए कहा कि उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेगा।

मुख्यमंत्री ने विधानसभा में शोक प्रस्ताव के दौरान कहा कि तीजन बाई ने अपनी असाधारण प्रतिभा, संघर्ष और समर्पण के दम पर पंडवानी गायन को विश्व स्तर पर नई पहचान दिलाई। उनकी कला ने छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया और पूरे देश को अपनी सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करने का अवसर दिया।

मुख्यमंत्री ने क्या कहा?

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने संबोधन में कहा कि तीजन बाई का निधन छत्तीसगढ़ के लिए एक ऐसी क्षति है जिसकी भरपाई संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि—

“छत्तीसगढ़ ने अपनी लोकसंस्कृति का एक अनमोल रत्न खो दिया है। उनकी कला और व्यक्तित्व आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा बने रहेंगे।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी प्रस्तुतियों में गायन, अभिनय, संवाद और अभिव्यक्ति का ऐसा अद्भुत संगम देखने को मिलता था, जो हर श्रोता को मंत्रमुग्ध कर देता था।

पंडवानी को दिलाई वैश्विक पहचान

मुख्यमंत्री ने बताया कि तीजन बाई ने पंडवानी गायन की कापालिक शैली को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उन्होंने महाभारत की कथाओं को अपनी विशिष्ट शैली में प्रस्तुत कर देश-विदेश के लाखों लोगों का दिल जीता।

उनकी कला के कारण छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को एशिया, यूरोप सहित दुनिया के अनेक देशों में नई पहचान मिली। वे केवल एक कलाकार नहीं थीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक दूत के रूप में पूरी दुनिया में जानी जाती थीं।

संघर्ष से सफलता तक का प्रेरक सफर

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस समय महिलाओं की पंडवानी गायन में भागीदारी बेहद सीमित थी, उस दौर में तीजन बाई ने सामाजिक रूढ़ियों को चुनौती दी और अपनी अलग पहचान बनाई।

उनका जीवन यह संदेश देता है कि प्रतिभा, मेहनत और आत्मविश्वास के बल पर हर चुनौती को पार किया जा सकता है। यही कारण है कि आज भी लाखों युवा कलाकार उन्हें अपना आदर्श मानते हैं।

मिले कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान

अपने लंबे कलात्मक जीवन में तीजन बाई को अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया गया। इनमें प्रमुख हैं—

  • पद्मश्री
  • पद्म भूषण
  • पद्म विभूषण (2019)
  • संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार
  • कई विश्वविद्यालयों से मानद डी.लिट. उपाधि

मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि पद्म विभूषण प्राप्त करने वाली वे छत्तीसगढ़ की पहली और एकमात्र विभूति थीं। यह पूरे प्रदेश के लिए गर्व की बात है।

राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने भी दी श्रद्धांजलि

मुख्यमंत्री ने अपने वक्तव्य में बताया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कई केंद्रीय मंत्रियों ने भी तीजन बाई के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।

उन्होंने यह भी याद किया कि राज्योत्सव के दौरान रायपुर प्रवास पर आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीजन बाई के परिजनों से दूरभाष पर बात कर उनका कुशलक्षेम जाना था। यह उनके प्रति राष्ट्रीय सम्मान और स्नेह का प्रतीक था।

विधानसभा ने दी सामूहिक श्रद्धांजलि

छत्तीसगढ़ विधानसभा में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सदन की ओर से दिवंगत तीजन बाई को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और शोकाकुल परिवार, प्रशंसकों तथा कला जगत को इस दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।

उन्होंने कहा कि तीजन बाई का योगदान केवल लोकसंगीत तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने छत्तीसगढ़ की संस्कृति, परंपरा और लोककला को नई पहचान दिलाई। उनकी कला, संघर्ष और समर्पण आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करने और उसे आगे बढ़ाने की प्रेरणा देता रहेगा।

तीजन बाई भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी आवाज, उनकी कला और उनकी विरासत सदियों तक छत्तीसगढ़ और भारतीय लोकसंस्कृति के इतिहास में अमर रहेगी।