July 30, 2026

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उफनती नदी पार कर बच्चों को पढ़ाने पहुंचा शिक्षक, कांकेर का Video बना समर्पण की मिसाल

उफनती कोटरी नदी पार कर स्कूल पहुंच रहे शिक्षक, शिक्षा के प्रति समर्पण की हो रही सराहना

छत्तीसगढ़ के उत्तर बस्तर कांकेर जिले के कोयलीबेड़ा विकासखंड से एक प्रेरणादायक लेकिन चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। यहां शिक्षक अपनी जान जोखिम में डालकर रोजाना उफनती कोटरी नदी पार कर स्कूल पहुंच रहे हैं, ताकि दूरस्थ गांवों के बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में शिक्षक नाव के सहारे तेज बहाव वाली नदी पार करते नजर आ रहे हैं, जिसके बाद लोग उनके समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा की जमकर सराहना कर रहे हैं।

हालांकि, यह घटना ग्रामीण इलाकों में शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं की चुनौतियों को भी उजागर करती है।

रोजाना जोखिम भरा सफर

बरसात के मौसम में कोटरी नदी का जलस्तर बढ़ जाता है, जिससे नदी पार करना बेहद मुश्किल हो जाता है। इसके बावजूद शिक्षक बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसलिए नाव के जरिए नदी पार कर स्कूल पहुंचते हैं।

नदी पार करने के बाद भी शिक्षकों का सफर खत्म नहीं होता। उन्हें स्कूल तक पहुंचने के लिए कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है।

नाव का इंतजार, फिर पैदल सफर

स्थानीय जानकारी के अनुसार शिक्षकों की दिनचर्या काफी कठिन है—

  • पहले नदी किनारे नाव का इंतजार करना पड़ता है।
  • तेज बहाव के बीच नाव से नदी पार करनी होती है।
  • इसके बाद कई किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल पहुंचना पड़ता है।
  • बरसात के दौरान यही स्थिति लगभग रोज बनी रहती है।

इस कारण स्कूल पहुंचने में समय भी अधिक लगता है और हर दिन जोखिम बना रहता है।

तेज बहाव के बीच बढ़ा खतरा

बरसात के कारण कोटरी नदी में पानी का बहाव काफी तेज हो जाता है। नदी में बड़े-बड़े पत्थर और तेज धारा नाव संचालन को और चुनौतीपूर्ण बना देते हैं।

वीडियो में शिक्षक भी स्वीकार करते हैं कि हर दिन डर के माहौल में यह यात्रा करनी पड़ती है और किसी भी समय दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।

इंटरनेट नेटवर्क की भी समस्या

क्षेत्र में केवल आवागमन ही चुनौती नहीं है, बल्कि संचार व्यवस्था भी प्रभावित रहती है।

स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार—

  • कई बार इंटरनेट नेटवर्क उपलब्ध नहीं होता।
  • ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने में परेशानी आती है।
  • विभागीय कार्य और डिजिटल रिपोर्टिंग भी प्रभावित होती है।
  • बारिश के मौसम में संपर्क व्यवस्था और अधिक कमजोर हो जाती है।

शिक्षा के प्रति समर्पण की मिसाल

इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद शिक्षक नियमित रूप से स्कूल पहुंचकर बच्चों की पढ़ाई जारी रख रहे हैं। स्थानीय लोग और सोशल मीडिया उपयोगकर्ता उनके समर्पण और जिम्मेदारी की सराहना कर रहे हैं।

यह घटना बताती है कि दूरदराज़ क्षेत्रों में कार्यरत कई शिक्षक सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद शिक्षा की अलख जगा रहे हैं।

मुख्य बातें

  • कांकेर जिले के कोयलीबेड़ा विकासखंड का मामला।
  • शिक्षक उफनती कोटरी नदी नाव से पार कर स्कूल पहुंच रहे हैं।
  • नदी पार करने के बाद कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है।
  • बरसात में तेज बहाव के कारण हर दिन दुर्घटना का खतरा बना रहता है।
  • इंटरनेट नेटवर्क की कमी से ऑनलाइन कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।
  • सोशल मीडिया पर शिक्षक के समर्पण की जमकर सराहना हो रही है।