रायपुर। जल संरक्षण से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने बड़ा अंतरिम आदेश जारी किया है। रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम समेत देश के छह प्रमुख क्रिकेट स्टेडियमों में अगली सुनवाई तक किसी भी खेल गतिविधि के आयोजन पर रोक लगा दी गई है। यह रोक तब तक प्रभावी रहेगी, जब तक संबंधित स्टेडियम एनजीटी की अनुमति प्राप्त नहीं कर लेते।
एनजीटी ने यह कार्रवाई इसलिए की क्योंकि संबंधित स्टेडियमों ने केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (CGWA) और एनजीटी द्वारा जारी कई नोटिसों के बावजूद निर्धारित समय में अपना जवाब दाखिल नहीं किया। मामला क्रिकेट मैदानों के रखरखाव में पानी के उपयोग और भूजल संरक्षण के नियमों के पालन से जुड़ा है।
क्यों लगाया गया प्रतिबंध?
एनजीटी के अनुसार, संबंधित स्टेडियमों से यह जानकारी मांगी गई थी कि मैदान और पिच के रखरखाव के लिए किस प्रकार के पानी का उपयोग किया जा रहा है।
मुख्य चिंता के विषय थे—
- क्या स्टेडियमों में भूजल या ताजे पानी का उपयोग किया जा रहा है?
- क्या सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) से शोधित पानी का उपयोग किया जा रहा है?
- क्या वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) की व्यवस्था मौजूद है?
- क्या जल संरक्षण संबंधी पर्यावरणीय मानकों का पालन किया जा रहा है?
इन सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर एनजीटी ने अंतरिम रोक लगाने का फैसला किया।
किन स्टेडियमों पर लगी रोक?
एनजीटी के आदेश से देश के छह प्रमुख क्रिकेट स्टेडियम प्रभावित हुए हैं—
- रायपुर का शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम
- नई दिल्ली का अरुण जेटली स्टेडियम
- जयपुर का सवाई मानसिंह स्टेडियम
- मुंबई का डॉ. डी.वाई. पाटिल स्टेडियम
- लखनऊ का भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी इकाना क्रिकेट स्टेडियम
- कटक का बाराबती स्टेडियम
इन सभी स्टेडियमों को पहले नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण देने का अवसर दिया गया था।
अप्रैल में जारी हुआ था नोटिस
इसी वर्ष अप्रैल में एनजीटी ने इन छह स्टेडियमों को नोटिस भेजा था। नोटिस में पूछा गया था कि यदि वे मैदान और पिच के रखरखाव में इस्तेमाल किए जाने वाले पानी के स्रोत की जानकारी उपलब्ध नहीं कराते हैं, तो उनकी खेल गतिविधियों पर रोक क्यों न लगाई जाए।
साथ ही यह भी स्पष्ट करने को कहा गया था कि—
- शोधित पानी का उपयोग क्यों नहीं किया जा रहा?
- भूजल संरक्षण के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?
- वर्षा जल संचयन प्रणाली स्थापित की गई है या नहीं?
पर्यावरण संरक्षण पर NGT की सख्ती
विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े खेल परिसरों में पानी की खपत काफी अधिक होती है। ऐसे में भूजल पर निर्भरता कम करने और उपचारित पानी के उपयोग को बढ़ावा देना पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से आवश्यक है।
एनजीटी लगातार यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहा है कि बड़े संस्थान—
- भूजल का अनावश्यक दोहन न करें।
- वर्षा जल संचयन को अनिवार्य रूप से अपनाएं।
- शोधित जल का अधिकतम उपयोग करें।
- पर्यावरणीय नियमों का पूरी तरह पालन करें।
आगे क्या होगा?
फिलहाल यह आदेश अंतरिम है। संबंधित स्टेडियमों को एनजीटी के समक्ष अपना पक्ष और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। अगली सुनवाई में न्यायाधिकरण यह तय करेगा कि प्रतिबंध जारी रहेगा या आवश्यक शर्तों के पालन के बाद खेल गतिविधियों को अनुमति दी जाएगी।
यह मामला केवल क्रिकेट स्टेडियमों तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर में जल संरक्षण, भूजल प्रबंधन और पर्यावरणीय नियमों के प्रभावी पालन के महत्व को भी रेखांकित करता है।

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