July 28, 2026

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76% दिव्यांगता भी नहीं रोक सकी हौसला! बैटरी ट्राइसाइकिल ने बदल दी नर्मेश की जिंदगी, बने आत्मनिर्भरता की मिसाल

बैटरी चालित ट्राइसाइकिल

छत्तीसगढ़ सरकार की दिव्यांगजन कल्याण योजनाएं जरूरतमंद लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। इसका प्रेरक उदाहरण मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के विकासखंड मोहला के ग्राम मंझियापुर निवासी श्री नर्मेश कुमार धावड़े हैं। 76 प्रतिशत दिव्यांगता के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और आज बैटरी चालित ट्राइसाइकिल की मदद से न केवल अपनी रोजमर्रा की जिंदगी को आसान बनाया है, बल्कि आत्मनिर्भर बनकर अन्य दिव्यांगजनों के लिए प्रेरणा भी बन गए हैं।

संघर्ष से सफलता तक का सफर

श्री नर्मेश कुमार धावड़े गांव में एक छोटी परचून दुकान चलाते हैं। यही उनके परिवार की आजीविका का मुख्य साधन है। लेकिन दिव्यांगता के कारण दुकान तक पहुंचना और दैनिक कार्य करना उनके लिए बेहद कठिन था। कई बार सामाजिक चुनौतियों और लोगों की नकारात्मक सोच का भी सामना करना पड़ा, फिर भी उन्होंने अपने हौसले को कमजोर नहीं होने दिया।

उन्होंने परिस्थितियों से समझौता करने के बजाय आगे बढ़ने का रास्ता चुना और आत्मविश्वास के साथ जीवन की चुनौतियों का सामना किया।

सरकारी योजना बनी नई उम्मीद

इसी दौरान श्री नर्मेश को समाज कल्याण विभाग की उस योजना की जानकारी मिली, जिसके तहत 70 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता वाले पात्र हितग्राहियों को बैटरी चालित ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराई जाती है।

उन्होंने आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन किया। जिला प्रशासन और समाज कल्याण विभाग ने त्वरित प्रक्रिया पूरी करते हुए उनका आवेदन स्वीकृत किया और उन्हें बैटरी चालित ट्राइसाइकिल प्रदान की।

यहीं से उनके जीवन में बदलाव की नई शुरुआत हुई।

ट्राइसाइकिल मिलने से बदल गई जिंदगी

बैटरी चालित ट्राइसाइकिल मिलने के बाद श्री नर्मेश के लिए आवागमन बेहद आसान हो गया। अब वे बिना किसी सहारे अपनी दुकान तक पहुंचते हैं और अपने सभी जरूरी काम स्वयं करते हैं।

इस सुविधा से उन्हें कई बड़े लाभ मिले—

  • दुकान तक नियमित रूप से पहुंचना आसान हुआ।
  • दूसरों पर निर्भरता लगभग समाप्त हो गई।
  • व्यापार को नियमित रूप से संचालित करने में सुविधा मिली।
  • परिवार की आय में वृद्धि हुई।
  • आत्मविश्वास और सामाजिक सम्मान दोनों बढ़े।

आत्मनिर्भर बनकर दे रहे नई प्रेरणा

श्री नर्मेश का कहना है कि पहले घर से बाहर निकलना भी बड़ी चुनौती था, लेकिन अब वे पूरी स्वतंत्रता के साथ अपना व्यवसाय चला रहे हैं।

उनका मानना है कि दिव्यांगता किसी व्यक्ति की कमजोरी नहीं होती। आत्मविश्वास, मेहनत और सही अवसर मिलने पर हर व्यक्ति अपने सपनों को पूरा कर सकता है।

आज वे अपने क्षेत्र के अन्य दिव्यांगजनों को भी शिक्षा, आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं।

शासन और प्रशासन के प्रति जताया आभार

श्री नर्मेश ने इस सकारात्मक बदलाव के लिए छत्तीसगढ़ शासन, जिला प्रशासन और समाज कल्याण विभाग का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं ने उनके जीवन को नई दिशा दी है और सम्मान के साथ जीने का अवसर प्रदान किया है।

उनके अनुसार, यदि सही समय पर यह सहायता नहीं मिलती तो आज भी उनका दैनिक जीवन कई कठिनाइयों से भरा होता।

सरकारी योजनाओं का दिख रहा सकारात्मक असर

राज्य सरकार की दिव्यांगजन हितैषी योजनाओं का उद्देश्य केवल सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि जरूरतमंद लोगों को आत्मनिर्भर बनाना है। बैटरी चालित ट्राइसाइकिल जैसी सुविधाएं दिव्यांगजनों को रोजगार, शिक्षा और सामाजिक जीवन से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

श्री नर्मेश की कहानी इस बात का प्रमाण है कि सरकारी योजनाओं का लाभ सही व्यक्ति तक पहुंचने पर उसका जीवन पूरी तरह बदल सकता है।

मुख्य बातें

  • मोहला के मंझियापुर निवासी श्री नर्मेश कुमार धावड़े 76% दिव्यांग हैं।
  • समाज कल्याण विभाग की योजना के तहत उन्हें बैटरी चालित ट्राइसाइकिल मिली।
  • अब वे अपनी परचून दुकान स्वयं संचालित कर रहे हैं।
  • ट्राइसाइकिल मिलने से आय और आत्मविश्वास दोनों में वृद्धि हुई।
  • वे अन्य दिव्यांगजनों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं।
  • शासन और जिला प्रशासन के प्रति उन्होंने आभार व्यक्त किया।

बैटरी चालित ट्राइसाइकिल ने श्री नर्मेश कुमार धावड़े के जीवन को नई दिशा दी है। उनकी कहानी बताती है कि मजबूत इच्छाशक्ति, आत्मविश्वास और सरकारी योजनाओं का सही लाभ मिल जाए तो कठिन से कठिन परिस्थितियों को भी अवसर में बदला जा सकता है। आज वे आत्मनिर्भरता, संघर्ष और सकारात्मक सोच की ऐसी मिसाल हैं, जो समाज के हर व्यक्ति को प्रेरित करती है।