मध्य प्रदेश के हजारों असिस्टेंट टीचरों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने लीव एनकैशमेंट से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार के पुराने आदेशों को निरस्त कर दिया है और अधिकारियों को पूरे मामले पर दोबारा विचार करने के निर्देश दिए हैं। इस फैसले से लंबे समय से अपने बकाया लीव एनकैशमेंट का इंतजार कर रहे शिक्षकों को नई उम्मीद मिली है।
दरअसल, कई असिस्टेंट टीचरों ने 240 दिनों के बजाय 300 दिनों तक की अर्जित छुट्टियों के नकदीकरण (लीव एनकैशमेंट) का लाभ देने की मांग की थी। लेकिन संबंधित विभागों ने उनके दावों को खारिज कर दिया था। इसके बाद प्रभावित शिक्षकों ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति दीपक खोत की एकलपीठ ने पाया कि विभागीय अधिकारियों ने फैसला लेते समय केवल वर्ष 1991 और 2008 के पुराने वित्त विभागीय मेमोरेंडम को आधार बनाया था। जबकि वर्ष 2018 में मध्य प्रदेश सिविल सर्विस (लीव) नियम, 1977 में संशोधन किया गया था और वर्ष 2019 में इस संबंध में एक नया सरकारी परिपत्र भी जारी हुआ था।
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ता अभिनव धनोदकर ने अदालत को बताया कि 28 जुलाई 2018 के संशोधित नियम और 8 मार्च 2019 के सरकारी सर्कुलर के अनुसार कर्मचारियों को बढ़ी हुई लीव एनकैशमेंट सुविधा का लाभ मिलना चाहिए। इसके बावजूद विभाग ने पुराने नियमों के आधार पर निर्णय लिया, जो नियमों की भावना के विपरीत है।
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि कर्मचारियों के अवकाश खाते का सही रखरखाव विभागाध्यक्ष की जिम्मेदारी होती है। ऐसे में अधिकारियों को यह बताना चाहिए था कि 50 दिनों की कटौती या सीमा किस आधार पर निर्धारित की गई। न्यायालय ने इस प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी को भी गंभीर माना।
हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे दो महीने के भीतर पूरे मामले की नए नियमों और सरकारी परिपत्रों के अनुरूप दोबारा समीक्षा करें और नया निर्णय लें। अदालत ने यह भी कहा कि समीक्षा करते समय सभी संबंधित नियमों और संशोधनों को ध्यान में रखा जाए।
फैसले की प्रमुख बातें
- हाई कोर्ट ने पुराने आदेशों को रद्द किया।
- 300 दिनों तक की लीव एनकैशमेंट के दावे पर दोबारा विचार होगा।
- 2018 के संशोधित नियम और 2019 के सरकारी सर्कुलर को आधार बनाया जाएगा।
- संबंधित विभागों को दो महीने के भीतर नया फैसला लेना होगा।
- असिस्टेंट टीचरों को लंबित मामलों में राहत मिलने की संभावना बढ़ी।
शिक्षकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
यह निर्णय केवल याचिकाकर्ताओं तक सीमित नहीं माना जा रहा है। यदि राज्य सरकार नए नियमों के अनुसार निर्णय लेती है, तो इसका लाभ प्रदेश के बड़ी संख्या में सेवानिवृत्त और कार्यरत शिक्षकों को मिल सकता है। इससे भविष्य में लीव एनकैशमेंट से जुड़े मामलों के निपटारे के लिए भी स्पष्ट दिशा-निर्देश तय होंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला सरकारी कर्मचारियों के सेवा अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। अब सभी की नजर राज्य सरकार की अगली कार्रवाई और समीक्षा प्रक्रिया के अंतिम फैसले पर टिकी हुई है।

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