जिंदा लौटा युवक
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से सामने आया एक मामला किसी फिल्म की कहानी से कम नहीं है। जिस व्यक्ति को परिवार मृत मान चुका था, जिसकी तस्वीर पर माला चढ़ चुकी थी, जिसकी तेरहवीं तक हो चुकी थी और जिसकी कथित हत्या के आरोप में मामला दर्ज हो गया था, वह अचानक एक दिन घर के दरवाजे पर जिंदा खड़ा मिल गया। इस घटना ने परिवार, पड़ोसियों और पुलिस सभी को हैरान कर दिया है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि लापता युवक जिंदा है, तो जिस शव का अंतिम संस्कार पूरे रीति-रिवाज के साथ किया गया था, वह आखिर किसका था?
कैसे शुरू हुई पूरी कहानी?
जानकारी के अनुसार, गाजियाबाद के वैशाली इलाके में रहने वाला एक व्यक्ति मई महीने में घर से लापता हो गया था। परिवार ने पहले रिश्तेदारों और परिचितों के यहां उसकी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।
समय बीतने के साथ परिवार की चिंता बढ़ती गई और पुलिस को भी मामले की जानकारी दी गई। इसी दौरान एक अन्य थाना क्षेत्र में एक अज्ञात शव मिलने की सूचना मिली।
परिवार ने शव को अपना बेटा समझ लिया
पुलिस ने पहचान के लिए परिवार को बुलाया। परिजनों ने शव को अपने लापता बेटे का मान लिया और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया के बाद शव उन्हें सौंप दिया गया।
इसके बाद परिवार ने:
अंतिम संस्कार किया।
शोकसभा आयोजित की।
धार्मिक परंपराओं के अनुसार तेरहवीं तक की रस्में पूरी कीं।
रिश्तेदारों और परिचितों ने भी शोक व्यक्त किया।
परिवार को पूरा विश्वास था कि उनका बेटा अब इस दुनिया में नहीं रहा।
हत्या का मामला भी दर्ज हुआ
परिजनों को युवक की मौत पर संदेह था। उन्होंने इसे सामान्य मौत नहीं बल्कि हत्या का मामला बताते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
इसके बाद:
कुछ लोगों के खिलाफ नामजद शिकायत दर्ज हुई।
पुलिस ने जांच शुरू की।
कई लोगों से पूछताछ की गई।
मामला लगातार गंभीर होता गया।
लेकिन कुछ ही दिनों बाद घटनाक्रम ने ऐसा मोड़ लिया जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी।
अचानक घर लौट आया ‘मृत’ युवक
करीब 39 दिन बाद युवक अचानक घर लौट आया। उसे सामने देखकर परिवार के लोग पहले तो विश्वास ही नहीं कर पाए।
घर में मौजूद लोगों की प्रतिक्रिया कुछ ऐसी थी:
किसी की आंखों में आंसू थे।
कुछ लोग हैरानी में पड़ गए।
पड़ोसी स्तब्ध रह गए।
पूरे इलाके में कुछ ही मिनटों में खबर फैल गई।
जिस व्यक्ति को सभी मृत मान चुके थे, वह अचानक उनके सामने जीवित खड़ा था।
अब सबसे बड़ा सवाल क्या है?
युवक के जिंदा लौट आने के बाद जांच एजेंसियों के सामने कई बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।
सबसे अहम सवाल:
जिस शव की पहचान की गई थी, वह किसका था?
पहचान की प्रक्रिया में गलती कैसे हुई?
क्या शव की पहचान केवल अनुमान के आधार पर की गई थी?
क्या डीएनए जांच की आवश्यकता है?
हत्या के मामले में दर्ज शिकायत का अब क्या होगा?
पुलिस के सामने नई चुनौती
अब पुलिस के लिए यह मामला पूरी तरह नए मोड़ पर पहुंच गया है। जांच एजेंसियों को अब उस अज्ञात शव की वास्तविक पहचान करनी होगी, जिसका अंतिम संस्कार हो चुका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में डीएनए जांच और वैज्ञानिक साक्ष्य बेहद महत्वपूर्ण होते हैं, ताकि भविष्य में पहचान संबंधी गलतियों से बचा जा सके।
चर्चा का विषय बना मामला
यह घटना पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है। लोग इसे किसी फिल्मी कहानी जैसा बता रहे हैं, लेकिन इससे यह भी साबित होता है कि किसी भी मामले में अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले वैज्ञानिक जांच और ठोस साक्ष्य कितने जरूरी होते हैं।
फिलहाल परिवार अपने बेटे के वापस लौटने की खुशी मना रहा है, जबकि पुलिस उस अनजान व्यक्ति की पहचान की गुत्थी सुलझाने में जुट गई है, जिसका अंतिम संस्कार किसी और के नाम पर कर दिया गया था।

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