June 21, 2026

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42°C की भीषण गर्मी में खुलेंगे स्कूल! पालकों का फूटा गुस्सा, बोले– बच्चे को कुछ हुआ तो जिम्मेदार कौन?

छत्तीसगढ़ में भीषण गर्मी और लू के बीच 16 जून से स्कूल खोलने के सरकारी फैसले को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। प्रदेश के कई जिलों में तापमान अभी भी 42 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है। ऐसे में अभिभावकों, शिक्षाविदों और स्कूल संगठनों ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है और सरकार से निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की है।

गर्मी के इस दौर में जहां स्वास्थ्य विभाग की एडवाइजरी छोटे बच्चों को दोपहर के समय घर से बाहर नहीं निकलने की सलाह देती है, वहीं स्कूलों के खुलने से हजारों बच्चों को रोजाना तेज धूप और गर्म हवाओं का सामना करना पड़ेगा। इस स्थिति ने पालकों की चिंता और बढ़ा दी है।

पालकों ने उठाए सुरक्षा पर सवाल

स्कूल खुलने की खबर के बाद कई अभिभावकों ने सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर अपनी नाराजगी जाहिर की है। उनका कहना है कि जब मौसम विभाग लगातार गर्मी और लू की चेतावनी जारी कर रहा है, तब छोटे बच्चों को स्कूल भेजना जोखिम भरा हो सकता है।

अभिभावकों के प्रमुख सवाल:

क्या सभी स्कूलों में पर्याप्त पंखों की व्यवस्था है?
क्या हर स्कूल में बिजली की नियमित आपूर्ति उपलब्ध है?
क्या बच्चों के लिए स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है?
अगर किसी बच्चे की तबीयत बिगड़ती है तो जिम्मेदारी किसकी होगी?

कई पालकों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा किसी भी शैक्षणिक गतिविधि से अधिक महत्वपूर्ण है।

सरकारी स्कूलों की स्थिति बनी चिंता का विषय

ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के अनेक सरकारी स्कूलों में अभी भी बुनियादी सुविधाओं की कमी बताई जा रही है। कई स्कूलों में बिजली कनेक्शन नहीं है, जबकि कुछ जगहों पर लंबे समय तक बिजली कटौती की समस्या बनी रहती है।

इन समस्याओं में शामिल हैं:

बिजली की अनियमित उपलब्धता
पंखों की कमी
गर्म कक्षाएं
पर्याप्त पेयजल व्यवस्था का अभाव
गर्मी से बचाव के संसाधनों की कमी

ऐसे में बच्चों के लिए स्कूल में पूरे समय बैठना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

शिक्षाविदों ने भी जताई चिंता

शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूल खोलने से पहले बुनियादी व्यवस्थाओं की समीक्षा आवश्यक है। उनका कहना है कि यदि स्कूलों में पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं तो बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार:

पहले सभी स्कूलों में बिजली और पंखों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
पेयजल और प्राथमिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हों।
मौसम की स्थिति सामान्य होने तक वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार किया जाए।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी

डॉक्टरों का कहना है कि छोटे बच्चे लू और डिहाइड्रेशन के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। वर्तमान मौसम में अस्पतालों में अभी भी गर्मी से प्रभावित मरीज पहुंच रहे हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार:

तेज धूप में यात्रा करने से बच्चों को परेशानी हो सकती है।
डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है।
पर्याप्त जल सेवन और ठंडे वातावरण की आवश्यकता होती है।

यही कारण है कि कई विशेषज्ञ वर्तमान मौसम को स्कूल संचालन के लिए चुनौतीपूर्ण मान रहे हैं।

सरकार से पुनर्विचार की मांग

पैरेंट्स एसोसिएशन और विभिन्न शिक्षा संगठनों ने सरकार से स्कूल खोलने की तारीख पर पुनर्विचार करने की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक मौसम में राहत नहीं मिलती और सभी स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित नहीं हो जातीं, तब तक बच्चों को जोखिम में नहीं डाला जाना चाहिए।

हालांकि निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 16 जून से स्कूल खुलने जा रहे हैं, लेकिन इस फैसले को लेकर अभिभावकों के बीच चिंता और असमंजस का माहौल बना हुआ है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार बच्चों की सुरक्षा को लेकर आगे क्या कदम उठाती है।