June 20, 2026

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राम मंदिर चढ़ावा विवाद में नया बवाल! ट्रस्टी पर 40% कमीशन लेने का आरोप, पूर्व इंजीनियर के खुलासे से मचा हड़कंप

अयोध्या के राम मंदिर से जुड़े चढ़ावा प्रबंधन को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। मंदिर में आने वाले दान और चढ़ावे की व्यवस्था पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं, लेकिन अब ट्रस्ट से जुड़े एक पूर्व इंजीनियर ने ऐसा दावा किया है जिसने पूरे मामले को नई दिशा दे दी है। उनके आरोपों के बाद मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली, नकदी गणना और पारदर्शिता को लेकर बहस तेज हो गई है।

प्रयागराज के इंजीनियर दीनानाथ वर्मा ने आरोप लगाया है कि राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्र चढ़ावे से जुड़े कार्यों में 40 प्रतिशत तक कमीशन लेते थे। उनका कहना है कि जब उन्होंने इस व्यवस्था का विरोध किया तो उन्हें धमकियां दी गईं और बाद में चढ़ावे की नकदी गिनने की प्रक्रिया से दूर कर दिया गया।

क्या हैं मुख्य आरोप?

दीनानाथ वर्मा के अनुसार—

  • चढ़ावे से जुड़ी व्यवस्थाओं में अनियमितताएं थीं।
  • कुछ कार्यों में कथित रूप से कमीशन की मांग की जाती थी।
  • विरोध करने वाले लोगों को जिम्मेदारियों से हटाया जाता था।
  • नकदी गणना की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी थी।
  • सवाल उठाने पर दबाव और धमकी का सामना करना पड़ा।

हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और फिलहाल यह केवल आरोपों के रूप में सामने आए हैं।

ट्रस्ट की व्यवस्था पर उठे सवाल

राम मंदिर देश की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। हर दिन हजारों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं और बड़ी मात्रा में दान व चढ़ावा अर्पित करते हैं। ऐसे में चढ़ावे की गणना, रिकॉर्ड और उपयोग को लेकर पारदर्शिता बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक संस्थानों में आर्थिक लेन-देन की प्रक्रिया जितनी अधिक पारदर्शी होगी, उतना ही श्रद्धालुओं का भरोसा मजबूत होगा। इसी कारण इस तरह के आरोप सामने आने पर लोगों की नजरें ट्रस्ट की प्रतिक्रिया पर टिक गई हैं।

आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार

अब तक डॉ. अनिल मिश्र या श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से इन आरोपों पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में आरोपों की सत्यता को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।

कानूनी जानकारों का कहना है कि यदि आरोप गंभीर हैं तो संबंधित पक्षों को तथ्यों और दस्तावेजों के साथ अपनी बात सार्वजनिक करनी चाहिए, ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके।

आगे क्या हो सकता है?

  • मामले की जांच की मांग उठ सकती है।
  • ट्रस्ट की वित्तीय व्यवस्था पर सवालों की समीक्षा हो सकती है।
  • चढ़ावे की गणना और प्रबंधन प्रक्रिया को लेकर नए नियम लागू किए जा सकते हैं।
  • संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया आने के बाद तस्वीर और साफ हो सकती है।