July 31, 2026

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सामाजिक बहिष्कार और जातिगत भेदभाव का आरोप, कोटवार ने मुख्यमंत्री निवास के सामने आत्मदाह की चेतावनी दी

पिथौरा। महासमुंद जिले के पिथौरा विकासखंड के ग्राम पाटनदादर से सामाजिक बहिष्कार और कथित जातिगत भेदभाव का गंभीर मामला सामने आया है। गांव के कोटवार भागीरथी चौहान ने कुछ ग्रामीणों पर जातिसूचक टिप्पणियां करने, सामाजिक रूप से अलग-थलग करने और लगातार प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। उन्होंने प्रशासन से न्याय की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो वे परिवार सहित मुख्यमंत्री निवास के सामने आत्मदाह करने को मजबूर होंगे।

धार्मिक आयोजन में सहयोग देने पर विवाद

भागीरथी चौहान के अनुसार जुलाई 2024 में गांव में आयोजित हरी नाम कीर्तन यज्ञ के दौरान वे भी अन्य ग्रामीणों की तरह आर्थिक सहयोग करना चाहते थे। उन्होंने आयोजन के लिए 1000 रुपये नकद और पांच किलो चावल देने की इच्छा जताई थी।

उनका आरोप है कि कुछ ग्रामीणों ने उनका सहयोग स्वीकार करने से इनकार कर दिया और कथित रूप से उनकी जाति को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं। पीड़ित का कहना है कि उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया और धार्मिक आयोजन में भागीदारी से भी हतोत्साहित किया गया।

सामाजिक बहिष्कार का आरोप

भागीरथी चौहान ने शिकायत में दावा किया है कि घटना के बाद उनके परिवार का सामाजिक बहिष्कार किया गया। उनके अनुसार:

  • गांव के लोगों को उनके घर आने-जाने से रोका गया।
  • बातचीत और सामाजिक संबंधों पर दबाव बनाया गया।
  • मजदूरी या अन्य कार्य देने वालों को भी प्रभावित करने की कोशिश की गई।
  • परिवार को सामाजिक रूप से अलग-थलग करने का प्रयास किया गया।

पीड़ित का आरोप है कि इससे उनके परिवार को मानसिक और सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

कई स्तरों पर की शिकायत

भागीरथी चौहान ने मामले की शिकायत विभिन्न प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों से की है। उन्होंने:

  • पुलिस महानिरीक्षक को आवेदन दिया।
  • पुलिस अधीक्षक महासमुंद से शिकायत की।
  • राज्य अनुसूचित जाति आयोग से हस्तक्षेप की मांग की।
  • स्थानीय थाना सांकरा में भी आवेदन प्रस्तुत किया।

उनका कहना है कि कई महीनों से शिकायतें देने के बावजूद उन्हें अपेक्षित न्याय नहीं मिला है।

आत्मदाह की चेतावनी

पीड़ित ने प्रशासन को दिए गए आवेदन में चेतावनी दी है कि यदि दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई नहीं हुई और उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे अपनी पत्नी और बच्चों सहित मुख्यमंत्री निवास, रायपुर के सामने आत्मदाह करेंगे।

हालांकि किसी भी परिस्थिति में आत्मदाह या स्वयं को नुकसान पहुंचाना समाधान नहीं माना जाता। ऐसे मामलों में प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से न्याय प्राप्त करना ही उचित रास्ता है।

प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार

फिलहाल मामले को लेकर संबंधित प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला सामाजिक समानता, संवैधानिक अधिकारों और जातिगत भेदभाव जैसे गंभीर मुद्दों से जुड़ा माना जाएगा। वहीं दूसरी ओर प्रशासन के सामने यह चुनौती भी होगी कि पीड़ित परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए मामले का निष्पक्ष समाधान किया जाए।

गांव स्तर पर सामाजिक सौहार्द बनाए रखना और किसी भी प्रकार के भेदभाव को रोकना समाज तथा प्रशासन दोनों की साझा जिम्मेदारी है। ऐसे मामलों में समय पर हस्तक्षेप और निष्पक्ष जांच ही स्थायी समाधान का आधार बन सकती है।