May 31, 2026

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6 घंटे से कम या 8 घंटे से ज्यादा नींद? आयुर्वेद में बताया गया सही स्लीप टाइम, जानिए क्या कहते हैं आचार्य बालकृष्ण

सही नींद


आयुर्वेद के अनुसार कितने घंटे की नींद लेनी चाहिए? जानिए क्या है सही नियम

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में नींद सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाली चीजों में से एक है। देर रात तक मोबाइल चलाना, काम का दबाव और अनियमित दिनचर्या लोगों की स्लीप साइकिल को बिगाड़ रही है। ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल उठता है कि आखिर शरीर को स्वस्थ रखने के लिए कितने घंटे की नींद जरूरी है?

इस विषय पर योग और आयुर्वेद विशेषज्ञ आचार्य बालकृष्ण ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। उनके अनुसार केवल नींद के घंटे ही नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।

आयुर्वेद के अनुसार कितनी नींद है पर्याप्त?

आचार्य बालकृष्ण के मुताबिक:

  • 6 घंटे से कम नींद लेना स्वास्थ्य के लिए अच्छा संकेत नहीं माना जाता।
  • 8 घंटे से अधिक नींद आना भी शरीर में किसी समस्या की ओर इशारा कर सकता है।
  • सामान्य रूप से 6 से 8 घंटे की नींद स्वस्थ व्यक्ति के लिए पर्याप्त मानी जाती है।
  • व्यक्ति अपनी उम्र, दिनचर्या और शारीरिक जरूरत के अनुसार इस अवधि में थोड़ा बदलाव कर सकता है।

आयुर्वेद का मानना है कि संतुलित और नियमित नींद शरीर को ऊर्जा देने के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाती है।

सिर्फ घंटों पर नहीं, नींद की गुणवत्ता पर दें ध्यान

कई लोग 8 घंटे बिस्तर पर बिताते हैं, लेकिन फिर भी थकान महसूस करते हैं। इसका कारण नींद की खराब गुणवत्ता हो सकती है।

आचार्य बालकृष्ण के अनुसार अच्छी और गहरी नींद से:

  • शरीर को पर्याप्त आराम मिलता है।
  • मानसिक तनाव कम होता है।
  • ऊर्जा और कार्यक्षमता बढ़ती है।
  • स्मरण शक्ति बेहतर होती है।
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है।

आयुर्वेद में कहा गया है कि उचित समय पर गहरी नींद लेने वाले व्यक्ति में प्रसन्नता, बल, तेज, ओज और आयु की वृद्धि होती है।

रात में सोने का सबसे सही समय क्या है?

आचार्य बालकृष्ण के अनुसार:

  • रात 10 बजे तक सो जाना सबसे बेहतर माना जाता है।
  • रात 10 बजे से सुबह 4 बजे तक की नींद शरीर के लिए सबसे लाभकारी होती है।
  • सुबह ब्रह्म मुहूर्त यानी लगभग 4 बजे उठना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माना गया है।
  • यदि आप 11 बजे सोते हैं तो सुबह 5 बजे तक उठने की कोशिश करें।

विशेषज्ञों का मानना है कि जल्दी सोने और जल्दी उठने की आदत शरीर की प्राकृतिक जैविक घड़ी को संतुलित रखती है।

आयुर्वेद के अनुसार सोने का सही तरीका

बेहतर और गहरी नींद के लिए आयुर्वेद कुछ विशेष सुझाव देता है:

  • सोते समय शरीर को आरामदायक स्थिति में रखें।
  • करवट लेकर सो सकते हैं।
  • हाथ और पैरों को अनावश्यक रूप से मोड़कर न रखें।
  • बहुत ऊंचे या मोटे तकिए का इस्तेमाल न करें।
  • सोने से पहले मोबाइल और स्क्रीन का उपयोग कम करें।
  • शांत और स्वच्छ वातावरण में सोने की कोशिश करें।

क्यों जरूरी है पर्याप्त नींद?

पर्याप्त नींद न मिलने पर कई समस्याएं पैदा हो सकती हैं:

  • थकान और कमजोरी
  • चिड़चिड़ापन
  • ध्यान केंद्रित करने में परेशानी
  • कमजोर इम्यूनिटी
  • तनाव और चिंता में वृद्धि

वहीं संतुलित नींद शरीर और दिमाग दोनों को स्वस्थ रखने में मदद करती है।