रायपुर। ग्रामीण क्षेत्रों में जल जीवन मिशन के तहत लगाए गए नलों और पाइपलाइन व्यवस्था के रखरखाव को लेकर अब राज्य सरकार नई पहल कर रही है। मिशन की सफलता को लंबे समय तक बनाए रखने और तकनीकी समस्याओं का गांव स्तर पर त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के लिए ‘जल मित्र’ योजना पर तेजी से काम शुरू किया गया है। इसके तहत प्रदेश में 20 हजार जल मित्र तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। इनमें से दो हजार युवाओं को प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है।
राज्य के 49.95 लाख ग्रामीण परिवारों में से अब तक 83.30 प्रतिशत घरों को नल कनेक्शन से जोड़ा जा चुका है। वहीं पांच हजार से अधिक गांवों में शत-प्रतिशत पेयजल आपूर्ति शुरू हो गई है। सरकार का लक्ष्य प्रदेश के 20 हजार गांवों में प्रत्येक गांव में एक जल मित्र नियुक्त करना है।
पंचायतों के अधीन करेंगे काम
प्रदेश के करीब आठ हजार गांवों में पानी की टंकियां और पेयजल आपूर्ति व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित हो रही है। इन गांवों में बिछाई गई पाइपलाइन, जल टंकियों के रखरखाव और घरों तक पहुंचे नल कनेक्शनों की निगरानी का जिम्मा प्रशिक्षित जल मित्रों को दिया जाएगा।
इन जल मित्रों को पंचायत विभाग के अधीन कार्य करना होगा और उनके मानदेय का भुगतान स्थानीय सरपंच के माध्यम से किया जाएगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था बेहतर होगी और स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे।
माओवादी प्रभावित क्षेत्रों के लिए विशेष योजना
राज्य सरकार ने बस्तर और अन्य माओवादी हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल सुविधा को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार से 1,300 करोड़ रुपये की विशेष वित्तीय सहायता की मांग की है। इस राशि से 70 बड़ी समूह जल प्रदाय योजनाएं शुरू करने की योजना बनाई गई है। इससे तीन हजार से अधिक सुदूर और संवेदनशील गांवों तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाया जा सकेगा।
गांवों में बदल रही तस्वीर
घीकुड़िया गांव में सोलर आधारित जलापूर्ति
राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ विकासखंड स्थित वनांचल गांव घीकुड़िया में पहले पानी की भारी समस्या थी। जल जीवन मिशन के तहत यहां अब सोलर आधारित जल आपूर्ति व्यवस्था लागू की गई है, जिससे ग्रामीणों को नियमित पेयजल मिलने लगा है।
धनौली में खत्म हुई पानी की परेशानी
मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के ग्राम पंचायत बरौता के ग्राम धनौली में भी मिशन के बाद हालात बदल गए हैं। पहले महिलाओं और बच्चों को कुओं, तालाबों और हैंडपंपों से पानी लाने में घंटों मेहनत करनी पड़ती थी, लेकिन अब घरों तक नल से पानी पहुंचने लगा है।

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