कांकेर। जिले के भानुप्रतापपुर से स्वास्थ्य व्यवस्था को शर्मसार कर देने वाली बड़ी खबर सामने आई है, जहां प्रसव पीड़ा से दो दिनों तक तड़पती रही आदिवासी महिला और उसके नवजात बच्चे की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों की लापरवाही और संवेदनहीनता के कारण मां और बच्चे दोनों की जान चली गई। उन्होंने जिम्मेदार डॉक्टरों पर कार्रवाई की मांग की है।
जानकारी के मुताबिक, ग्राम चाहचाड निवासी कमलेश कोमरा अपनी गर्भवती पत्नी द्रोपदी कोमरा को 15 मई को प्रसव पीड़ा होने पर भानुप्रतापपुर अस्पताल लेकर पहुंचे थे। परिजनों की माने तो अस्पताल में भर्ती करने के बाद डॉक्टर गायब हो गए और प्रसूता दो दिनों तक दर्द से तड़पती रही। 17 मई को अस्पताल स्टाफ ने सोनोग्राफी कराने की सलाह दी, लेकिन सरकारी अस्पताल की सोनोग्राफी मशीन पिछले एक साल से खराब पड़ी थी।
एम्बुलेंस नहीं मिलने पर मजबूर पति अपनी गर्भवती पत्नी को बाइक पर बैठाकर निजी अस्पताल सोनोग्राफी कराने ले गया। रिपोर्ट लेकर वापस लौटने के बाद भी अस्पताल में कोई डॉक्टर नहीं पहुंचा। परिजनों का आरोप है कि ऑन-कॉल डॉक्टर को कई बार फोन किया गया, लेकिन डॉक्टर ने आने से मना कर दिया। महिला की हालत बिगड़ने पर परिजन उसे निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां देर रात प्रसव हुआ, लेकिन गर्भ में संक्रमण फैल जाने के कारण नवजात ने जन्म के एक घंटे बाद दम तोड़ दिया और कुछ घंटों बाद प्रसूता द्रोपदी की भी मौत हो गई।

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