April 25, 2026

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारतीय शेयर बाजार की उपलब्धियों को सराहा, सेबी को सख्त कदाचार नियंत्रण की दी चेतावनी

मुंबई: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारतीय शेयर बाजार की शानदार यात्रा और विश्वस्तरीय उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए कहा कि यह बाजार आज मज़बूत, प्रौद्योगिकी-आधारित और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन चुका है। उन्होंने भारतीय बाजार के विकास को एक उल्लेखनीय यात्रा बताया और कहा कि यह अब दुनिया के सबसे अच्छे और उन्नत बाजारों में से एक है।

भारतीय बाजार का परिवर्तनशील सफर

वित्त मंत्री ने भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के 38वें स्थापना दिवस पर कहा कि भारतीय बाजारों ने समय के साथ कई बदलाव देखे हैं। पारंपरिक ट्रेडिंग रिंग से लेकर आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक ऑर्डर बुक, भौतिक शेयर प्रमाणपत्रों से डीमैटेरियलाइजेशन तक, और बिखरी हुई निगरानी से रीयल-टाइम नियामकीय पर्यवेक्षण तक का सफर तय किया है। इस परिवर्तन ने भारतीय बाजार को बहुत मजबूत और सुरक्षित बना दिया है।

वित्त मंत्री ने कहा, “भारत के बाजारों का इतिहास हमें सिखाता है कि पहले के तनावपूर्ण दौर ने बेहतर नियमन और संस्थागत ताकत को जन्म दिया है, जिससे आज का भारतीय बाजार मज़बूत और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार है।”

सेबी की भूमिका और विश्वस्तरीय पहलें

सीतारमण ने सेबी की भूमिका को भी रेखांकित किया और उसकी प्रभावशीलता को उसके अधिकारों के सही और अनुशासित तरीके से लागू करने में बताया। उन्होंने टी 1 (ट्रेड प्लस वन) सेटलमेंट चक्र को लागू करने में भारत के नेतृत्व की सराहना की, जो जनवरी 2023 में पूरा हुआ। इस प्रणाली से ट्रेड और सेटलमेंट एक ही कार्यदिवस में निपटाए जाते हैं, जिससे दुनिया के बड़े बाजारों से पहले भारत ने यह कदम उठाया। अमेरिका, जो मई 2024 में इसे लागू करेगा, भारत से पीछे है।

वित्त मंत्री ने सेबी द्वारा एएसबीए (एप्लिकेशन सपोर्टेड बाय ब्लॉक्ड अमाउंट) प्रणाली की शुरुआत की भी सराहना की, जो आईपीओ (प्राथमिक शेयर निर्गम) प्रक्रिया में वैश्विक नवाचार साबित हुई है। इससे रिफंड चक्र खत्म हो गया और निवेशक के बैंक खाते में केवल आवंटित राशि ही ब्लॉक होती है, जिससे प्रक्रिया तेज और पारदर्शी बनती है।

भारत में डिजिटल भुगतान और यूपीआई की क्रांति

सीतारमण ने कहा कि भारत आज दुनिया का पहला बाजार है जहां यूपीआई के माध्यम से आईपीओ आवेदन संभव हुए हैं। यह कदम रिटेल निवेशकों के लिए रीयल-टाइम भागीदारी सुनिश्चित करता है, और इसने प्राथमिक बाजारों में बड़ी क्रांति लाई है। भारत के डिजिटल भुगतान ढांचे की यह उपलब्धि एक महत्वपूर्ण कदम है, जो भारतीय बाजारों को और अधिक सुलभ और डेमोक्रेटिक बनाती है।

भारत का मजबूत डिपॉजिटरी ढांचा

वित्त मंत्री ने बताया कि भारत में नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) और सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज लिमिटेड (CDSL) जैसी डिपॉजिटरी संस्थाओं के पास 5 लाख करोड़ डॉलर से अधिक मूल्य की डीमैट प्रतिभूतियाँ हैं, जो भारत को विश्व की सबसे उन्नत डिपॉजिटरी अवसंरचनाओं में से एक बनाती हैं।

निवेशक संरक्षण पर जोर

सीतारमण ने बढ़ती खुदरा भागीदारी को भारत के वित्तीय इतिहास का सबसे लोकतांत्रिक विकास बताया, लेकिन साथ ही जागरूकता और निवेशक सुरक्षा पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि निवेशक समझ के बिना भागीदारी जोखिम पैदा कर सकती है और सुरक्षा उपायों के बिना पहुंच खतरों को उत्पन्न कर सकती है। उन्होंने कहा, “निवेशक संरक्षण को रक्षात्मक से विकासात्मक कार्य में बदलना चाहिए।”

नियामक प्रणालियाँ और प्रवर्तन

वित्त मंत्री ने सेबी से कड़े प्रवर्तन की मांग करते हुए कहा कि उसे कदाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा, “बाज़ारों में विश्वास, पारदर्शिता, और निष्पक्षता से ही चलते हैं, और इसे बनाए रखने के लिए निगरानी प्रणालियों को समयबद्ध और सुलभ बनाना जरूरी है।”

उन्होंने अपंजीकृत वित्तीय इन्फ्लुएंसर्स के खिलाफ सेबी की कार्रवाई का समर्थन करते हुए चेतावनी दी कि बिना जानकारी वाले खुदरा निवेशकों के विश्वास का व्यावसायीकरण खतरनाक हो सकता है।