April 23, 2026

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1 अप्रैल से शुरू होगी 16वीं राष्ट्रीय जनगणना, डिजिटल कुंडली भी तैयार करेगी सरकार का सर्वे

नई दिल्ली: भारत में 16वीं राष्ट्रीय जनगणना की प्रक्रिया 1 अप्रैल 2026 से शुरू हो रही है। इस बार जनगणना पहले से कहीं अधिक विस्तृत और डिजिटल होगी। अब यह केवल जनसंख्या गिनने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह देशभर में नागरिकों के जीवनस्तर, सुविधाओं, और सामाजिक ढांचे की भी गहरी तस्वीर पेश करेगी।

दो चरणों में होगी पूरी जनगणना प्रक्रिया
पहला चरण (हाउस लिस्टिंग):
1 अप्रैल से 30 सितंबर 2026 तक यह प्रक्रिया चलेगी, जिसमें घरों और परिसंपत्तियों का विवरण एकत्रित किया जाएगा। इस दौरान नागरिकों से 33-34 सवाल पूछे जाएंगे, जिनमें:
मकान की स्थिति
निर्माण सामग्री
पानी-बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं
परिवार के सदस्यों की संख्या
इंटरनेट और वाहन जैसी जानकारी शामिल होगी।
दूसरा चरण:
फरवरी 2027 में जनसंख्या की वास्तविक गणना की जाएगी, जो देश की जनसंख्या को सटीक रूप से दर्शाएगी।
सेल्फ-एन्युमरेशन का नया विकल्प
स्व-गणना सुविधा:
इस बार सरकार ने नागरिकों के लिए ऑनलाइन सेल्फ-एन्युमरेशन (स्व-गणना) की सुविधा दी है। इसका मतलब है कि लोग अब पोर्टल पर जाकर अपनी जानकारी खुद भर सकते हैं। इससे प्रक्रिया और भी तेज़, पारदर्शी, और किफायती बन जाएगी।
लिव-इन रिलेशनशिप पर नया बदलाव
लिव-इन रिलेशनशिप:
इस जनगणना की सबसे बड़ी चर्चा यह है कि सरकार ने लिव-इन रिलेशनशिप (साथ रह रहे जोड़े) को लेकर एक नया बदलाव किया है। अगर कोई जोड़ा लंबे समय से साथ रह रहा है और अपने रिश्ते को स्थिर मानता है, तो उसे जनगणना में विवाहित जोड़े के रूप में दर्ज किया जाएगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि असामान्य रिश्तों का भी सही तरीके से दस्तावेजीकरण हो।
नीति निर्माण का आधार

विशेषज्ञों के अनुसार, यह जनगणना सिर्फ आंकड़े नहीं जुटाएगी, बल्कि नीति निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। सरकार को इससे योजनाओं के निर्माण, संसाधनों के बेहतर वितरण, और नीतिगत फैसलों में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी।

डिजिटल प्रोफाइलिंग और भविष्य की दिशा

2026 की जनगणना एक डिजिटल प्रोफाइलिंग के रूप में सामने आ रही है। इसके माध्यम से भारत सरकार देशभर के नागरिकों के जीवन के हर पहलू को आंकड़ेबद्ध करेगी, जो आने वाले वर्षों में देश की विकास दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।