April 20, 2026

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ईरान युद्ध के चलते इंटरनेट संकट का खतरा: तेल ही नहीं, डेटा का भी संकट!

पश्चिम एशिया में जारी संकट ने पूरी दुनिया के सामने ऊर्जा संकट खड़ा कर दिया है। लेकिन अब यह संकट केवल ऊर्जा तक सीमित न होकर इंटरनेट कनेक्टिविटी तक पहुंच गया है। आशंका जताई जा रही है कि अगर यह युद्ध ऐसे ही बढ़ता रहा, तो लाल सागर में मौजूद इंटरनेट फाइबर केबल्स को नुकसान पहुंचाया जा सकता है। ईरान ने भले ही अभी तक ऐसी धमकी न दी हो, लेकिन उसका प्रॉक्सी संगठन हूती कई बार ऐसी बातें कर चुका है।

बढ़ते युद्ध के बीच कई विशेषज्ञ भी केबल्स की सुरक्षा को लेकर अपनी चिंता जता चुके हैं। इंटरनेट केबल्स के क्षतिग्रस्त होने का एक मामला पिछले साल सितंबर में सामने आया था। एक व्यापारिक जहाज के एंकर की वजह से समुद्र में बिछी केबल क्षतिग्रस्त हो गई थी। इसकी वजह से पश्चिम और दक्षिण एशिया के कई देशों में इंटरनेट सेवाएं प्रभावित हुई थी। भारत में भी इसका प्रभाव देखने को मिला था। चूंकि यह केबल ज्यादा क्षतिग्रस्त नहीं हुई थी इसलिए इंटरनेट पूरी तरह से बंद नहीं हुआ था, लेकिन कई नेटवर्क बहुत धीमे हो गए थे।

इंटरनेट केबल प्रोटेक्शन कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक उस घटना में चार केबल्स मुख्य रूप से प्रभावित हुई थीं। इनमें पहली साउथ ईस्ट-मिडिल-ईस्ट-वेस्टर्न यूरोप, दूसरी भारत-मिडिल ईस्ट-वेस्टर्न यूरोप, तीसरी फॉल्कन और चौथी यूरोप इंडिया गेटवे शामिल थी।

आमतौर पर इन केबल्स को विशालकाय मछलियों द्वारा थोड़ी बहुत हानि पहुंचाई जाती रहती है। इसके अलावा लंगर की वजह से भी नुकसान होता है। लेकिन युद्ध जैसी स्थिति में जहां पर जानबूझकर केबल्स काटे जाने का खतरा हो, वहां पर संकट बढ़ जाता है। इन इंटरनेट केवल्स के काटे जाने पर इंटरनेट ठप्प भी हो सकता है।

बता दें, समंदर में गहराई में बिछी यह इंटरनेट कनेक्टिविटी फाइबर केबल्स सभी देशों के लिए काफी जरूरी है। भारत की बात करें तो हमारी अर्थव्यवस्था में तेजी के साथ डिजिटल सेवाओं, ऑनलाइन पेमेंट और एआई का प्रयोग बढ़ा है। ऐसे में अगर लाल सागर की केबल्स को नुकसान होता है, तो इसका सीधा असर देश की कनेक्टिविटी और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

दुनिया के लगभग 95% अंतरराष्ट्रीय डेटा का प्रवाह इन समंदर में बिछी केबल्स के जरिए होता है। भारत में फिलहाल 17 केबल्स हैं, जो मुंबई, चेन्नई, कोच्चि, तूतीकोरिन और तिरुवनंतपुरम जैसे शहरों में लैंडिंग स्टेशनों से जुड़े हैं। भारत की इंटरनेट ट्रैफिक का बड़ा हिस्सा (लगभग दो-तिहाई) मुंबई से गुजरता है, जबकि बाकी चेन्नई से। इसका मतलब है कि अगर इन दो शहरों में किसी भी तरह की समस्या (तकनीकी खराबी या प्राकृतिक आपदा) होती है, तो देश के बड़े हिस्से में इंटरनेट बाधित हो सकता है।