August 13, 2026

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हाथ में गीता, आंखों में नई जिंदगी का सपना… 15 अगस्त से पहले रायपुर जेल से 9 आजीवन कैदी रिहा, भावुक कर देने वाला VIDEO

रायपुर। स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले रायपुर से एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने हर किसी का ध्यान खींच लिया। गुरुवार को रायपुर केंद्रीय जेल से एक महिला समेत 9 सजायाफ्ता कैदियों को रिहा किया गया। जेल से बाहर निकलते समय इन सभी के हाथों में श्रीमद्भगवद्गीता थी और आंखों में जिंदगी को नए सिरे से शुरू करने का सपना।

लंबे समय तक जेल की चारदीवारी में रहने के बाद जब कैदियों ने खुले आसमान के नीचे कदम रखा तो उनके चेहरे पर अलग-अलग भाव नजर आए। कोई मुस्कुराता हुआ बाहर निकला तो किसी की आंखें भावुक थीं। कई कैदियों के परिजन भी उन्हें लेने जेल के मुख्य द्वार पर पहुंचे थे।

हाथ में गीता लेकर जेल से बाहर निकले कैदी

रिहाई के दौरान सबसे खास तस्वीर यह रही कि कैदी अपने हाथों में गीता लेकर जेल से बाहर आए। यह उनके लिए केवल जेल से बाहर निकलने का क्षण नहीं था, बल्कि जिंदगी को एक नई दिशा देने की उम्मीद भी नजर आई।

लंबे समय बाद खुले वातावरण में कदम रखने के दौरान कुछ कैदी बेहद खुश दिखाई दिए। वहीं कुछ के चेहरे पर भावुकता साफ नजर आई।

जेल के मुख्य द्वार से बाहर निकलते समय उनके हाथ में गीता और चेहरों पर नई शुरुआत की उम्मीद ने इस पूरे दृश्य को यादगार बना दिया।

किसी को लेने पहुंचे परिवार के लोग, कोई अकेला निकला

रिहाई के इस मौके पर कैदियों के परिवारों में भी अलग-अलग भावनाएं देखने को मिलीं। कुछ परिवार अपने स्वजनों का इंतजार करने के लिए जेल के बाहर पहुंचे थे।

जैसे ही उनके अपने लोग जेल से बाहर आए, परिवार के सदस्यों के लिए यह भावुक पल बन गया। लंबे इंतजार के बाद अपनों से मिलने की खुशी उनके चेहरों पर दिखाई दी।

वहीं कुछ कैदी ऐसे भी थे, जिन्हें लेने के लिए कोई परिवार का सदस्य नहीं पहुंचा। वे अकेले ही जेल के मुख्य द्वार से बाहर निकले और आगे की जिंदगी की ओर बढ़ गए।

बोले- अब बाकी जिंदगी अच्छे से गुजारनी है

जेल से रिहा हुए कुछ कैदियों ने बातचीत में कहा कि अब वे अपनी बाकी जिंदगी अच्छे तरीके से गुजारना चाहते हैं।

लंबे समय तक जेल में रहने के बाद उनके लिए बाहर की दुनिया एक नई शुरुआत जैसी थी। कुछ कैदियों ने अपनी भावनाएं खुलकर साझा कीं, जबकि कुछ बिना कुछ कहे सिर्फ मुस्कुराते हुए आगे बढ़ गए।

उनके चेहरे की मुस्कान और आंखों में दिख रही उम्मीद बता रही थी कि वे बीते समय को पीछे छोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश करना चाहते हैं।

स्वतंत्रता दिवस से पहले मिली नई आजादी

15 अगस्त से पहले इन कैदियों की रिहाई का यह मौका उनके लिए खास रहा। देश जब स्वतंत्रता दिवस मनाने की तैयारी कर रहा है, उसी समय इन लोगों ने भी जेल की लंबी सजा के बाद खुले आसमान में कदम रखा।

हालांकि, जेल से बाहर निकलना उनके लिए जिंदगी का अंत नहीं, बल्कि एक नई जिम्मेदारी की शुरुआत है। समाज में दोबारा सम्मान के साथ जीवन जीना और कानून का पालन करना अब उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी।

रायपुर केंद्रीय जेल से बाहर निकलते समय हाथ में गीता और आंखों में उम्मीद लिए इन नौ लोगों की तस्वीरें यह संदेश देती नजर आईं कि जीवन में सुधार और नई शुरुआत की संभावना हमेशा बनी रहती है।

एक तरफ जेल का बंद दरवाजा पीछे छूट गया, तो दूसरी तरफ खुले रास्ते उनके सामने थे—और उन रास्तों पर आगे बढ़ने की उम्मीद उनके चेहरों पर साफ दिखाई दे रही थी।