एम्स रायपुर हास्पिटल में रिक्त पदों पर हुई प्रतिनियुक्तियों में बड़ा खेल उजागर हुआ है. कई पदों पर नियमों को दरकिनार करके नियुक्तियां कर दी गईं. आश्चर्य कि छह महीने के अंदर दो बड़े विज्ञापन निकाले गए और बेरोजगारों के साथ भरपूर अन्याय किया गया. आश्चर्य कि छत्तीसगढ़ को छोड़कर बाहरी राज्यों के युवाओं को नियुक्ति में प्राथमिकता दी गई तथा स्थानीय सांसद और अन्य सदस्यों को इसकी कोई जानकारी ही नही है.
सूत्रों के मुताबिक खुलासा हुआ है कि एडमिनिस्ट्रेट्रिव आफिसर और स्टोर्स आफिसर के पद पर इस तरह घालमेल हुआ है कि एक ही व्यक्ति को दोनों पदों पर बिठा दिया गया जिसका नाम वेंकट रमन्ना बताया जा रहा है. रमन्ना पहले आडिटर जनरल आफिस में कार्यरत थे लेकिन अब उन्हें एम्स में एडमिनिस्ट्रेट्रिव आफिसर पद पर नियुक्ति दी गई है. आश्चर्य कि कुछ दिनों बाद ही रमन्ना को स्टोर आफिसर की जिम्मेदारी भी सौंप दी गई.
ना डिग्री, ना अनुभव फिर भी दे दिया पदभार
सूत्र बताते हैं कि विज्ञापन में जारी नियमों के अनुसार स्टोर्स आफिसर पद के लिए डिप्लोमा इन मटेरियल मेनेजटमेंट की डिग्री होना चाहिए साथ ही पांच साल का अनुभव भी लेकिन रमन्ना दोनों ही अर्हता पूरी नही करते. इसके बावजूद उन्हें इस पद पर बिठा दिया गया! एक बार यह भी मान लिया जाए कि काम चलाने के लिए अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई होगी लेकिन जब एम्स ने विगत 4 अप्रैल 2022 को 17 पोस्ट के लिए दूसरा विज्ञापन निकाला और आवेदन मंगाए तो स्टेार आफिसर के पद को नजरअंदाज करके असिस्टेण्ट स्टोर आफिसर के चार पद निकाले गए.
विज्ञापन चार पदों का, भरे गए सिर्फ दो
आश्चर्य कि इनमें से केवल दो ही पद भरे गए जबकि दो पद अभी भी खाली हैं. एक तरफ युवाओं को सरकारी नौकरी नही मिल रही, दूसरी तरफ विज्ञापन में निकाले गए पदों को ही नही भरा जा सका है. एम्स प्रबंधन चाहता तो दूसरे विज्ञापन में स्टेार आफिसर की पोस्ट निकाल सकता था लेकिन ऐसा नही हो सका. जबकि एक ही व्यक्ति से दो—दो पदों पर काम लिया जा रहा है, वह भी बिना किसी योग्यता और अनुभव के.
बेरोजगारों के साथ खिलवाड़ और सांसद चुप
इधर इस पूरे मामले पर एम्स प्रबंधन यही कहकर पल्ला झाड़ ले रहा है कि वह आटोनामस बॉडी है इसलिए अपने हिसाब से काम लेने के लिए स्वतंत्र है लेकिन देश की ऐसी कौन सी संस्था होगी जिसे नियमों को दरकिनार करके संचालित होने की छूट मिली है. यह पूरी तरह तानाशाही और अलोकतांत्रिक रवैया है और छत्तीसगढ़ के बेरोजगारों के साथ खिलवाड़ करने की छूट नही दी जा सकती. एम्स में हो रही नियुक्तियों में एक बड़ा खेल यह चल रहा है कि बाहरी राज्यों के लोगों को लाकर यहां नियुक्तियां दी जा रही हैं. इसे स्थानीय सांसदों को संज्ञान में लेना चाहिए खासकर भाजपा सांसदों को जिनकी केन्द्र में सरकार है!

More Stories
राघव चड्ढा का AAP पर बड़ा हमला, ‘शीश महल पार्ट 2’ को लेकर पार्टी पर उठाए सवाल!
लू से बचने के लिए अपनाएं ये 8 आदतें, भीषण गर्मी में सुरक्षित रहेंगे!
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारतीय शेयर बाजार की उपलब्धियों को सराहा, सेबी को सख्त कदाचार नियंत्रण की दी चेतावनी