June 15, 2026

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वैश्विक संकट के बीच भारत को बचा रही घरेलू मांग! निर्मला सीतारमण ने बताईं अर्थव्यवस्था की बड़ी चुनौतियां

वैश्विक व्यापार में बढ़ती अनिश्चितताओं और आपूर्ति श्रृंखला की चुनौतियों के बीच भारत की अर्थव्यवस्था मजबूती से आगे बढ़ रही है। वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने कहा है कि मौजूदा समय में दुनिया भर में व्यापारिक अस्थिरता और भू-राजनीतिक परिस्थितियां कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए चुनौती बन रही हैं, लेकिन भारत को उसकी मजबूत घरेलू मांग से बड़ा सहारा मिल रहा है।

नई दिल्ली में आयोजित एक आर्थिक सम्मेलन के दौरान वित्त मंत्री ने कहा कि वैश्विक स्तर पर आयात-निर्यात से जुड़े जोखिम लगातार बढ़ रहे हैं। कई देशों द्वारा अचानक आयात शुल्क बढ़ाने और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव से अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रभावित हो रहा है। ऐसे माहौल में भारत के लिए सबसे बड़ी ताकत उसका विशाल घरेलू बाजार और मजबूत उपभोक्ता मांग है।

वैश्विक अनिश्चितताओं से बढ़ी चिंता

वित्त मंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में वैश्विक व्यापारिक वातावरण काफी अस्थिर बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कई महत्वपूर्ण वस्तुओं की कीमतों और आपूर्ति में लगातार बदलाव देखने को मिल रहा है।

उन्होंने बताया कि भारत जिन प्रमुख वस्तुओं का आयात करता है, उनकी लागत और उपलब्धता दोनों ही प्रभावित हो रही हैं। ऐसे हालात में मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश के लिए सुरक्षा कवच की तरह काम करता है।

घरेलू मांग बनी अर्थव्यवस्था की ताकत

वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था को घरेलू बाजार से मजबूत समर्थन मिल रहा है।

मुख्य कारण:

देश का विशाल उपभोक्ता आधार
बढ़ता घरेलू खर्च
सेवा क्षेत्र की मजबूती
निवेश गतिविधियों में वृद्धि
बुनियादी ढांचे पर सरकारी निवेश

वित्त मंत्री के अनुसार, घरेलू मांग मजबूत रहने से आर्थिक गतिविधियों को गति मिल रही है और इसका सकारात्मक प्रभाव विकास दर पर भी पड़ रहा है।

विनिर्माण क्षेत्र के सामने नई चुनौती

हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि विनिर्माण क्षेत्र के सामने कुछ कठिनाइयां मौजूद हैं।

प्रमुख चुनौतियां
आयातित कच्चे माल की बढ़ती कीमतें
वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बाधाएं
उत्पादन लागत में वृद्धि
अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा

इन कारणों से कई उद्योगों पर अतिरिक्त दबाव बना हुआ है।

मानसून और किसानों की आय पर नजर

वित्त मंत्री ने आगामी मानसून को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस वर्ष अल-नीनो के प्रभाव के कारण सामान्य से कम बारिश होने की संभावना जताई जा रही है।

हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि देश के पास पर्याप्त खाद्यान्न भंडार उपलब्ध है, इसलिए खाद्यान्न संकट जैसी स्थिति बनने की संभावना नहीं है। लेकिन कम बारिश का असर किसानों की आय और कृषि उत्पादन पर पड़ सकता है।

उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर राहत

खरीफ सीजन की तैयारियों को लेकर सरकार ने राहत भरी जानकारी दी है।

वित्त मंत्री के अनुसार—

खरीफ फसलों के लिए उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता है।
रबी सीजन को लेकर जो चिंताएं थीं, वे भी काफी हद तक दूर हो गई हैं।
विदेशों से उर्वरकों की आपूर्ति बढ़ने से स्थिति सामान्य बनी हुई है।
विदेशी निवेश बढ़ाने पर सरकार का फोकस

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली और विदेशी मुद्रा भंडार पर संभावित दबाव को देखते हुए सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक ने कई कदम उठाए हैं।

प्रमुख उपाय
बॉन्ड बाजार में विदेशी निवेश को प्रोत्साहन
बैंकों को विदेशों से पूंजी जुटाने की अनुमति
सार्वजनिक उपक्रमों के लिए पूंजी जुटाने के नए अवसर
जोखिम प्रबंधन में रिजर्व बैंक की भूमिका मजबूत करना

इन उपायों का उद्देश्य विदेशी पूंजी प्रवाह बढ़ाना और आर्थिक स्थिरता बनाए रखना है।