June 12, 2026

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धड़ल्ले से दौड़ रहे ओवरलोड ट्रक, 34 टन धान लोड, हादसे को कौन दे रहा ‘ग्रीन सिग्नल’

गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद में इन दिनों आरटीओ नियमों की खूब धज्जियां उड़ाई जा रही है. नियमों को ताक में रखकर धान का परिवहन किया जा रहा है. ओवरलोड ट्रकों से दुर्घटना की आशंका बढ़ गई है. सड़कें भी खराब हो रही हैं, लेकिन जिम्मेदारों की इस ओर निगाहें नहीं जा रही हैं.

देवभोग से लेकर राजिम तक सड़कों में ऐसे ओवर लोडेड ट्रक दिखना आम बात हो है. समर्थन मूल्य में खरीदे गए धान को ट्रकों में भर कर संग्रहण केंद्र कुंडेल भेजा जा रहा है. परिवहन के दौरान आरटीओ नियमों की खुलकर अनदेखी की जा रही है.

14 चक्का ट्रकों में अधिकतम 32 टन पासिंग कैपेसिटी है, जबकि 34 टन लोड किया जा रहा है. 12 चक्का वाहन में 24 टन पासिंग है, जिसमें 28 टन लोड किया जा रहा. इसी तरह 10 चक्का वाहन की लोड कैपेसिटी 21 टन तय है, लेकिन इसमें 24 टन भर कर परिवहन किया जा रहा है.

मामले में जब ट्रांसपोर्टर के पेटी कॉन्ट्रक्टर संदीप कोटक से बात हुई तो उन्होंने कहा कि 23 टन एक्स्ट्रा लोड करा लेते हैं. सरकारी कार्य है. दुरस्त इलाके से धान परिवहन करना होता है. सीमित मात्रा में लाया जाए तो भाड़ा नहीं पोसाता.

यंहा भय और नुकसान है
सड़कों की कैपेसिटी तय है. ऐसे में ओवरलोड वाहनों से सड़क खराब हो रहे हैं. हाल ही में तौरेगा के पास धान से भरे ओवर लोड ट्रक पलट कर दुर्घटना ग्रस्त हो गया था. ओवर लोड गाड़िया जब गुजरती हैं, तो क्रॉस करने वालों को यह भय बना रहता है कंही उन पर पलट न जाए. भीड़ और बाजार से गुजरते वक़्त हादसे का डर बना रहता है. ओवरलोड वाहनों से टैक्स की भी चोरी हो रही है.

इन्हें है फायदा
परिवहन के एवज में मात्रा के आधार पर मार्कफेड भुगतान करती है. ऐसे में ज्यादा से ज्यादा मात्रा लोड कर अधिक मुनाफा ट्रांपोर्टर कमाता है. प्राप्त जानकारी के मूताबिक इस कार्य में जिले में 300 ट्रके लगी है. अधिकृत ट्रांसपोर्टर के अलावा पेटी कॉन्ट्रैक्ट और अन्य वाहन मालिकों से वाहन अरेंज कर काम मे लगाया गया है.

वहीं नाम न छापने की शर्त पर कुछ वाहन मालकों ने बताया कि ट्रांसपोर्टर की ओर से मिलने वाले भुगतान में प्रति ट्रक 3 हजार रुपये कटौती की जाती है, जिसे ओवरलोड परिवहन के एवज में आरटीओ भुगतान बताया जाता है.

मामले में आरटीओ मृत्युंजय पटेल ने कहा कि ओवर लोड परिवहन की अनुमति किसी को नहीं है. एक बार मामले में कलेक्टर से बात कर लेते हैं, फिर कार्रवाई करेंगे.