इंदौर, इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से फैले डायरिया ने विकराल रूप ले लिया है। हालात इतने खराब हैं कि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने इसे बेहद डरावना बताया है। मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शहर में फैले इस प्रकोप को देखते हुए हाई कोर्ट के जजों को भी अपनी सुरक्षा की चिंता सताने लगी।
मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस वी.के. शुक्ला ने एक अहम और रोचक टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि शहर में इतना पैनिक है कि कोई भी खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहा है। जस्टिस शुक्ला ने कोर्ट में बताया, ‘इस केस के बारे में पढ़ने के बाद मेरा पहला रिएक्शन यह था कि हाई कोर्ट की पानी की टंकी कौन साफ करता है? मैंने तुरंत कॉन्ट्रैक्टर को बुलाया, चेक किया और उसे तुरंत साफ करवाया।’ उन्होंने माना कि पूरे शहर में दहशत का माहौल है।
मध्य प्रदेश सरकार ने हाई कोर्ट की इंदौर बेंच को बताया कि भागीरथपुरा में दूषित पानी से अब तक 16 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। अतिरिक्त महाधिवक्ता (AAG) राहुल सेठी ने ‘डेथ ऑडिट रिपोर्ट’ का हवाला देते हुए कोर्ट को बताया कि कुल 23 संदिग्ध मौतों में से 16 स्पष्ट रूप से डायरिया की वजह से हुई हैं, जबकि 6 मामलों में कारण स्पष्ट नहीं है।
सरकार द्वारा पेश की गई रिपोर्ट के मुताबिक, भागीरथपुरा में यह प्रकोप 24 दिसंबर 2025 से शुरू हुआ था। इस मामले की सुनवाई जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच कर रही है। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि स्थिति गंभीर है और इस पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है।

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