जशपुर। जिले के धान उपार्जन केंद्र में सामने आए 6.55 करोड़ रुपए से अधिक के बहुचर्चित धान घोटाला मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। जशपुर पुलिस ने इस प्रकरण के मुख्य आरोपी एवं फरार समिति प्रबंधक जयप्रकाश साहू को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी को न्यायालय में पेश करने के बाद न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है। यह मामला तुमला थाना क्षेत्र के कोनपारा धान उपार्जन केंद्र से जुड़ा हुआ है। पुलिस के अनुसार जयप्रकाश साहू बेहद शातिर अपराधी है। एफआईआर दर्ज होने के बाद वह लगातार ठिकाने बदलता रहा, जिससे पुलिस को उसकी गिरफ्तारी में काफी मशक्कत करनी पड़ी।
पहले वह दमोह (मध्यप्रदेश) भाग गया, इसके बाद पुलिस के बढ़ते दबाव के चलते कोरबा जिले के विकास नगर, कुसमुंडा क्षेत्र में जाकर छिप गया। गिरफ्तारी से बचने के लिए वह बार-बार मोबाइल सिम बदलता रहा और अपने परिचितों के नाम से संपर्क में बना रहा, लेकिन जशपुर पुलिस की सतर्कता और तकनीकी निगरानी के चलते अंततः उसे पकड़ लिया गया। इस मामले में पुलिस पहले ही फड़ प्रभारी शिशुपाल यादव को 6 जनवरी 2026 को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। जयप्रकाश साहू की गिरफ्तारी के बाद भी इस घोटाले से जुड़े अन्य चार आरोपी अभी फरार हैं, जिनकी तलाश में पुलिस की टीमें लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। पुलिस का कहना है कि जल्द ही शेष आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि इस मामले में 2 जनवरी 2026 को छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक मर्यादित (अपेक्स बैंक) जशपुर के नोडल अधिकारी राम कुमार यादव (61 वर्ष) ने थाना तुमला में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि धान खरीदी उपकेंद्र कोनपारा में पदस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों ने आपसी मिलीभगत कर धान खरीदी में बड़े पैमाने पर हेराफेरी की है। जांच के दौरान सामने आया कि खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में कंप्यूटर रिकॉर्ड के अनुसार कोनपारा धान उपार्जन केंद्र में कुल 1,61,250 क्विंटल धान की खरीदी दर्शाई गई थी। जबकि वास्तव में मिलों और संग्रहण केंद्रों को केवल 1,40,663.12 क्विंटल धान ही भेजा गया। इस तरह कुल 20,586.88 क्विंटल धान की भारी कमी पाई गई। गायब धान की कीमत शासन द्वारा निर्धारित 3,100 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से 6 करोड़ 38 लाख 19 हजार 328 रुपए आंकी गई है। इसके अतिरिक्त धान की पैकिंग में उपयोग किए गए 4,898 नए एवं पुराने बारदाने भी गायब पाए गए, जिनकी कीमत 17 लाख 7 हजार 651 रुपए बताई गई है। इस प्रकार इस पूरे घोटाले में शासन को कुल 6 करोड़ 55 लाख 26 हजार 979 रुपए के आर्थिक नुकसान का अनुमान है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामले की जांच जारी है और घोटाले से जुड़े सभी पहलुओं की गहनता से पड़ताल की जा रही है। मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद अब पूरे नेटवर्क का खुलासा होने की उम्मीद जताई जा रही है।

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