चुनाव आयोग ने बिहार सहित कई राज्यों में एसआईआर कराया है. इसके तहत वोटर लिस्ट का सर्वेक्षण किया गया. साथ ही उसकी छंटनी भी गई. बंगाल में भी प्रक्रिया जारी है जिसे लेकर अब एक बार फिर इसे लेकर विवाद सामने आ रहा है. ऐसा इसलिए क्योंकि यहां एक संत ने अपने अपने माता–पिता के नाम में रामकृष्ण परमहंस और शारदामणि लिखा है. इस पर आयोग ने आपत्ति जताई है और संत राघवनामद पुरी को सुनवाई के लिए बुलाया था.
चुनाव आयोग ने सुनवाई के दौरान यहां उनसे उनके माता पिता के नाम लिखे जाने को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया था. जिसके जवाब में उन्होंने नाम लिखने की वजह बताई और साफ कहा कि लिस्ट से नाम काटना है तो काट दें, लेकिन वे डिटेल नहीं बदलेंगे.
संत राघवनाम पुरी ने कहा कि मैंने धर्म बदला है. मेरे पासपोर्ट में मेरे माता-पिता के नाम ऐसे हैं. हम साधु हैं. मैं अपना पुराना नाम इस्तेमाल नहीं करूंगा. अगर आप नाम काट दें तो ठीक रहेगा. वे यह भी कहते हैं, साधुओं के भगवान श्री रामकृष्ण हैं. इसलिए मैं उनका नाम लूंगा. सभी डॉक्यूमेंट्स में ऐसा ही होता है. हम लोग सन्यास लेने के बाद अपनी पुरानी जिंंदगी से पूरी तरह नाता खत्म कर देते हैं.
राघवनाम ने आगे कहा कि जब हम साधु बनते हैं, तो हमारे डॉक्यूमेंट्स ऐसे ही बनते हैं. मैं 2002 में सिलीगुड़ी आया था. तब से मैंने डॉक्यूमेंट्स तैयार किए हैं. मैंने कई बार वोट भी दिया है. मैं किसी भी हालत में अपने पुराने नाम का इस्तेमाल नहीं करूंगा.
मेयर गौतम देव ने राघवनामद पुरी को चुनाव आयोग की तरफ से बुलाए जाने पर नाराजगी जाहिर की है. मेयर गौतम देव ने कहा आयोग ने साधु-संतो के इस तहर नाम लिखने पर आपत्ति जताई थी. जिस पर साधु संतो की तरफ से कहा गया कि संन्यासियों की एक विशेष परंपरा होती है. जब वे संन्यास लेते हैं, तो वे अपने पिछले जन्म से बाहर आते हैं और नए दीक्षित होते हैं. फिर वे अपने माता-पिता का नाम भी उसी तरह रखते हैं. ये संत और साधु हमारे मार्गदर्शक हैं.

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