रायपुर। कोल लेवी वसूली मामले में ACB/EOW ने बड़ी कार्रवाई करते हुए विशेष अदालत में 5वां पूरक अभियोग पत्र (चालान) पेश किया है। यह पूरक चालान आरोपी नारायण साहू के खिलाफ प्रस्तुत किया गया है, जिसमें लगभग 1000 पन्नों का विस्तृत दस्तावेज शामिल है। मामले में जांच एजेंसियों ने इसे संगठित अवैध वसूली नेटवर्क से जुड़ा गंभीर मामला बताया है।
जानकारी के अनुसार, जांच एजेंसी ने नारायण साहू को अवैध कोल लेवी वसूली सिंडिकेट का सक्रिय सदस्य बताया है। आरोप है कि वह इस पूरे नेटवर्क में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा था और कोयला व्यापारियों तथा परिवहनकर्ताओं से अवैध रूप से लेवी वसूलने में शामिल था। एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, यह पूरा नेटवर्क कथित रूप से सूर्यकांत के निर्देशों पर काम करता था। आरोप है कि निर्देश मिलने के बाद कोयला व्यापारियों और परिवहनकर्ताओं से अवैध वसूली की जाती थी और वसूली गई रकम को आगे सिस्टम के अन्य सदस्यों तक पहुंचाया जाता था।
जांच में यह भी सामने आया है कि वसूली गई राशि को एकत्र करने के बाद उसे रजनीकांत तिवारी के पास जमा कराया जाता था। इसके बाद इस धनराशि को आगे विभिन्न माध्यमों से स्थानांतरित और व्यवस्थित करने की प्रक्रिया की जाती थी। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि लगभग 7.5 करोड़ रुपये की राशि सौम्या और समीर नामक व्यक्तियों तक ट्रांसफर, परिवहन और मैनेजमेंट के जरिए पहुंचाई गई। ACB/EOW की जांच के अनुसार, यह पूरा नेटवर्क संगठित तरीके से कार्य कर रहा था और इसमें कई स्तरों पर लोग शामिल थे, जो अलग-अलग भूमिकाएं निभा रहे थे। किसी का काम वसूली करना था, तो किसी का काम रकम को आगे पहुंचाना और मैनेज करना था। फिलहाल आरोपी नारायण साहू रायपुर जेल में बंद है। उसके खिलाफ पहले से ही जांच चल रही थी।
अब इस 1000 पन्नों के पूरक चालान के साथ मामले में और गंभीर आरोप जोड़े गए हैं। जांच एजेंसी का कहना है कि आगे भी इस मामले में अन्य आरोपियों की भूमिका की जांच जारी है और जरूरत पड़ने पर और पूरक अभियोग पत्र भी दाखिल किए जा सकते हैं। विशेष अदालत में पेश किए गए इस चालान में कई दस्तावेज, वित्तीय लेनदेन के रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्य शामिल किए गए हैं, जो कथित अवैध लेवी वसूली नेटवर्क को साबित करने के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। इस कार्रवाई के बाद मामले ने एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। हालांकि जांच एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि उनकी कार्रवाई पूरी तरह साक्ष्यों पर आधारित है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। फिलहाल कोर्ट में मामले की आगे की सुनवाई जारी है और जांच एजेंसियां अन्य संभावित कड़ियों की भी जांच कर रही हैं।

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