नई दिल्ली/दि बीबीसी लाइव :
आईएनएस विक्रांत पर विमान उतारने का परीक्षण नवंबर में शुरू होगा, जो 2023 के मध्य तक पूरा हो जाएगा. वहीं, मिग-29 के जेट विमान पहले कुछ वर्षों के लिए युद्धपोत से संचालित होंगे.
आईएनएस विक्रांत का सेवा में आना रक्षा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगाप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोचीन में देश के पहले स्वदेशी युद्धपोत INS विक्रांत को भारतीय नौसेना को समर्पित किया.
इस मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी उनके साथ मौजूद रहे.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा, सेनाओं में किस तरह बदलाव आ रहा है उसका एक पक्ष मैं देश के सामने रखना चाहता हूं, विक्रांत जब हमारे समुद्री क्षेत्र की सुरक्षा के लिए उतरेगा, तो उस पर नौसेना की अनेक महिला सैनिक भी तैनात रहेंगी.
समंदर की अथाह शक्ति के साथ असीम महिला शक्ति, ये नए भारत की बुलंद पहचान बन रही है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा, आज 2 सितंबर, 2022 की ऐतिहासिक तारीख को, इतिहास बदलने वाला एक और काम हुआ है.
आज भारत ने गुलामी के एक निशान, गुलामी के एक बोझ को अपने सीने से उतार दिया है.
आज से भारतीय नौसेना को एक नया ध्वज मिला है. अब तक भारतीय नौसेना के ध्वज पर गुलामी की पहचान बनी हुई थी.
लेकिन अब आज से छत्रपति शिवाजी से प्रेरित, नौसेना का नया ध्वज समंदर और आसमान में लहराएगा.यह युद्धपोत से ज़्यादा तैरता हुआ एयरफ़ील्ड है, यह तैरता हुआ शहर है.
इसमें जतनी बिजली पैदा होती है उससे 5,000 घरों को रौशन किया जा सकता है. इसका फ्लाइंग डेक भी दो फुटबॉल फ़ील्ड से बड़ा है. इसमें जितने तार इस्तेमाल हुए हैं वह कोचीन से काशी तक पहुंच सकते हैं.
पीएम मोदी ने आगे कहा INS विक्रांत के हर भाग की अपनी एक खूबी है, एक ताकत है, अपनी एक विकासयात्रा भी है. ये स्वदेशी सामर्थ्य, स्वदेशी संसाधन और स्वदेशी कौशल का प्रतीक है. इसके एयरबेस में जो स्टील लगी है, वो स्टील भी स्वदेशी है.
आपको बता दें की INS विक्रांत को बनने में करीब 13साल लगे। इस कार्य की प्रगति स्वीकृति वर्ष 2009 को मिली और लागत करीब 20हजार करोड़ बताई जा रही है। यह देश का पहला और सबसे बड़ा स्वदेशी युद्धपोत है। आज देश को समर्पित कर दिया गया।

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